Chaibasa Scandal: बच्चे को चढ़ा दिया 'HIV वाला खून'! सदर अस्पताल की गंभीर लापरवाही से मचा हंगामा
झारखंड के सदर अस्पताल में 7 साल के थैलेसीमिया पीड़ित बच्चे को HIV संक्रमित खून क्यों चढ़ा? माता-पिता के नेगेटिव होने पर भी बच्चा पॉजिटिव कैसे हो गया? क्या यह ब्लड बैंक कर्मचारी की जानबूझकर की गई बदले की कार्रवाई है? दोषियों पर कार्रवाई के लिए उपायुक्त से क्या मांग की गई है? पूरा मामला पढ़ें!
चाईबासा, 25 अक्टूबर 2025 - झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था पर एक बार फिर से कलंक लग गया है। चाईबासा के सदर अस्पताल के ब्लड बैंक में हुई एक गंभीर लापरवाही या साजिश ने एक मासूम बच्चे के भविष्य को अंधेरे में धकेल दिया है। सात साल के एक थैलेसीमिया पीड़ित बच्चे को कथित तौर पर एचआईवी संक्रमित खून चढ़ा दिया गया, जिसके बाद बच्चे की जांच रिपोर्ट एचआईवी पॉजिटिव आई है।
इस सनसनीखेज घटना ने न केवल स्वास्थ्य विभाग को हिलाकर रख दिया है, बल्कि यह सवाल भी खड़ा कर दिया है कि क्या यह सिर्फ एक लापरवाही है, या फिर बदले की भावना में किया गया जानबूझकर किया गया अपराध?
माता-पिता नेगेटिव, फिर बच्चा पॉजिटिव कैसे?
मंझारी निवासी इस सात साल के बच्चे को थैलेसीमिया है, जिसके कारण उसे जीवन भर हर महीने खून चढ़ाने की आवश्यकता होती है। उसके पिता ने आरोप लगाया है कि सदर अस्पताल के ब्लड बैंक में यह गंभीर गलती या अपराध हुआ है।
सबसे चौंकाने वाला और संदेह पैदा करने वाला तथ्य यह है कि जब 18 अक्टूबर को बच्चे की एचआईवी रिपोर्ट पॉजिटिव आई, तो उसके माता-पिता ने भी अपनी जांच कराई। माता-पिता दोनों की रिपोर्ट एचआईवी नेगेटिव आई है। यह स्पष्ट रूप से इंगित करता है कि संक्रमण बच्चे में किसी जन्मजात कारण से नहीं, बल्कि बाहर से, यानी संक्रमित रक्त चढ़ाने से ही हुआ है।
बदले की आग का आरोप
बच्चे के पिता ने सीधे तौर पर सदर अस्पताल के ब्लड बैंक कर्मचारी मनोज कुमार पर जानबूझकर संक्रमित रक्त चढ़ाने का आरोप लगाया है। पिता का कहना है कि यह किसी पुरानी रंजिश का नतीजा है।
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पुरानी रंजिश: पिता का दावा है कि पिछले साल नवंबर में इसी कर्मचारी के दुर्व्यवहार के मामले में उन्होंने शिकायत दर्ज कराई थी, जो फिलहाल न्यायालय में विचाराधीन है।
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जानबूझकर किया गया कार्य: पिता का कहना है कि इसी केस का बदला लेने के लिए कर्मचारी ने उनके सात साल के मासूम बच्चे को संक्रमित खून चढ़ा दिया।
हालांकि, आरोपी कर्मचारी मनोज कुमार ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि ब्लड बैंक में हर यूनिट रक्त की पूरी जांच की जाती है और हर यूनिट का रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जाता है, जिससे गड़बड़ी की कोई गुंजाइश नहीं है। उनका दावा है कि उन्हें झूठा फंसाने की कोशिश की जा रही है।
प्रशासन पर दबाव, जांच टीम गठित
इस हृदय विदारक घटना के सामने आने के बाद, बच्चे के माता-पिता ने जांच रिपोर्ट के साथ उपायुक्त से मुलाकात की और दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
स्थानीय प्रतिनिधि, मंझारी जिला परिषद सदस्य माधव चंद्र ने भी मामले की गंभीरता को स्वीकार करते हुए दोषी पर कड़ी कार्रवाई और बच्चे के आजीवन इलाज की पूरी व्यवस्था प्रशासन द्वारा करने की मांग की है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए, स्वास्थ्य विभाग ने घटना की विस्तृत जांच के लिए एक जांच टीम बनाने की घोषणा की है।
इतिहास की परछाईं: यह झारखंड में कोई पहली घटना नहीं है। अतीत में भी रांची और धनबाद समेत राज्य के अन्य हिस्सों में थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों को संक्रमित रक्त चढ़ाने के मामले सामने आ चुके हैं, जिससे यह साफ होता है कि राज्य के ब्लड बैंक सिस्टम में गंभीर और प्रणालीगत खामियां मौजूद हैं, जिन्हें तुरंत दूर करने की आवश्यकता है।
पाठकों से सवाल:
आपकी राय में, यह सिर्फ लापरवाही है, या कर्मचारी द्वारा बदले की भावना में किया गया जानलेवा कृत्य? दोषी कर्मचारी को क्या सजा मिलनी चाहिए? कमेंट करके अपनी प्रतिक्रिया दें।
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