Kalahandi Gas Incident : सेप्टिक टैंक में दम घुटने से बिल्डर और उसके जवान बेटे सहित 6 लोगों की मौत, ओडिशा में मचा भारी कोहराम
ओडिशा के कालाहांडी में सेप्टिक टैंक के निर्माण के दौरान जहरीली गैस की चपेट में आने से बिल्डर, उसके बेटे और राजमिस्त्रियों सहित 6 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई है। मुख्यमंत्री राहत कोष से मुआवजे और मदनपुर-रामपुर पुलिस की लाइव ऑन-फील्ड जांच की पूरी रिपोर्ट यहाँ देखें।
भुवनेश्वर/कालाहांडी, 26 मई 2026 – ओडिशा के कालाहांडी जिले से एक बेहद रूह कँपा देने वाला और खौफनाक घरेलू निर्माण हादसा सामने आया है। यहाँ के मदनपुर-रामपुर स्थित एक निर्माणाधीन साइट पर नवनिर्मित सेप्टिक टैंक का एक हिस्सा खोलते समय जहरीली गैस (Toxic Gas Chambers) के रिसाव के कारण दम घुटने से कम से कम 6 लोगों की मौके पर ही तड़प-तड़प कर मौत हो गई। इस दिल दहला देने वाले हादसे में मरने वालों में मकान का निर्माण करा रहे मुख्य बिल्डर, उनका जवान बेटा, तीन राजमिस्त्री और एक दिहाड़ी मजदूर शामिल हैं। मृतकों की आधिकारिक पहचान निमाई पाल (48 वर्ष), उनके बेटे आकाश पाल (28 वर्ष), अदल माझी (55 वर्ष), मनोरंजन हाती (27 वर्ष), छंदा जल (32 वर्ष) और बिपुल जल (30 वर्ष) के रूप में की गई है। इस जानलेवा गैस चैंबर में फंसे एक अन्य मजदूर पंकज यानी (32 वर्ष) को अचेत अवस्था में स्थानीय अस्पताल के आईसीयू (ICU) में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है। इस वीभत्स हादसे के बाद पूरे ओडिशा में शोक और सनसनी की लहर दौड़ गई है।
हादसे की लाइव इनसाइड स्टोरी: वो एक पैर फिसलने की दुर्घटना, जो छह जिंदगियों का काल बन गई
कालाहांडी जिला प्रशासन और मदनपुर-रामपुर पुलिस की क्राइम इन्वेस्टिगेशन टीम (Investigation Squad) से मिली लाइव ऑन-फील्ड इनपुट के अनुसार, यह सामूहिक मौत एक भयंकर चेन-रिएक्शन दुर्घटना का नतीजा है।
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बिल्डर का दुर्घटनावश गिरना: मंगलवार को निर्माण स्थल पर सेप्टिक टैंक के भीतर के सेंट्रिंग और लकड़ी के फ्रेम को हटाने के लिए टैंक का एक ऊपरी हिस्सा खोला गया था। इसी दौरान वहां खड़े मुख्य बिल्डर निमाई पाल का पैर अचानक फिसल गया और वे सीधे गहरे टैंक के भीतर जा गिरे।
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बचाने की होड़ में हुआ मौत का तांडव: अपने पिता को टैंक के भीतर गिरता और तड़पता देख उनका 28 वर्षीय बेटा आकाश पाल बिना सोचे-समझे उन्हें बचाने के लिए नीचे कूद गया। भीतर जमा कार्बन मोनोऑक्साइड और मीथेन जैसी अत्यधिक जहरीली गैसों के कारण दोनों कुछ ही सेकेंड में बेहोश हो गए। उन्हें भी डूबता देख बाहर खड़े तीन राजमिस्त्री और मजदूर बारी-बारी से बिना किसी सुरक्षा उपकरणों (Safety Gears) के टैंक के भीतर उतरते चले गए और जहरीली गैस के जाल में फंसकर काल के गाल में समा गए।
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प्रशासनिक रेस्क्यू ऑपरेशन: सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड और स्थानीय पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। गैस मास्क पहनकर जवानों ने भारी मशक्कत के बाद सभी 6 शवों को बाहर निकाला। कालाहांडी के जिलाधिकारी (DM) सचिन पावर ने त्वरित सहायता के रूप में प्रत्येक मृतक के परिजनों को अंतिम संस्कार के लिए तत्काल 30-30 हजार रुपये जारी कर दिए हैं।
निर्माण कार्यों में 'टॉक्सिक गैस डिटेक्टर' की अनिवार्यता और जिला आपदा प्रबंधन का विकेंद्रीकरण समय की मांग
कालाहांडी के मदनपुर-रामपुर में एक साथ छह घरों के चिराग बुझने की इस दर्दनाक त्रासदी ने ओडिशा के शहरी और ग्रामीण निर्माण सुरक्षा दावों की कलई खोलकर रख दी है। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी द्वारा मृतकों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए 4-4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता की घोषणा एक सराहनीय और फौरी प्रशासनिक कदम है, लेकिन यह उन पिताओं और पिताओं के जवानों बेटों को वापस नहीं ला सकता। 2026 के इस हाई-टेक युग में इस प्रकार की सामूहिक मौतों को रोकने के लिए अब कड़े और ऐतिहासिक नीतिगत बदलावों की जरूरत है। राज्य सरकार को तुरंत संज्ञान लेते हुए यह नियम बनाना होगा कि किसी भी निजी या सरकारी सेप्टिक टैंक के निर्माण और उसकी पहली ओपनिंग के दौरान स्थानीय पंचायत या अग्निशमन विभाग की निगरानी और मैकेनिकल ब्लोअर का उपयोग अनिवार्य हो। जब तक हम निर्माण श्रमिकों के जीवन को इस तरह भगवान भरोसे छोड़ते रहेंगे, तब तक कालाहांडी जैसे ऐतिहासिक भूभाग को जहरीली गैस के इन भूमिगत चैंबरों के खूनी इतिहास का गवाह बनना पड़ेगा।
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