Ranchi Gun Network: मांडर के घर में मिला हथियारों का जखीरा, बिहार से जुड़े हैं तस्करी के तार और मची खलबली
रांची पुलिस ने अवैध हथियारों के बड़े नेटवर्क का किया भंडाफोड़ और मांडर से बिहार तक जुड़े हैं तस्करी के तार। कहीं आपके पड़ोस में तो नहीं चल रहा मौत का यह सामान, अभी देखें पूरी रिपोर्ट।
रांची: राजधानी की सुरक्षा में सेंध लगाने वाले एक खतरनाक सिंडिकेट का रांची पुलिस ने पर्दाफाश किया है। मैक्लुस्कीगंज से शुरू हुई एक साधारण वाहन चेकिंग ने पुलिस को मांडर के उस घर तक पहुँचा दिया, जो अवैध हथियारों का अघोषित 'गोदाम' बन चुका था। इस खुलासे के बाद ग्रामीण इलाकों में दहशत और चर्चा का माहौल है।
स्कॉर्पियो की तलाशी और ताश के पत्तों की तरह ढहा नेटवर्क
13 अप्रैल की काली रात रांची पुलिस के लिए टर्निंग पॉइंट साबित हुई। रुरल एसपी प्रवीण पुष्कर के नेतृत्व में मैक्लुस्कीगंज थाना क्षेत्र में सघन वाहन चेकिंग चल रही थी। तभी एक सफेद स्कॉर्पियो को रुकने का इशारा किया गया। पुलिस को देख गाड़ी में सवार युवकों के चेहरे का रंग उड़ गया। तलाशी ली गई तो उनके पास से लोडेड पिस्टल और जिंदा कारतूस बरामद हुए।
जब पुलिस ने सख्ती से पूछताछ की, तो उन्होंने एक ऐसा नाम उगला जिसने पूरे सिस्टम को हिला दिया—विशाल सिंह। पुलिस ने बिना वक्त गंवाए करगे गांव स्थित विशाल के घर पर छापेमारी की और उसे दबोच लिया।
घर बना था 'हथियार घर': पड़ोसियों को कानों-कान खबर नहीं
विशाल सिंह की गिरफ्तारी के बाद जो सच्चाई सामने आई, वह चौंकाने वाली थी। विशाल अपने घर को ही हथियारों को छिपाने और सप्लाई करने के लिए इस्तेमाल कर रहा था। गांव के बीचो-बीच रहने के कारण किसी को उस पर शक नहीं होता था। वह बिहार से आने वाले अवैध हथियारों का स्टॉक अपने पास सुरक्षित रखता था और फिर शहर के अपराधियों को उनकी डिमांड के अनुसार सप्लाई करता था।
बिहार कनेक्शन: अभिषेक और करण का 'जंगल राज'
विशाल से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस को इस खेल के असली खिलाड़ी अभिषेक शर्मा और करण गोप का पता चला। अभिषेक शर्मा इस गिरोह का 'सप्लायर' था, जो बिहार के अवैध हथियार मंडियों से माल लाकर रांची में खपाता था।
छापेमारी का रोमांच:
पुलिस को सूचना मिली कि ये दोनों मांडर के हातमा जंगल में किसी बड़े सौदे की फिराक में हैं। पुलिस की टीम ने जंगल को चारों तरफ से घेर लिया। खुद को घिरा देख दोनों ने भागने की कोशिश की, लेकिन मुस्तैद जवानों ने उन्हें दबोच लिया। तलाशी में उनके पास से घातक हथियार बरामद हुए।
पुलिस की बड़ी बरामदगी और बढ़ता सिंडिकेट
इस पूरे ऑपरेशन के दौरान रांची पुलिस ने अपराध की दुनिया की कमर तोड़ दी है। बरामद सामानों की सूची इस प्रकार है:
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03 देशी पिस्टल (अत्याधुनिक)
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10 जिंदा गोली
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04 खाली मैगजीन
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02 स्मार्ट फोन (जिनमें तस्करी के राज दबे हैं)
शुरुआत में यह गिरोह सिर्फ छोटे अपराधियों को हथियार बेचता था, लेकिन पुलिस की मानें तो धीरे-धीरे इनका नेटवर्क रांची के आसपास के कई जिलों तक फैल गया था।
झारखंड में हथियारों की तस्करी का पुराना खेल
झारखंड और बिहार की सीमाओं पर अवैध हथियारों का व्यापार दशकों पुराना है।
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मुंगेर कनेक्शन: ऐतिहासिक रूप से बिहार का मुंगेर इलाका अवैध हथियारों के निर्माण के लिए जाना जाता रहा है। वहां से झारखंड के रास्ते बंगाल और ओडिशा तक हथियारों की सप्लाई का एक पुराना रूट रहा है।
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बदलता स्वरूप: पहले यह व्यापार छिपकर होता था, लेकिन अब 'स्कॉर्पियो' और 'लग्जरी गाड़ियों' का इस्तेमाल कर अपराधी इसे एक संगठित बिजनेस की तरह चला रहे हैं।
अब किसकी बारी? पुलिस के रडार पर कई और नाम
अभिषेक और विशाल से पूछताछ में रांची के कई सफेदपोशों और उभरते गैंगस्टर्स के नाम सामने आए हैं। पुलिस अब उन लोगों की तलाश कर रही है जिन्होंने हाल के दिनों में इस गिरोह से हथियार खरीदे हैं। रुरल एसपी ने स्पष्ट कर दिया है कि यह तो सिर्फ शुरुआत है, अभी कई और गिरफ्तारियां होनी बाकी हैं।
सतर्कता संदेश: अवैध हथियारों का कारोबार केवल अपराध नहीं, बल्कि पूरे समाज की शांति के लिए खतरा है। अगर आपको अपने आसपास किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी मिलती है, तो तुरंत पुलिस को सूचित करें।
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