गजल - 28 - रियाज खान गौहर भिलाई

चाह थी साथ उसको रखूँ जोड़कर  बीच मझधार में वो गया छोड़कर 

Mar 7, 2025 - 08:53
Mar 7, 2025 - 09:05
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गजल - 28 - रियाज खान गौहर भिलाई
चाह थी साथ उसको रखूँ जोड़कर  बीच मझधार में वो गया छोड़कर  | indiaandindians.in

ग़ज़ल 

चाह थी साथ उसको रखूँ जोड़कर 
बीच मझधार में वो गया छोड़कर 

कौन सी मुझसे ऐसी ख़ता हो गई 
दूर जाने लगा दिल मिरा तोड़कर 

वक्त आया ऐलक्शन का जब देखिये 
हाँथ अपने चले आ रहे जोड़कर 

फैसले उल्टे पुल्टे किये जा रहे 
राज करते ही आऐ हमें फोड़कर 

माँ बाप की मोहब्बत धरी रह गई 
बच्चे जाने लगे आज घर छोड़कर 

दोस्त अच्छे मिलें ये तो मुमकिन नहीं 
सबके सब बात करते हैं मुहँ मोड़कर 

आजकल मैकशी तो खुले आम है 
वो तो चलते नहीं रास्ता छोड़कर 

जो भी मैंने कहा खामियांँ ढ़ूँढ़िये
सोचकर देखिये तोड़कर मोड़कर 

दिल लगाना तो गौहर को भारी पड़ा 
रख दिया उसने पूरी तरह तोड़कर 

ग़ज़लकार 
रियाज खान गौहर भिलाई छत्तीसगढ़

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Team India मैंने कई कविताएँ और लघु कथाएँ लिखी हैं। मैं पेशे से कंप्यूटर साइंस इंजीनियर हूं और अब संपादक की भूमिका सफलतापूर्वक निभा रहा हूं।