Jamshedpur Crash : एनएच-33 पर काल बनकर आई रफ्तार, अनियंत्रित होकर स्किड हुई बाइक, आदित्यपुर से ड्यूटी कर लौट रहे रोहित धीवर का फटा सिर

जमशेदपुर के एमजीएम थाना क्षेत्र के एनएच-33 पर श्रीघुटू के पास एक दर्दनाक सड़क हादसे में मदनाबेड़ा निवासी रोहित धीवर गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। आदित्यपुर से ड्यूटी कर लौटने के दौरान बाइक स्किड होने और अस्पताल में चल रहे लाइव इलाज की पूरी रिपोर्ट यहाँ देखें।

May 26, 2026 - 13:53
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Jamshedpur Crash : एनएच-33 पर काल बनकर आई रफ्तार, अनियंत्रित होकर स्किड हुई बाइक, आदित्यपुर से ड्यूटी कर लौट रहे रोहित धीवर का फटा सिर
Jamshedpur Crash : एनएच-33 पर काल बनकर आई रफ्तार, अनियंत्रित होकर स्किड हुई बाइक, आदित्यपुर से ड्यूटी कर लौट रहे रोहित धीवर का फटा सिर

जमशेदपुर, 26 मई 2026 – लौहनगरी जमशेदपुर के अंतर्गत आने वाले लाइफलाइन और डेथ-ट्रैप (Death Trap) बन चुके राष्ट्रीय राजमार्ग-33 (NH-33) पर बीती शाम एक बार फिर रोंगटे खड़े कर देने वाला सड़क हादसा सामने आया है। एमजीएम थाना क्षेत्र के मदनाबेड़ा गांव निवासी 20 वर्षीय युवक रोहित धीवर श्रीघुटू के समीप एक भीषण बाइक दुर्घटना का शिकार हो गए। मिली जानकारी के अनुसार, रोहित अपनी मोटरसाइकिल से अकेले अपने घर लौट रहे थे, तभी श्रीघुटू मोड़ के पास उनकी तेज रफ्तार बाइक अचानक अनियंत्रित होकर हाईवे पर स्किड (फिसल) कर गई। बाइक से गिरने के बाद रोहित सड़क के डिवाइडर से टकराए, जिससे उनके सिर में अत्यंत गंभीर और जानलेवा चोटें आई हैं। घटना के बाद हाईवे पर चीख-पुकार और अफरा-तफरी का माहौल बन गया। स्थानीय ग्रामीणों की तत्परता और जुझारूपन के कारण मौके पर स्थानीय विधायक मंगल कालिंदी की आपातकालीन एंबुलेंस को बुलाया गया, जिससे घायल युवक को तत्काल एमजीएम अस्पताल (MGM Hospital) के इमरजेंसी वार्ड में ट्रांसफर किया गया। डॉक्टरों के अनुसार, रोहित की स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है और वे कोमा जैसी गंभीर स्थिति में आईसीयू में वेंटिलेटर सपोर्ट पर हैं।

हादसे की इनसाइड स्टोरी: आदित्यपुर से मदनाबेड़ा का वो आखिरी सफर, पहिया फिसलते ही हाईवे पर बिछी मौत

एमजीएम थाना पुलिस और एमजीएम अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड के प्रत्यक्षदर्शी सूत्रों से मिली लाइव ऑन-फील्ड इनपुट के अनुसार, यह दुर्घटना कल शाम की है।

  • आदित्यपुर से लौट रहा था श्रमिक: घायल रोहित धीवर (20 वर्ष) जमशेदपुर के औद्योगिक हब आदित्यपुर (Adityapur Industrial Area) स्थित एक निजी निर्माण कंपनी में कार्यरत हैं। हर दिन की तरह वह अपनी शिफ्ट की ड्यूटी समाप्त कर मोटरसाइकिल से वापस अपने पैतृक घर मदनाबेड़ा लौट रहे थे।

  • श्रीघुटू के पास अनियंत्रित हुई रफ्तार: प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि एनएच-33 पर श्रीघुटू के पास अचानक सड़क पर आए किसी अवरोध या तीखे मोड़ के कारण रोहित की बाइक का संतुलन बिगड़ गया। गाड़ी की रफ्तार अधिक होने के कारण पहिया बुरी तरह घिसट गया और रोहित कई फीट दूर जाकर सिर के बल सड़क पर गिरे।

  • पुलिस की त्वरित जांच: दुर्घटना की लाइव सूचना मिलते ही एमजीएम थाना प्रभारी और सशस्त्र बल के जवान एमजीएम अस्पताल पहुंचे। पुलिस ने परिजनों और चश्मदीदों से पूछताछ कर दुर्घटना के कारणों का विस्तृत ब्यौरा रजिस्टर में दर्ज किया है।

  • विधायक एंबुलेंस सेवा का प्रशासनिक इतिहास: मौके पर पहुंची विधायक मंगल कालिंदी की एंबुलेंस भी इस क्षेत्र के एक विशेष प्रशासनिक इतिहास को दर्शाती है। एनएच-33 पर सरकारी एंबुलेंस (108) की भारी कमी और समय पर न पहुंचने के कारण पूर्व के इतिहास में दर्जनों घायल दम तोड़ देते थे। इसी ऐतिहासिक विफलता को देखते हुए स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने अपने फंड से हाईवे के संवेदनशील मोड़ों पर निजी एंबुलेंस तैनात करना शुरू किया, जिसने कल रात रोहित धीवर की जान को प्राथमिक उपचार देकर तत्काल बचा लिया।

हाईवे पर ट्रौमा सेंटर का निर्माण, अनिवार्य हेलमेट चेकिंग और रिफ्लेक्टर्स का आधुनिकीकरण समय की मांग

एमजीएम थाना पुलिस ने तत्परता दिखाकर और स्थानीय लोगों ने विधायक की एंबुलेंस से रोहित को अस्पताल पहुंचाकर मानवता की एक बड़ी मिसाल पेश की है। लेकिन एनएच-33 पर हर दूसरे दिन किसी 20 साल के युवा श्रमिक का खून बहना जिला प्रशासन और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के गाल पर एक करारा तमाचा है। केवल दुर्घटना की एफआईआर दर्ज करना इस खूनी खेल का अंत नहीं है। अब समय आ गया है कि पूर्वी सिंहभूम जिला प्रशासन तुरंत डिमना चौक या एमजीएम थाना क्षेत्र के एनएच-33 कॉरिडोर पर एक सर्वसुविधायुक्त 'हाइवे ट्रौमा सेंटर' (Highway Trauma Center) और इमरजेंसी लाइफ सपोर्ट यूनिट की स्थापना करे, ताकि पीड़ितों को साकची एमजीएम लाने के ट्रैफिक जाम से बचाया जा सके। इसके साथ ही, आदित्यपुर औद्योगिक संघ (ASIA) और कंपनियों को यह अनिवार्य करना होगा कि कोई भी श्रमिक बिना आईएसआई (ISI) मार्क वाले हेलमेट के ड्यूटी से बाहर न निकले। जब तक श्रीघुटू जैसे खतरनाक ब्लैक स्पॉट्स पर रिफ्लेक्टिव साइन बोर्ड और स्पीड ब्रेकर कैमरों का आधुनिकीकरण नहीं होगा, तब तक हमारी फैक्ट्रियों से लौटते मासूम रोहित धीवर जैसे युवा इस खूनी हाईवे के अंधाधुंध इतिहास की भेंट चढ़ते रहेंगे।

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Manish Tamsoy मनीष तामसोय कॉमर्स में मास्टर डिग्री कर रहे हैं और खेलों के प्रति गहरी रुचि रखते हैं। क्रिकेट, फुटबॉल और शतरंज जैसे खेलों में उनकी गहरी समझ और विश्लेषणात्मक क्षमता उन्हें एक कुशल खेल विश्लेषक बनाती है। इसके अलावा, मनीष वीडियो एडिटिंग में भी एक्सपर्ट हैं। उनका क्रिएटिव अप्रोच और टेक्निकल नॉलेज उन्हें खेल विश्लेषण से जुड़े वीडियो कंटेंट को आकर्षक और प्रभावी बनाने में मदद करता है। खेलों की दुनिया में हो रहे नए बदलावों और रोमांचक मुकाबलों पर उनकी गहरी पकड़ उन्हें एक बेहतरीन कंटेंट क्रिएटर और पत्रकार के रूप में स्थापित करती है।