Jamshedpur Action: डीसी की बैठक के बाद स्कूल वाहनों पर गिरेगी गाज, पुराने वैन-ऑटो होंगे बाहर, छुट्टियों के बाद शुरू होगी धरपकड़
जमशेदपुर समाहरणालय में उपायुक्त राजीव रंजन की अध्यक्षता में हुई जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में स्कूल वैन और पुराने ऑटो को हटाने का बड़ा फैसला हुआ है। अप्रैल में हुई 31 दुर्घटनाओं के बाद प्रशासन के इस कड़े रुख की पूरी ग्राउंड रिपोर्ट यहाँ देखें।
जमशेदपुर, 18 मई 2026 – लौहनगरी जमशेदपुर में बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं और बेलगाम रफ्तार पर लगाम लगाने के लिए जिला प्रशासन ने अब तक का सबसे बड़ा और कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। समाहरणालय सभागार में उपायुक्त (DC) श्री राजीव रंजन की अध्यक्षता में जिला सड़क सुरक्षा समिति एवं यातायात प्रबंधन की एक हाई-लेवल बैठक संपन्न हुई। इस बैठक में लिए गए फैसलों ने शहर के स्कूल वाहन संचालकों, डग्गामार वैन चालकों और ट्रैफिक नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले रईसजादों की नींद उड़ा दी है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि अब सड़कों पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और नियमों को तोड़ने वालों को सीधे सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।
वारदात की दास्तां: 31 हादसे, 24 मौतें और स्कूल परिवहन पर 'सर्जिकल स्ट्राइक'
बैठक के दौरान जब अप्रैल महीने के एक्सीडेंटल आंकड़े सामने आए, तो खुद उपायुक्त भी हैरान रह गए।
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खूनी आंकड़ों का सच: समीक्षा में पाया गया कि अकेले अप्रैल माह में जमशेदपुर और आसपास के इलाकों में कुल 31 सड़क दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें 24 मासूम लोगों ने अपनी जान गंवा दी, जबकि 14 लोग जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे हैं।
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90% मानवीय गलतियां: जांच रिपोर्ट के अनुसार, 90 प्रतिशत हादसों की वजह हेलमेट न पहनना, सीट बेल्ट की अनदेखी, ट्रिपल राइडिंग, ओवरस्पीडिंग और 'ड्रिंक एंड ड्राइव' (शराब पीकर गाड़ी चलाना) रही है।
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पुराने स्कूल वाहनों पर बैन: स्कूली बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए डीसी ने ऐतिहासिक आदेश जारी किया है। उन्होंने कहा कि जैसे ही स्कूलों की ग्रीष्मावकाश (गर्मी की छुट्टियां) समाप्त होंगी, पूरे जिले में स्कूल वैन और ऑटो की सघन जांच शुरू होगी। बिना फिटनेस, बिना परमिट, ओवरलोडेड और कबाड़ हो चुके पुराने वाहनों को तुरंत जब्त कर लिया जाएगा।
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ऑन-स्पॉट मुआवजे का आदेश: उपायुक्त ने 'हिट एंड रन' मामलों पर गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिया कि दुर्घटना पीड़ितों के आश्रितों को मिलने वाले सरकारी मुआवजे की फाइल दफ्तरों में धूल न फांटे। लंबित मामलों का निपटारा कर पीड़ित परिवारों को तत्काल आर्थिक सहायता पहुंचाई जाए।
कागजी आदेश या धरातल पर दिखेगा असर?
समाहरणालय की इस बैठक में रूरल एसपी, एसडीएम धालभूम, जिला परिवहन पदाधिकारी (DTO) और ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के दिग्गजों की मौजूदगी यह बताती है कि योजना बड़े पैमाने पर बनी है। लेकिन असली परीक्षा गर्मी की छुट्टियां खत्म होने के बाद होगी, जब पुलिस टीमें सड़कों पर उतरेंगी। उपायुक्त राजीव रंजन की यह पहल तभी कामयाब होगी जब स्कूल प्रबंधन और अभिभावक भी कबाड़ हो चुके वाहनों में अपने बच्चों को भेजने से तौबा करेंगे।
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