Parveen Babi: 54 कमरों का महल और सड़ती हुई लाश,जूनागढ़ की राजकुमारी से बॉलीवुड की 'बोल्ड' क्वीन तक,परवीन बाबी की मौत के वो 4 खौफनाक दिन
परवीन बाबी की 72वीं जयंती पर जानिए उस राजकुमारी का सच जिसकी लाश बंद घर में 4 दिनों तक सड़ती रही। 54 कमरों की हवेली, बेबाक ग्लैमर और सिजोफ्रेनिया के बीच उलझी परवीन की दर्दनाक दास्तां की पूरी रिपोर्ट यहाँ देखें।
करीब साढ़े 400 साल पहले पश्तून बाबी वंश मुगल शासक हुमायूं के साथ गुजरात पहुंचा था। इसी शाही खानदान की वारिस परवीन बाबी ने 70 के दशक में बॉलीवुड की 'साड़ी वाली इमेज' को तोड़कर मिनी स्कर्ट और बेबाकी से अपनी पहचान बनाई। आज उनकी 72वीं बर्थ एनिवर्सरी है।
1. 54 कमरों की हवेली और बगावती तेवर
परवीन बाबी का जन्म जूनागढ़ के उस बाबी वंश में हुआ था जो कभी मुगलों के खास सिपहसालार थे। उनका बचपन 54 कमरों की एक विशाल हवेली में बीता, जहाँ उनकी सेवा में 6 नौकर रहते थे। 6 साल की उम्र में पिता को खोने वाली परवीन के तेवर बचपन से ही बागी थे। जब खानदान लड़कियों को बाहर भेजने के खिलाफ था, तब उन्होंने शर्त रखी और अहमदाबाद के सेंट जेवियर कॉलेज से इंग्लिश और साइकोलॉजी में मास्टर डिग्री ली।
2. एक सिगरेट और बदल गई किस्मत
साल 1971 में डायरेक्टर बी.आर. इशारा एक नए चेहरे की तलाश में थे। उन्होंने अहमदाबाद की सड़कों पर एक लंबी, सुंदर लड़की को मिनी स्कर्ट पहने और बेबाकी से सिगरेट पीते देखा। इशारा समझ गए कि यही वह 'बोल्डनेस' है जिसकी बॉलीवुड को जरूरत है। जब उनसे फिल्म के लिए पूछा गया, तो 17 साल की परवीन ने पलटकर कहा- "अगर स्क्रिप्ट पसंद आई तो ही करूंगी।" इसी आत्मविश्वास ने उन्हें रातों-रात स्टार बना दिया और फिल्म 'चरित्र' से उनका सफर शुरू हुआ।
3. 'Time Magazine' और ग्लोबल आइकन की छवि
परवीन बाबी सिर्फ भारत की स्टार नहीं थीं। 1976 में वह पहली भारतीय अभिनेत्री बनीं जिन्हें प्रतिष्ठित 'Time Magazine' के कवर पेज पर जगह मिली। 'दीवार', 'अमर अकबर एंथोनी', 'शान' और 'नमक हलाल' जैसी फिल्मों ने उन्हें 70-80 के दशक की Highest Paid Actress बना दिया। डैनी डेंग्जोंग्पा, कबीर बेदी और महेश भट्ट के साथ उनके 'लिव-इन' रिश्तों ने उस दौर के समाज को हैरान कर दिया था।
4. सिजोफ्रेनिया: जब अपनी ही परछाई से डर लगने लगा
1979 में उनकी मानसिक हालत बिगड़ने लगी। उन्हें 'सिजोफ्रेनिया' नाम की बीमारी हुई, जिसमें मरीज को गहरे वहम होने लगते हैं। उन्होंने अमिताभ बच्चन को 'इंटरनेशनल गैंगस्टर' तक कह दिया और दावा किया कि उनके कान के नीचे चिप लगा दी गई है। वह चलती कार से कूद जाती थीं और उन्हें लगता था कि उनके खाने में जहर है। इसी बीमारी के चलते उन्होंने इंडस्ट्री और अपनों से दूरी बना ली।
5. संजय दत्त केस और धर्म परिवर्तन
साल 2002 में परवीन ने कोर्ट में हलफनामा दिया कि उनके पास 1993 के मुंबई बम धमाकों और संजय दत्त के खिलाफ पुख्ता सबूत हैं, लेकिन वह डर के मारे कभी गवाही देने नहीं आईं। अपने आखिरी सालों में उन्होंने ईसाई धर्म (Christianity) अपना लिया था। उन्होंने अपनी वसीयत में लिखा था कि उनकी संपत्ति का 70% हिस्सा गरीब महिलाओं और बच्चों की मदद के लिए इस्तेमाल किया जाए।
6. एक दर्दनाक और खामोश अंत
22 जनवरी 2005 को जुहू के उनके फ्लैट के बाहर जब दो दिन का दूध और अखबार जमा हो गया, तब पुलिस ने दरवाजा तोड़ा। अंदर परवीन बाबी का शव सड़ रहा था। पैरों में गैंग्रीन की वजह से वह व्हीलचेयर पर थीं।
विडंबना: जिस एक्ट्रेस के पीछे कभी दुनिया भागती थी, उसकी डेड बॉडी क्लेम करने के लिए अस्पताल में कोई रिश्तेदार नहीं आया। अंत में महेश भट्ट ने आकर उनका अंतिम संस्कार करवाया। भले ही वह ईसाई धर्म अपना चुकी थीं, लेकिन कुछ रिश्तेदारों की जिद के कारण उन्हें सांताक्रूज के मुस्लिम कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक किया गया।
परवीन बाबी का जीवन एक सबक है कि सफलता की ऊंचाइयां और अकेलेपन की खाइयां कितनी गहरी हो सकती हैं। आज भी बॉलीवुड उन्हें अपनी सबसे 'बोल्ड और ब्यूटीफुल' आइकन के रूप में याद करता है।
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