Sasaram Inferno : प्लेटफॉर्म पर खड़ी इंटरसिटी एक्सप्रेस की बोगी बनी आग का गोला, सामान छोड़कर जान बचाकर भागे सहमे यात्री, रेलवे की बड़ी लापरवाही उजागर

सासाराम रेलवे स्टेशन पर सोमवार सुबह भभुआ-पटना इंटरसिटी एक्सप्रेस की जनरल बोगी में अचानक भीषण आग लग गई। यात्रियों में मची भगदड़, छूटा सामान और रेलवे प्रबंधन की खोखली सुरक्षा व्यवस्था की पूरी इनसाइड ग्राउंड रिपोर्ट यहाँ देखें।

May 18, 2026 - 17:26
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Sasaram Inferno :  प्लेटफॉर्म पर खड़ी इंटरसिटी एक्सप्रेस की बोगी बनी आग का गोला, सामान छोड़कर जान बचाकर भागे सहमे यात्री, रेलवे की बड़ी लापरवाही उजागर

सासाराम, 18 मई 2026 – बिहार के रोहतास जिला मुख्यालय सासाराम रेलवे स्टेशन से सोमवार की सुबह-सुबह एक ऐसी खौफनाक और दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसने भारतीय रेल की सुरक्षा दावों की पोल खोलकर रख दी है। सासाराम रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर खड़ी 'भभुआ-सासाराम-पटना इंटरसिटी एक्सप्रेस' (Train No: 13244/43) की एक जनरल बोगी अचानक धू-धू कर जल उठी। सुबह के शांत माहौल में जैसे ही बोगी से आग की ऊंची लपटें और काला धुआं उठना शुरू हुआ, पूरे स्टेशन परिसर में चीख-पुकार और अफरा-तफरी मच गई। जान बचाने की होड़ में ट्रेन के भीतर और प्लेटफॉर्म पर मौजूद सैकड़ों यात्रियों के बीच भगदड़ की स्थिति पैदा हो गई।

वारदात की दास्तां: सुबह 6 बजे का वो खौफ, जलती बोगी और खाली पड़े फायर सिलेंडर

यह पूरी डरावनी घटना सोमवार सुबह करीब 6:00 बजे घटित हुई, जब ट्रेन पटना रवाना होने के लिए प्लेटफॉर्म पर मुस्तैद थी।

  • अचानक उठा धुएं का गुबार: चश्मदीद यात्रियों के अनुसार, ट्रेन प्लेटफॉर्म पर खड़ी थी और यात्री अपनी सीटों पर बैठ रहे थे। इसी दौरान बोगी के निचले हिस्से से अचानक गाढ़ा काला धुआं निकलने लगा। देखते ही देखते धुएं ने पूरी बोगी को अपनी चपेट में ले लिया और आग भड़क उठी।

  • सामान छोड़ भागे मासूम और महिलाएं: बोगी के भीतर मौजूद महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों में मौत का डर इस कदर हावी हुआ कि लोग खिड़कियों और दरवाजों से कूदने लगे। कई यात्री अपनी गाढ़ी कमाई का सामान और सूटकेस बोगी के भीतर ही छोड़कर नंगे पैर प्लेटफॉर्म की तरफ भागे।

  • मैनेजमेंट फेल्योर का लाइव सबूत: प्लेटफॉर्म पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों ने रेलवे प्रबंधन पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। लोगों का कहना है कि अगर शुरुआती 10 मिनट में तत्परता दिखाई जाती, तो बोगी को खाक होने से बचाया जा सकता था।

  • न पाइप में पानी, न सिलेंडर में गैस: सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि आपातकालीन स्थिति के लिए स्टेशन पर बिछाई गई वॉटर री-फिलिंग पाइपलाइन पूरी तरह सूखी थी। यही नहीं, जब स्थानीय लोगों ने कोच और प्लेटफॉर्म पर टंगे रेलवे के अग्निशमन सिलेंडरों (Fire Extinguishers) को खोलकर आग बुझाने की कोशिश की, तो वे खाली निकले। उनमें गैस ही नहीं थी। इस नाकामी के कारण आग बेकाबू हो गई।

यात्रियों की जान से खिलवाड़ कब तक?

सासाराम स्टेशन पर हुआ यह रेल हादसा एक बड़ी चेतावनी है कि हम तकनीकी रूप से 'वंदे भारत' और 'बुलेट ट्रेन' के दौर में प्रवेश कर रहे हैं, लेकिन हमारी आम इंटरसिटी ट्रेनों के बुनियादी फायर सेफ्टी सिस्टम आज भी भगवान भरोसे हैं। गनीमत रही कि आग सुबह के वक्त लगी जब अधिकांश यात्री सतर्क थे, अगर यही घटना रात के वक्त चलती ट्रेन में हुई होती, तो सैकड़ों लाशें बिछ सकती थीं। रेलवे बोर्ड को तुरंत इस मामले में उच्च स्तरीय जांच बैठाकर दोषी मेंटेनेंस अधिकारियों और सासाराम स्टेशन मास्टर पर सख्त कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए।

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Manish Tamsoy मनीष तामसोय कॉमर्स में मास्टर डिग्री कर रहे हैं और खेलों के प्रति गहरी रुचि रखते हैं। क्रिकेट, फुटबॉल और शतरंज जैसे खेलों में उनकी गहरी समझ और विश्लेषणात्मक क्षमता उन्हें एक कुशल खेल विश्लेषक बनाती है। इसके अलावा, मनीष वीडियो एडिटिंग में भी एक्सपर्ट हैं। उनका क्रिएटिव अप्रोच और टेक्निकल नॉलेज उन्हें खेल विश्लेषण से जुड़े वीडियो कंटेंट को आकर्षक और प्रभावी बनाने में मदद करता है। खेलों की दुनिया में हो रहे नए बदलावों और रोमांचक मुकाबलों पर उनकी गहरी पकड़ उन्हें एक बेहतरीन कंटेंट क्रिएटर और पत्रकार के रूप में स्थापित करती है।