Bareilly Mushaira: बरेली में कवियों ने फूँकी देशभक्ति की जान, गणतंत्र की पूर्व संध्या पर 'हीरो' फौजी कवि का सम्मान, शायरों की महफ़िल ने लूटी वाहवाही
नाथ नगरी बरेली में गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर आयोजित भव्य कवि गोष्ठी और फौजी कवि नित्यानंद बाजपेई के सम्मान की पूरी रिपोर्ट यहाँ मौजूद है। शुभम संस्था के इस कार्यक्रम में शायरों की गजलों और देशभक्ति कविताओं के उस जादुई माहौल को विस्तार से पढ़िए वरना आप साहित्य जगत के इस सबसे ऊर्जावान संगम को जानने से चूक जाएंगे।
बरेली (नाथ नगरी), 26 जनवरी 2026 – सात समंदर पार तक अपनी खुशबू बिखेरने वाली बरेली की मिट्टी आज एक बार फिर साहित्य और राष्ट्रवाद के अनूठे संगम की गवाह बनी। 'शुभम साहित्यिक एवं सामाजिक संस्था' के तत्वावधान में गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर एक भव्य कवि गोष्ठी और सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। प्रभात नगर स्थित कहानीकार निरुपमा अग्रवाल के निवास पर सजी इस महफ़िल में जब कलमकारों ने अपनी रचनाएं पढ़ीं, तो श्रोताओं की रगों में देशभक्ति का संचार हो गया। मशहूर शायर विनय साग़र जायसवाल की अध्यक्षता में आयोजित इस शाम ने यह साबित कर दिया कि शब्द जब शस्त्र बनते हैं, तो राष्ट्र की चेतना जाग उठती है।
फौजी कवि का सम्मान: सरहद और कलम का मिलन
इस गौरवमयी शाम के केंद्र में रहे हरदोई (बरखनी) से आए फौजी कवि नित्यानंद बाजपेई उपमन्यु।
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विशिष्ट सम्मान: गणतंत्र दिवस के पावन अवसर को देखते हुए संस्था की अध्यक्षा कवयित्री सत्यवती सिंह सत्या ने फौजी कवि नित्यानंद जी को विशेष रूप से सम्मानित किया। यह सम्मान एक सैनिक की वीरता और एक कवि की संवेदनशीलता के प्रति समाज का आभार था।
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शायराना तोहफा: इस अवसर पर अध्यक्ष विनय साग़र जायसवाल ने अपना प्रसिद्ध ग़ज़ल संग्रह 'पयामे-ज़ीस्त' स्मृति स्वरूप नित्यानंद जी को सप्रेम भेंट किया।
देशभक्ति की रचनाओं से गूँजा सभागार
वरिष्ठ शायर सरवत परवेज़ की विशिष्ट उपस्थिति और कवि रामकुमार कोली के कुशल संचालन ने कार्यक्रम में चार चाँद लगा दिए। गोष्ठी में उपस्थित हर रचनाकार ने अपनी ओजपूर्ण पंक्तियों से माहौल को राष्ट्रभक्ति के रंग में रंग दिया।
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प्रमुख स्वर: दीपक मुखर्जी, अवजीत सिंह, और निरुपमा अग्रवाल की रचनाओं ने समाज की विसंगतियों और प्रेम पर चोट की।
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महिला शक्ति: सुचित्रा डे और सत्यवती सिंह सत्या ने अपनी कविताओं के माध्यम से मानवीय संवेदनाओं को छुआ।
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गजल और व्यंग्य: हरिकांत मिश्रा 'चातक', राजकुमार अग्रवाल और सरवत परवेज़ ने अपनी नफासत भरी गजलों से वाहवाही लूटी।
शुभम संस्था कवि सम्मेलन: मुख्य झलकियाँ (Event Snapshot)
| भूमिका | नाम (Name) | विशेष योगदान |
| अध्यक्ष | विनय साग़र जायसवाल | मशहूर शायर एवं गजलकार |
| मुख्यातिथि | नित्यानंद बाजपेई 'उपमन्यु' | फौजी कवि (हरदोई) |
| आयोजक | सत्यवती सिंह 'सत्या' | अध्यक्षा, शुभम संस्था |
| संचालन | रामकुमार कोली | ओजस्वी कवि |
| विशिष्ट अतिथि | सरवत परवेज़ | वरिष्ठ शायर |
इतिहास का पन्ना: बरेली की 'साहित्यिक विरासत' और नाथ नगरी का गौरव
बरेली, जिसे भगवान शिव के आठ मंदिरों के कारण 'नाथ नगरी' कहा जाता है, सदियों से साहित्य का केंद्र रही है। इतिहास गवाह है कि अमीर खुसरो से लेकर फिराक गोरखपुरी और वसीम बरेलवी तक, इस शहर ने उर्दू और हिंदी साहित्य को नए आयाम दिए हैं। 19वीं शताब्दी के दौरान बरेली कॉलेज और यहाँ की पत्रिकाओं ने स्वतंत्रता संग्राम में कविताओं को 'हथियार' के रूप में इस्तेमाल किया था। शुभम संस्था द्वारा आयोजित यह गोष्ठी उसी ऐतिहासिक परंपरा का हिस्सा है, जहाँ साहित्य केवल मनोरंजन नहीं बल्कि राष्ट्र निर्माण का एक माध्यम है। आज भी बरेली की महफिलों में उसी 'गंगा-जमुनी तहजीब' की झलक मिलती है, जो भारत के गणतंत्र की असली आत्मा है।
हास्य और व्यंग्य का पुट
संस्था के उपाध्यक्ष और प्रख्यात हास्य व्यंग्य कवि दीपक मुखर्जी ने अपनी चुटीली रचनाओं से श्रोताओं को गुदगुदाया भी और सोचने पर मजबूर भी किया। उन्होंने बताया कि गणतंत्र केवल तारीख नहीं, बल्कि हम सब की सामूहिक जिम्मेदारी है। कार्यक्रम के अंत में सभी ने देश की अखंडता के लिए अपनी कलम को समर्पित करने का संकल्प लिया।
शब्दों से लिखी गई राष्ट्र वंदना
प्रभात नगर की यह शाम बरेली के साहित्यिक इतिहास में एक और सुनहरा अध्याय जोड़ गई। जब तक कलम के सिपाही और सरहद के प्रहरी एक मंच पर आते रहेंगे, देश का गणतंत्र और अधिक मजबूत होता रहेगा।
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