Raghav Chadha Exit: 15 साल बाद AAP को कहा अलविदा, 7 सांसदों के साथ BJP में किया शामिल
7 राज्यसभा सांसदों के साथ AAP छोड़ी, राघव चड्ढा ने 15 साल बाद PM मोदी के नेतृत्व में BJP का दामन थामा, कहा- AAP सिद्धांतों से भटकी।
Delhi Shocker: शुक्रवार को राजनीति में एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला। आम आदमी पार्टी (AAP) के चेहरे रहे राघव चड्ढा ने अपने 6 साथियों के साथ पार्टी छोड़ दी। राज्यसभा के 7 सांसदों ने एक साथ AAP को अलविदा कह दिया। राघव चड्ढा, संदीप पाठक, अशोक मित्तल, विक्रम साहनी, स्वाति मालीवाल, हरभजन सिंह और राजिंदर गुप्ता अब भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हो गए हैं।
राघव का दावा- दो-तिहाई सांसद हमारे साथ
राघव चड्ढा ने कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए कहा, “राज्यसभा में AAP के 10 सांसद हैं। उनमें से दो-तिहाई से अधिक (7 सांसद) हमारे साथ हैं। हमने हस्ताक्षरित पत्र राज्यसभा अध्यक्ष को सौंप दिए हैं।” उन्होंने कहा कि संविधान के प्रावधानों का प्रयोग करते हुए वे BJP में विलय करेंगे। यानी 7 सांसदों के जाने के बाद अब AAP राज्यसभा में सिर्फ 3 सांसदों के साथ रह गई है।
15 साल बाद बोले- गलत पार्टी में सही आदमी था
राघव चड्ढा ने कहा, “मैंने AAP को अपने खून-पसीने से सींचा और अपनी जवानी के 15 साल दिए। लेकिन अब AAP अपने सिद्धांतों, मूल्यों और मूल नैतिकता से भटक गई है। पिछले कुछ सालों से मैं महसूस कर रहा था कि मैं गलत पार्टी में सही आदमी हूं।” उन्होंने कहा कि अब पार्टी देश के हित में नहीं, बल्कि निजी फायदे के लिए काम करती है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में की PM मोदी की तारीफ
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राघव और उनके साथियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खुलकर तारीफ की। राघव ने कहा कि उन्हें PM मोदी के नेतृत्व पर पूरा भरोसा है। खबरें हैं कि राघव थोड़ी ही देर में BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात करेंगे। उनके साथ अन्य सांसद भी BJP का दामन थामेंगे।
AAP के लिए यह झटका क्यों बड़ा है?
आम आदमी पार्टी की स्थापना 2012 में अरविंद केजरीवाल और अन्ना हजारे के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन से हुई थी। पार्टी ने 2013 में दिल्ली में सरकार बनाई। 2022 में पंजाब में भी सरकार बनाकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। राज्यसभा में AAP के पास 10 सांसद थे – 7 पंजाब से और 3 दिल्ली से। अब 7 सांसदों के जाने से राज्यसभा में पार्टी बुरी तरह कमजोर हो गई है। यह AAP के इतिहास का सबसे बड़ा राजनीतिक झटका है।
क्या कहता है संविधान?
संविधान की दसवीं अनुसूची (दल-बदल विरोधी कानून) के तहत अगर किसी दल के दो-तिहाई सांसद किसी दूसरे दल में विलय करते हैं, तो उन्हें अयोग्य नहीं ठहराया जाता। राघव चड्ढा ने इसी प्रावधान का हवाला दिया है। अब राज्यसभा अध्यक्ष को यह तय करना है कि क्या यह विलय वैध है या नहीं। लेकिन राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यह मामला कोर्ट तक जा सकता है।
किन-किन सांसदों ने छोड़ी AAP?
बीजेपी में शामिल होने वाले AAP सांसदों की सूची:
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राघव चड्ढा
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संदीप पाठक
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अशोक मित्तल
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विक्रम साहनी
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स्वाति मालीवाल
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हरभजन सिंह
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राजिंदर गुप्ता
यानी AAP के अब राज्यसभा में सिर्फ 3 सांसद बचे हैं – केजरीवाल खुद, सुषमा गुप्ता और नरेंद्र पाल।
खुद को कहा- सही आदमी
राघव चड्ढा ने एक और बड़ा बयान दिया – “मैं गलत पार्टी में सही आदमी था।” यानी उनका कहना था कि उनके विचार BJP से मेल खाते थे, AAP से नहीं। उन्होंने AAP पर निजी स्वार्थ के लिए काम करने का आरोप लगाया। हालांकि उन्होंने कोई ठोस सबूत या उदाहरण प्रेस कॉन्फ्रेंस में नहीं दिया।
अब संसद में AAP की स्थिति क्या होगी?
AAP के पास अब राज्यसभा में तीन सांसद ही बचे हैं। इससे पार्टी की संसद में पैठ कमजोर हो जाएगी। बीजेपी को इस विलय से फायदा होगा, क्योंकि उसके सांसदों की संख्या बढ़ जाएगी। राज्यसभा में बीजेपी पहले ही बहुमत में है। अब उसकी स्थिति और मजबूत होगी। AAP को अब नए सिरे से राज्यसभा में अपनी उपस्थिति बनानी होगी।
अब आगे क्या होगा?
राघव चड्ढा और अन्य सांसदों की सदस्यता पर राज्यसभा अध्यक्ष का फैसला आना बाकी है। यदि विलय को मान्यता मिलती है, तो ये सभी BJP सांसद के रूप में कार्य करेंगे। AAP इसे ‘पैसे की राजनीति’ और ‘चुनावी साजिश’ बता सकती है। लेकिन अब तक AAP की ओर से कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि आने वाले दिनों में और भी बड़े उलटफेर हो सकते हैं।
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