क्या जमशेदपुर में जज के खिलाफ यौन शोषण का केस साबित होगा?

जमशेदपुर के बिष्टुपुर थाना क्षेत्र में जज के खिलाफ यौन शोषण, गर्भपात, प्रताड़ना और दूसरी शादी करने का मामला सामने आया है। पढ़ें पूरी खबर और जानें क्या है सच।

Jul 6, 2024 - 11:32
Jul 6, 2024 - 11:37
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क्या जमशेदपुर में जज के खिलाफ यौन शोषण का केस साबित होगा?
क्या जमशेदपुर में जज के खिलाफ यौन शोषण का केस साबित होगा?

जमशेदपुर: जमशेदपुर के बिष्टुपुर थाना क्षेत्र में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां प्रथम न्यायिक दंडाधिकारी नरेंद्र कुमार के खिलाफ यौन शोषण, गर्भपात, प्रताड़ना और दूसरी शादी करने का आरोप लगा है। इस मामले में एक महिला ने बिष्टुपुर थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई है, जिसके बाद पुलिस ने तफ्तीश शुरू कर दी है।

क्या है पूरा मामला?

प्राथमिकी के अनुसार, नरेंद्र कुमार की पत्नी शीतल कुमारी पर भी मारपीट और प्रताड़ना का आरोप है। पीड़िता ने बताया कि उसकी शादी 2003 में हुई थी और 2017 में उसके पति का निधन हो गया। नवंबर 2021 में उसने नरेंद्र के घर में नौकरानी के रूप में काम करना शुरू किया। नरेंद्र ने कहा कि वह तलाकशुदा है और विधवा महिला और उसके बच्चों की देखभाल करेगा। 26 जनवरी 2022 को नरेंद्र ने उसकी मांग में सिंदूर भरकर शारीरिक संबंध बनाए, जिससे वह गर्भवती हो गई। बाद में उसकी मर्जी के खिलाफ गर्भपात कराया गया।

आरोपों की गहराई

पीड़िता ने आरोप लगाया है कि जब उसने कोर्ट मैरिज के लिए दबाव डाला, तो नरेंद्र उसे दिल्ली और चंडीगढ़ ले गया, जहां उन्होंने मंदिर में शादी की। इसके बाद हरिद्वार और केदारनाथ में शारीरिक संबंध बनाए। उसने दावा किया कि दूसरी बार गर्भवती होने पर नरेंद्र ने उसके पेट में लात मारकर गर्भपात करा दिया। इसके बाद, 15 दिसंबर 2023 को नरेंद्र ने महाराष्ट्र की शीतल कुमारी से शादी कर ली, जिससे पीड़िता को मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाने लगा।

पुलिस की कार्यवाही

प्राथमिकी दर्ज होने के बाद, बिष्टुपुर थाना पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस सभी संभावित एंगल से जांच कर रही है और सबूतों के आधार पर आगे की कार्यवाही करेगी। फिलहाल नरेंद्र कुमार लंबी छुट्टी पर चले गए हैं।

समाजिक और कानूनी दृष्टिकोण

इस मामले ने न्यायिक प्रणाली और समाज के लिए कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या एक जज पर लगे ये आरोप साबित हो पाएंगे? क्या पीड़िता को न्याय मिल पाएगा? समाज के लिए यह एक गंभीर चेतावनी है कि घरेलू और कार्यस्थल के विवादों में किस हद तक जाया जा सकता है।