Jamshedpur Action : एमजीएम अस्पताल में पानी की किल्लत पर भड़के डीसी, लापरवाही करने वाली एजेंसी पर 15 जून के बाद सीधे दर्ज होगी एफआईआर
जमशेदपुर के एमजीएम अस्पताल में भीषण गर्मी के बीच उपजे पेयजल संकट पर उपायुक्त राजीव रंजन ने कड़ा रुख अपनाया है। 15 जून तक पाइपलाइन का काम पूरा न होने पर कार्यदायी एजेंसी पर एफआईआर दर्ज करने और प्रतिदिन 15 टैंकर पानी की सप्लाई का लाइव आदेश यहाँ देखें।
जमशेदपुर, 25 मई 2026 – कोल्हान प्रमंडल के सबसे बड़े सरकारी चिकित्सा संस्थान 'महात्मा गांधी मेमोरियल' (MGM) अस्पताल में भीषण गर्मी के बीच उपजे गंभीर पेयजल संकट पर जमशेदपुर के जिला दण्डाधिकारी सह उपायुक्त (DC) श्री राजीव रंजन ने अब तक का सबसे सख्त प्रशासनिक रुख अख्तियार किया है। अस्पताल परिसर में भर्ती मरीजों, नवजातों और उनके परिजनों को पानी की एक-एक बूंद के लिए होने वाली प्रताड़ना को जिला प्रशासन ने सर्वोच्च प्राथमिकता पर लेते हुए एक आपातकालीन समीक्षा बैठक की। बैठक के दौरान उपायुक्त ने तल्ख तेवर दिखाते हुए स्पष्ट किया कि इस चिलचिलाती धूप और उमस के मौसम में अस्पताल जैसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण संस्थान में पानी की कमी होना एक अक्षम्य अपराध है। इसमें किसी भी स्तर पर की गई लापरवाही या शिथिलता को कतई स्वीकार नहीं किया जाएगा। उपायुक्त ने स्थायी समाधान के लिए चल रहे पाइपलाइन प्रोजेक्ट की कछुआ चाल पर गहरी नाराजगी जताते हुए अंतिम डेडलाइन (Time Limit) जारी कर दी है। यदि आगामी 15 जून तक पाइपलाइन बिछाने का काम शत-प्रतिशत पूरा नहीं हुआ, तो जेएनएसी (JNAC) को संबंधित डिफॉल्टर कार्यदायी एजेंसी के खिलाफ सीधे नामजद प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराने का ऑन-फील्ड आदेश दिया गया है।
प्रशासनिक आदेश की इनसाइड स्टोरी: 15 जून की आखिरी चेतावनी, रोज़ दौड़ेंगे 15 बड़े पानी के टैंकर
जिला जनसंपर्क कार्यालय (DPRO) और उपायुक्त कार्यालय से मिली लाइव ऑफिशियल इनपुट के अनुसार, मरीजों की जान और स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वाले ठेकेदारों और अधिकारियों की अब खैर नहीं है।
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वैकल्पिक जलापूर्ति का लाइव मैकेनिज्म: जब तक पाइपलाइन का काम पूरा नहीं होता, तब तक मरीजों को राहत देने के लिए उपायुक्त ने जेएनएसी (जमशेदपुर अक्षेस) के उप नगर आयुक्त को तत्काल प्रभाव से प्रतिदिन कम से कम 15 बड़े पानी के टैंकरों के माध्यम से एमजीएम परिसर में निर्बाध जलापूर्ति सुनिश्चित करने का जिम्मा सौंपा है।
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सभी वार्डों में सतत मॉनिटरिंग: डीसी ने कड़े निर्देश दिए हैं कि अस्पताल के सभी जनरल वार्डों, ओपीडी (OPD), इमरजेंसी वार्ड, लेबर रूम, शौचालयों और तीमारदारों के विश्राम गृहों में साफ और शुद्ध पेयजल की उपलब्धता चौबीसों घंटे रहनी चाहिए। इसकी लाइव मॉनिटरिंग के लिए एक विशेष विजिलेंस टीम तैनात की जा रही है।
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हाई-लेवल मीटिंग में जुटे आला अफसर: इस महत्वपूर्ण बैठक में उपायुक्त के साथ उप विकास आयुक्त (DDC), धालभूम के अनुमंडल पदाधिकारी (SDPO/SDM), निदेशक एनईपी, एमजीएम मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य, एमजीएम अस्पताल के उपाधीक्षक, मानगो नगर निगम के सहायक नगर आयुक्त तथा तकनीकी विभागों के मुख्य अभियंता उपस्थित थे।
सरकारी अस्पतालों में 'एक्वा-ग्रिड' और परमानेंट वाटर ऑडिट सिस्टम का निर्माण समय की मांग
जमशेदपुर के जिला दण्डाधिकारी सह उपायुक्त श्री राजीव रंजन ने 15 जून तक पाइपलाइन पूरी न होने पर एफआईआर (FIR) का हंटर चलाकर और दैनिक 15 टैंकरों की व्यवस्था कर मरीजों के हक में एक बेहद साहसिक और स्वागत योग्य कदम उठाया है। लेकिन हर साल गर्मी आते ही एमजीएम को टैंकरों के भरोसे छोड़ देना किसी भी आधुनिक औद्योगिक शहर के माथे पर कलंक की तरह है। अब समय आ गया है कि टाटा स्टील और राज्य सरकार का स्वास्थ्य विभाग मिलकर एमजीएम अस्पताल के लिए एक समर्पित 'परमानेंट एक्वा-ग्रिड' (Dedicated Water Grid) और वाटर रीसाइक्लिंग प्लांट का निर्माण करें, जो सीधे सुवर्णरेखा या डिमना लेक से जुड़ा हो। इसके साथ ही, अस्पताल प्रबंधन को हर तीन महीने पर 'वाटर इंफ्रास्ट्रक्चर ऑडिट' (Water Audit) कराना अनिवार्य करना होगा, ताकि भविष्य में इस ऐतिहासिक और प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थान में किसी गरीब मां या मासूम बच्चे को भीषण गर्मी के बीच पानी की एक बूंद के लिए तड़पना न पड़े।
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