Global Recognition : छत्तीसगढ़ की महक अब नेपाल तक, डॉ. राम रतन श्रीवास को मिला अंतरराष्ट्रीय सम्मान, भारत-नेपाल रिश्तों को मिलेगी नई धार
बिलासपुर के साहित्यकार डॉ. राम रतन श्रीवास 'राधे राधे' को पशुपतिनाथ भारत-नेपाल अंतर्राष्ट्रीय साहित्य महोत्सव का ब्रांड एम्बेसडर मनोनीत किया गया है। लंदन और गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में नाम दर्ज कराने वाले डॉ. श्रीवास की इस नई उपलब्धि की पूरी रिपोर्ट यहाँ देखें।
बिलासपुर/गिरिडीह, 27 मार्च 2026 – 'मानव जब किसी कार्य के प्रति सजग और समर्पित हो जाता है, तो सफलता उसके कदम चूमती है।' इन पंक्तियों को चरितार्थ किया है छत्तीसगढ़ के बिलासपुर निवासी और भारतीय रेलवे में कार्यरत डॉ. राम रतन श्रीवास 'राधे राधे' ने। अपनी लेखनी और सेवा भाव से देश का मान बढ़ाने वाले डॉ. श्रीवास को अब एक बड़ी अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी सौंपी गई है। पार्श्व अंतर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालय चैरिटेबल ट्रस्ट (PIUCT), गिरिडीह (झारखंड) ने उन्हें वर्ष 2026 और 2027 के लिए "पशुपतिनाथ भारत-नेपाल अंतर्राष्ट्रीय साहित्य महोत्सव का ब्रांड एम्बेसडर" मनोनीत किया है। यह नियुक्ति न केवल साहित्य जगत के लिए गर्व की बात है, बल्कि इससे भारत और नेपाल के मैत्रीपूर्ण संबंधों को सांस्कृतिक और शैक्षिक स्तर पर एक नई ऊंचाई मिलने की उम्मीद है।
ट्रस्ट का फैसला: प्रतिभा और समर्पण को मिला सम्मान
पार्श्व अंतर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालय चैरिटेबल ट्रस्ट के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. सुरेश सिंह शौर्य 'प्रियदर्शी' (रक्षा मंत्रालय में प्रशासनिक सेवा में कार्यरत) ने इस नियुक्ति की आधिकारिक पुष्टि की है।
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सर्वसम्मति से निर्णय: ट्रस्ट के संस्थापक दिनेश्वर वर्मा और अन्य पदाधिकारियों ने पत्रांक संख्या PIUCT/2026/01 के माध्यम से डॉ. श्रीवास के नाम पर मुहर लगाई।
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बहुआयामी योगदान: उन्हें यह सम्मान केवल साहित्य के लिए ही नहीं, बल्कि शिक्षा, पर्यावरण और जल संरक्षण के क्षेत्र में उनके अभूतपूर्व कार्यों के लिए दिया गया है।
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अवैतनिक सेवा: डॉ. श्रीवास इस दायित्व का निर्वहन पूर्ण रूप से अवैतनिक रूप से करेंगे, जो उनके सेवा के प्रति अटूट विश्वास को दर्शाता है।
वर्ल्ड रिकॉर्ड से पशुपतिनाथ तक: उपलब्धियों का सफर
डॉ. राम रतन श्रीवास का साहित्यिक सफर उपलब्धियों की सुनहरी दास्तां है। उनके नाम कई विश्व कीर्तिमान दर्ज हैं:
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विश्व रिकॉर्ड: उनका नाम 'कृष्णायन' के लिए लंदन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड और 'छंद बद्ध वृहद व्याकरण' व 'चंद्रयान-3' पर लेखन के लिए गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज है।
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प्रमुख पद: वे श्रीराम अंतर्राष्ट्रीय साहित्य महोत्सव (अयोध्या), भारतोदय लेखक संघ (नई दिल्ली) और महात्मा बुद्ध अंतर्राष्ट्रीय साहित्य महोत्सव (बोधगया) सहित दर्जनों संस्थाओं में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के रूप में सक्रिय हैं।
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सम्मानों की झड़ी: उन्हें अब तक छत्तीसगढ़ रत्न, कबीर कोहिनूर सम्मान और कालिदास सम्मान जैसे सैकड़ों प्रतिष्ठित पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है।
भारत-नेपाल संबंधों का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक आधार
भारत और नेपाल के बीच का संबंध केवल भौगोलिक नहीं, बल्कि 'रोटी-बेटी' और 'साहित्य-संस्कृति' का है।
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साझा विरासत: काठमांडू का पशुपतिनाथ मंदिर और भारत के ज्योतिर्लिंगों के बीच सदियों पुराना आध्यात्मिक संबंध है। साहित्य के माध्यम से इस कड़ी को जोड़ना एक दूरदर्शी कदम है।
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सांस्कृतिक कूटनीति: इतिहास गवाह है कि जब-जब दो देशों के बीच सांस्कृतिक और साहित्यिक आदान-प्रदान बढ़ा है, तब-तब कूटनीतिक संबंध भी प्रगाढ़ हुए हैं। डॉ. श्रीवास की नियुक्ति इसी 'सॉफ्ट पावर' को मजबूती प्रदान करेगी।
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पर्यावरण संरक्षण की साझा चिंता: नेपाल के हिमालयी क्षेत्र और भारत के मैदानी इलाकों के बीच जल और वायु का गहरा संबंध है। डॉ. श्रीवास द्वारा जल संरक्षण के क्षेत्र में किया जा रहा कार्य दोनों देशों के लिए प्रेरणादायक है।
अगला कदम: काठमांडू में सजेगा साहित्य का महाकुंभ
ब्रांड एम्बेसडर बनने के बाद डॉ. राम रतन श्रीवास ने अपनी भविष्य की योजनाओं को साझा किया है।
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मिशन 2026-27: उनका मुख्य लक्ष्य भारत-नेपाल के बीच आपसी सामंजस्य स्थापित करना और शिक्षा व सांस्कृतिक परंपरा को समृद्ध करना है।
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युवाओं को मौका: महोत्सव के माध्यम से वे नए लेखकों और कवियों को एक अंतरराष्ट्रीय मंच प्रदान करेंगे ताकि भारतीय और नेपाली साहित्य वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना सके।
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जागरूकता अभियान: साहित्य के साथ-साथ वे खेल जगत, विज्ञान और जल संरक्षण के प्रति जनमानस को प्रेरित करने के लिए विशेष सत्र आयोजित करेंगे।
डॉ. राम रतन श्रीवास 'राधे राधे' को यह अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी मिलना छत्तीसगढ़ और झारखंड सहित पूरे देश के लिए गौरव का विषय है। एक रेलकर्मी से विश्व रिकॉर्ड धारक साहित्यकार और अब भारत-नेपाल के सांस्कृतिक सेतु बनने तक का उनका सफर हर मेहनती इंसान के लिए प्रेरणा है। पशुपतिनाथ महोत्सव के माध्यम से जिस शांति और सुसभ्यता का संदेश वे फैलाना चाहते हैं, वह आज के समय की मांग है। क्या यह महोत्सव भारत-नेपाल के रिश्तों में एक नया स्वर्णिम अध्याय जोड़ेगा? फिलहाल, डॉ. श्रीवास के नेतृत्व में काठमांडू में सजने वाले इस साहित्य महाकुंभ का इंतजार पूरी दुनिया के साहित्यकारों को है।
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