Jamshedpur Protest: एसबीआई से अचानक हटाए गए सुरक्षाकर्मियों का डीसी दफ्तर पर महा-धरना, झामुमो-कांग्रेस की एंट्री से बैंक प्रबंधन बैकफुट पर!

जमशेदपुर डीसी कार्यालय के समक्ष एसबीआई द्वारा हटाए गए सुरक्षाकर्मियों के जोरदार धरना-प्रदर्शन और तेज आंधी-बारिश के बीच झामुमो-कांग्रेस नेताओं की मौजूदगी में बैंक प्रबंधन के खिलाफ छिड़े इस महा-आंदोलन की पूरी लाइव ग्राउंड रिपोर्ट यहाँ देखें।

May 29, 2026 - 18:16
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Jamshedpur Protest: एसबीआई से अचानक हटाए गए सुरक्षाकर्मियों का डीसी दफ्तर पर महा-धरना, झामुमो-कांग्रेस की एंट्री से बैंक प्रबंधन बैकफुट पर!
Jamshedpur Protest: एसबीआई से अचानक हटाए गए सुरक्षाकर्मियों का डीसी दफ्तर पर महा-धरना, झामुमो-कांग्रेस की एंट्री से बैंक प्रबंधन बैकफुट पर!

जमशेदपुर, 29 मई 2026 – लौहनगरी जमशेदपुर के साकची स्थित पूर्वी सिंहभूम जिला उपायुक्त (DC) कार्यालय गलियारे से आज बैंकिंग सेक्टर और श्रम अधिकारों के विधिक हनन से जुड़ी एक बेहद संवेदनशील, विचलित करने वाली और हाई-वोल्टेज राजनीतिक-सामाजिक जनक्रांति (Security Guards Termination Protest) सामने आई है। भारतीय स्टेट बैंक (SBI) प्रबंधन द्वारा बिना किसी पूर्व विधिक नोटिस या लिखित सूचना के दर्जनों सुरक्षा कर्मचारियों को अचानक नौकरी से सेवामुक्त (Terminated) किए जाने के तानाशाही फैसले के खिलाफ पीड़ित जवानों का गुस्सा फूट पड़ा। अपनी रोजी-रोटी और रोजगार बहाली की मांग को लेकर इन सुरक्षाकर्मियों ने आज कलेक्ट्रेट परिसर के समक्ष एक दिवसीय विशाल महा-धरना दिया और डीसी को एक कड़ा विधिक ज्ञापन सौंपकर न्यायसंगत हस्तक्षेप की गुहार लगाई। इस आंदोलन की गंभीरता को देखते हुए झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) और कांग्रेस के दिग्गज नेताओं ने ऑन-फील्ड उतरकर इसे अपना पूर्ण नैतिक और विधिक समर्थन दे दिया है, जिससे अब यह मामला पूरे कोल्हान अंचल में एक बड़े विधिक और राजनीतिक संग्राम में तब्दील हो गया है।

महा-आंदोलन की लाइव इनसाइड स्टोरी: अंधी-बारिश का डार्क मिजाज, भीगते जवान और बबन राय का लंच बॉक्स

पूर्वी सिंहभूम जिला प्रशासन, गम्हरिया-साकची खुफिया विंग और झामुमो श्रम मोर्चा के आंतरिक विधिक सूत्रों से मिली लाइव ऑन-फील्ड इनपुट के अनुसार, यह धरना केवल एक प्रदर्शन नहीं बल्कि व्यवस्था के खिलाफ आत्मसम्मान की एक बड़ी विधिक जंग बन गया।

  • मौसम का डार्क अटैक: दोपहर को जब धरना अपने चरम पर था, तो अचानक मौसम ने करवट ली और पूरे जमशेदपुर अंचल में तेज आंधी के साथ मूसलाधार बारिश (अंधड़-पानी) शुरू हो गई। पंडाल हिलने लगे, लेकिन अपने बच्चों के भविष्य की लड़ाई लड़ रहे सुरक्षाकर्मी भीगते हुए भी जमीन पर डटे रहे और बैंक प्रबंधन के खिलाफ विधिक नारेबाजी करते रहे।

  • महागठबंधन के दिग्गजों की एंट्री: जवानों का हौसला बढ़ाने के लिए जुगसलाई के कद्दावर विधायक मंगल कालिंदी, पोटका के विधायक संजीव सरदार, पूर्व विधायक कुणाल सारंगी, पूर्व सांसद सुमन महतो और झामुमो जिला अध्यक्ष विक्टर सोरेन सहित कई वरिष्ठ नेता धरना स्थल पर चटाई पर बैठ गए।

  • आंदोलनकारियों के लिए भोजन व्यवस्था: दूर-दराज के ग्रामीण अंचलों से आए पीड़ित कर्मचारियों की संवेदनशीलता को देखते हुए झामुमो के वरिष्ठ नेता बबन राय ने एक मिसाल कायम की। उनके विधिक और मानवीय नेतृत्व में धरना स्थल पर ही सभी आंदोलनकारियों और उनके परिवारों के लिए पुख्ता भोजन (लंच) की व्यवस्था कराई गई।

आउटसोर्सिंग सुरक्षा नियमों का विधिक ऑडिट और जिला प्रशासन की त्रिपक्षीय मध्यस्थता समय की मांग

पूर्वी सिंहभूम जिला उपायुक्त (DC) ने जिस संवेदनशीलता से सुरक्षाकर्मियों के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात कर उनके विधिक ज्ञापन को स्वीकार किया, वह इस गतिरोध को सुलझाने की दिशा में एक बहुत बड़ा ऑन-फील्ड माइलस्टोन है। कांग्रेस के जिला अध्यक्ष परविंदर सिंह, प्रदेश महासचिव धर्मेंद्र सोनकर और झामुमो के युवा नेताओं ने साफ कर दिया है कि यदि बैंक प्रबंधन ने अपनी विधिक हठधर्मिता नहीं छोड़ी और इन सुरक्षाकर्मियों की त्वरित सवेतन बहाली नहीं की, तो आने वाले दिनों में भारतीय स्टेट बैंक के क्षेत्रीय मुख्यालय (झोनल ऑफिस) की तालाबंदी कर उग्र विधिक चक्का जाम आंदोलन किया जाएगा। लेकिन केवल धरने देना इस गहरे डार्क ठेकेदारी प्रथा का स्थायी समाधान नहीं है। 2026 के इस आधुनिक और कॉर्पोरेट युग में झारखंड श्रम मंत्रालय और जिला प्रशासन को तुरंत संयुक्त संज्ञान लेते हुए एक 'विशेष त्रिपक्षीय विधिक कमेटी' (बैंक प्रबंधन, सुरक्षा एजेंसी और लेबर कमिश्नर) का गठन करना होगा। जब तक बैंकों में काम करने वाले सुरक्षाकर्मियों के लिए 'न्यूनतम रोजगार सुरक्षा अवधि' और 'अनिवार्य विधिक नोटिस पीरियड' की नियमावली को कड़ाई से लागू नहीं किया जाता, तब तक जमशेदपुर के इस ऐतिहासिक, व्यस्त और जागरूक श्रमिक अंचल को रोजगार छिनने के इस डार्क और पीड़ादायक इतिहास से पूरी तरह मुक्त नहीं कराया जा सकेगा।

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Manish Tamsoy मनीष तामसोय कॉमर्स में मास्टर डिग्री कर रहे हैं और खेलों के प्रति गहरी रुचि रखते हैं। क्रिकेट, फुटबॉल और शतरंज जैसे खेलों में उनकी गहरी समझ और विश्लेषणात्मक क्षमता उन्हें एक कुशल खेल विश्लेषक बनाती है। इसके अलावा, मनीष वीडियो एडिटिंग में भी एक्सपर्ट हैं। उनका क्रिएटिव अप्रोच और टेक्निकल नॉलेज उन्हें खेल विश्लेषण से जुड़े वीडियो कंटेंट को आकर्षक और प्रभावी बनाने में मदद करता है। खेलों की दुनिया में हो रहे नए बदलावों और रोमांचक मुकाबलों पर उनकी गहरी पकड़ उन्हें एक बेहतरीन कंटेंट क्रिएटर और पत्रकार के रूप में स्थापित करती है।