India Climate Crisis: अब रातें भी नहीं दे रहीं गर्मी से राहत, 55% देश हाई हीट रिस्क जोन में, 266 जिले चपेट में
भारत में गर्म रातों का खतरा बढ़ा, आधी रात तक दीवारें तपी रहती हैं, 266 जिले हाई हीट रिस्क जोन में। जानिए क्यों बढ़ रहा है यह संकट और क्या है बचाव का उपाय।
नई दिल्ली: सूरज ढलने के बाद भी गर्मी से राहत न मिलना अब एक नई और डरावनी हकीकत बन चुका है। दिन के समय की झुलसाने वाली धूप का असर अब आधी रात तक बरकरार रहता है। घरों की दीवारें तपी रहती हैं और पंखे व कूलर की हवा भी बेअसर हो रही है। वैज्ञानिक इस स्थिति को 'वार्म नाइट्स' (गर्म रातें) कहते हैं, जहाँ न्यूनतम तापमान सामान्य से 6.4 डिग्री सेल्सियस ऊपर तक पहुँचने लगा है। आज देश का 55 फीसदी हिस्सा हाई हीट रिस्क जोन में आ चुका है, लेकिन इस बढ़ते संकट के बीच इन गर्म रातों के प्रति बरती जा रही लापरवाही गंभीर परिणाम दे रही है।
क्यों बढ़ रही हैं गर्म रातें?
वैश्विक जलवायु परिवर्तन और बेतहाशा शहरीकरण के दोहरे प्रभाव के कारण भारत की रातें लगातार गर्म होती जा रही हैं। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने भी देश के अधिकांश हिस्सों में असामान्य रूप से गर्म रातों का पूर्वानुमान जताया है। बढ़ते शहरीकरण, घटते हरित क्षेत्र और कंक्रीट के जंगलों द्वारा सोखी गई गर्मी के कारण ये रातें अब जानलेवा साबित हो रही हैं। कंक्रीट की इमारतें दिन भर धूप सोखती हैं और रात में धीरे-धीरे उसे वातावरण में छोड़ती हैं, जिससे तापमान गिरने नहीं पाता।
आंकड़े बता रहे हैं भयावह सच्चाई
साइंस डायरेक्ट 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, 1980 से 2020 के बीच गर्म रातों की संख्या में हर दशक 2 से 8 दिनों की वृद्धि हुई है। काउंसिल ऑफ एनर्जी, एनवायरमेंट एंड वाटर के आंकड़ों के मुताबिक 2012 से 2022 के बीच शहरी इलाकों में यह प्रभाव सबसे ज्यादा दिखा। मुंबई में 15, बेंगलुरु में 11 और दिल्ली में 6 अतिरिक्त गर्म रातें दर्ज की गईं। पिछले एक दशक में भारत के शहरों में ऐसी गर्म रातों में 32 फीसदी का उछाल आया है।
2026 अल नीनो वर्ष, 2027 में और बढ़ेगी चुनौती
2026 एक अल नीनो वर्ष है, जिसके कारण इस साल गर्मी अधिक पड़ रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, 2027 की गर्मी और भी अधिक चुनौतीपूर्ण होने की आशंका है। वर्तमान में दुनिया का तापमान सामान्य से 1.44 डिग्री सेल्सियस अधिक रिकॉर्ड किया जा रहा है। अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाला समय पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़ देगा।
266 जिले गंभीर गर्मी की चपेट में
भारत के 266 जिले इस वक्त गंभीर गर्मी की चपेट में हैं। मौजूदा समय में भारत का हीट ऐक्शन प्लान मुख्य रूप से दिन की गर्मी पर केंद्रित है, जबकि रात के बढ़ते तापमान को अनदेखा किया जा रहा है। यही लापरवाही अब जानलेवा साबित हो रही है। गर्म रातों के कारण नींद पूरी नहीं हो पाती, जिससे हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और कार्डियोवैस्कुलर समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है।
क्या है समाधान?
इस समस्या से निपटने के लिए विशेषज्ञों ने कई उपाय सुझाए हैं:
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इमारतों में कूल रूफ तकनीक को अपनाना, जिससे छतें धूप सोखने के बजाय परावर्तित करें।
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शहरी नियोजन के जरिए वेंटिलेशन कॉरिडोर बनाना, ताकि हवा का प्रवाह सही बना रहे।
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सड़कों के लिए रिफ्लेक्टिव मटेरियल का उपयोग करना, जो गर्मी को सोखने के बजाय वापस लौटा दें।
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वृक्षारोपण को बड़े स्तर पर बढ़ाना, क्योंकि पेड़ प्राकृतिक कूलर का काम करते हैं।
कब होगा सरकार का ध्यान?
जब तक भारत अपने हीट ऐक्शन प्लान में रात के बढ़ते तापमान को गंभीरता से शामिल नहीं करता, तब तक गर्मी से होने वाली बीमारियों और मौतों का खतरा बना रहेगा। लोगों को भी अपने स्तर पर प्रयास करने होंगे। घरों की छतों को सफेद रंग से पेंट करना, पेड़ लगाना और ऊर्जा की बचत करना जैसे छोटे-छोटे कदम भी बड़ा बदलाव ला सकते हैं।
भारत में अब रातें भी गर्म हो गई हैं। 266 जिले गर्मी की चपेट में हैं, लेकिन सरकार का हीट ऐक्शन प्लान सिर्फ दिन पर केंद्रित है। क्या हम इस संकट से निपटने के लिए तैयार हैं? यह खबर पढ़कर सावधान हो जाइए और अपने आसपास पेड़ लगाने की पहल करें। इसे ज्यादा से ज्यादा शेयर करें।
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