Seraikela Arrest : जेल में बंद रवि लोहार के नाम पर रंगदारी मांगने वाला बंटी गुहा मानगो बस स्टैंड से गिरफ्तार, बैंक मैनेजर समेत कई बिजनेसमैन थे निशाने पर
सरायकेला की कांड्रा थाना पुलिस ने जेल में बंद कुख्यात अपराधी रवि लोहार के नाम पर झारखंड ग्रामीण बैंक के मैनेजर और चांडिल के व्यवसायियों से रंगदारी मांगने वाले शातिर आरोपी बंटी गुहा को जमशेदपुर के मानगो बस स्टैंड से गिरफ्तार कर लिया है। पूरी लाइव पुलिसिया तफ्तीश यहाँ देखें।
सरायकेला/जमशेदपुर, 25 मई 2026 – सरायकेला-खरसावां जिला पुलिस और कांड्रा थाना की विशेष खुफिया टीम को मोबाइल फोन के जरिए आतंक का साम्राज्य खड़ा करने वाले एक बेहद हाई-टेक और शातिर अपराधी को दबोचने में अभूतपूर्व सफलता हाथ लगी है। पुलिस ने तकनीकी सर्विलांस और सटीक मानवीय सूचनाओं के आधार पर जाल बिछाकर रविवार की सुबह जमशेदपुर के सबसे व्यस्त 'मानगो बस स्टैंड' के पास से रंगदारी सिंडिकेट के मुख्य सरगना बंटी गुहा (38 वर्ष) को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार आरोपी मूल रूप से पूर्वी सिंहभूम (जमशेदपुर) जिले के परसुडीह थाना क्षेत्र अंतर्गत गोलपहाड़ी का निवासी है, जो अपनी पहचान छुपाने के लिए वर्तमान में पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के भवानीपुर में रहकर 'यूएसएस' (USS) नामक एक निजी सिक्योरिटी/सर्विस कंपनी में काम कर रहा था। पुलिस ने बंटी गुहा के पास से वह सीक्रेट मोबाइल फोन और सिम कार्ड भी बरामद कर लिया है, जिसके जरिए उसने पूरे सरायकेला, कांड्रा और गम्हरिया औद्योगिक अंचल के संभ्रांत लोगों की नींद उड़ा रखी थी।
वारदात की दास्तां: 22 मई की वो थ्रेट कॉल, सरायकेला जेल का 'फर्जी' खौफ और वकील की फीस का सच
सरायकेला पुलिस मुख्यालय और कांड्रा थाना के आधिकारिक सूत्रों से मिली लाइव ऑन-फील्ड इनपुट के अनुसार, इस पूरे हाई-प्रोफाइल एक्सटॉर्शन रैकेट का खुलासा महज 48 घंटे के भीतर हुआ है।
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बैंक मैनेजर को आया इंटरनेशनल स्टाइल कॉल: बीती 22 मई को 'झारखंड ग्रामीण बैंक' की कांड्रा शाखा के मैनेजर के पर्सनल मोबाइल पर एक अज्ञात नंबर से घंटी बजी। फोन उठाने पर दूसरी तरफ से भारी आवाज में बोलने वाले शख्स ने खुद को सरायकेला जेल की सलाखों के पीछे बंद कुख्यात गैंगस्टर “रवि लोहार” बताया।
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जमानत के नाम पर 50 हजार का लेवी: फोन करने वाले बंटी गुहा ने रवि लोहार का मुखौटा पहनकर मैनेजर को धमकाते हुए कहा कि उसे अपनी जमानत के लिए वकील की फीस भरनी है, इसलिए तुरंत 50 हजार रुपये की रंगदारी (लेवी) का इंतजाम करो। पैसे न देने पर बैंक और मैनेजर को गंभीर परिणाम भुगतने (जान से मारने) की सीधी धमकी दी गई।
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स्पेशल टीम की आधी रात को नाकेबंदी: डरे-सहमे बैंक मैनेजर ने 24 मई को कांड्रा थाने में आधिकारिक प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सरायकेला एसपी के निर्देश पर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (SDPO) के नेतृत्व में एक विशेष छापेमारी दल का गठन किया गया। पुलिस ने जब मोबाइल लोकेशन को ट्रैक किया, तो पता चला कि आरोपी कोलकाता से भागकर जमशेदपुर के मानगो बस स्टैंड पर किसी बड़ी डील के लिए खड़ा है, जिसके बाद घेराबंदी कर उसे दबोच लिया गया।
क्रिमिनल रिकॉर्ड्स: चांडिल से गम्हरिया तक फैला था जाल, कई बड़े व्यवसायी भी आ चुके थे जाल में
कांड्रा पुलिस की शुरुआती पूछताछ में बंटी गुहा ने कबूल किया है कि वह कोलकाता की नौकरी की आड़ में कोल्हान के पैसे वाले लोगों की लिस्ट तैयार करता था और फिर जेल के बड़े अपराधियों का नाम लेकर डराता था।
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चांडिल के शिशिर चटर्जी को धमकी: बंटी ने बीते 21 मई को चांडिल थाना क्षेत्र के रूचाप निवासी प्रतिष्ठित नागरिक शिशिर कुमार चटर्जी को भी इसी नंबर से फोन किया था और मोटी रकम न देने पर अंजाम भुगतने को कहा था।
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छोटा गम्हरिया के अभिषेक भी थे निशाने पर: इससे पहले 15 मई को गम्हरिया थाना क्षेत्र के छोटा गम्हरिया निवासी अभिषेक सिंहदेव से भी इसी मोबाइल सिंडिकेट के जरिए लाखों की रंगदारी मांगी गई थी। पुलिस अब आरोपी के बैंक खातों की कड़ियों (Bank Trail) को खंगाल रही है ताकि यह पता चल सके कि उसने अब तक कितने लोगों से ऑनलाइन पैसे वसूले हैं।
बैंक अधिकारियों की सुरक्षा, डिजिटल सर्विलांस और फेक सिम सिंडिकेट पर नकेल समय की मांग
सरायकेला जिला पुलिस और कांड्रा थाना प्रभारी ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बंटी गुहा को गिरफ्तार कर कोल्हान के व्यापारियों और बैंक मैनेजरों को एक बड़ी राहत तो दी है, लेकिन एक साधारण प्राइवेट कंपनी के कर्मचारी का इस तरह सरेआम बैंकों और उद्योगपतियों को धमकाना हमारी आंतरिक सुरक्षा पर एक बड़ा सवालिया निशान है। केवल एक मोहरे को पकड़ना काफी नहीं है। जिला प्रशासन को तुरंत उन सभी मोबाइल सिम डीलरों पर नकेल कसनी होगी जो बिना प्रॉपर वेरिफिकेशन के ऐसे फर्जी सिम कार्ड अपराधियों को बेचते हैं। इसके साथ ही, कांड्रा और गम्हरिया के औद्योगिक क्षेत्रों में 'एंटी-एक्सटॉर्शन सेल' (Anti-Extortion Cell) को चौबीसों घंटे सक्रिय रखना होगा ताकि भविष्य में कोई भी बाहरी या स्थानीय अपराधी हमारे आर्थिक विकास की रीढ़ माने जाने वाले बैंक अधिकारियों और व्यवसायियों को डरा न सके।
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