Birsanagar Tragedy: टेल्को कर्मी ने फांसी लगाकर दी जान, अभी जनवरी में हुए थे परमानेंट, खुशियों के बीच मातम
जमशेदपुर के बिरसानगर में टेल्को कंपनी के स्थायी कर्मचारी सुनील कुमार ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। परमानेंट होने के महज 4 महीने बाद हुई इस दर्दनाक घटना और परिजनों के विलाप की पूरी रिपोर्ट यहाँ देखें।
जमशेदपुर/झारखंड, 09 मई 2026 – लौहनगरी जमशेदपुर के बिरसानगर थाना क्षेत्र में शनिवार की सुबह खुशियों की जगह चीख-पुकार में बदल गई। जोन नंबर-4 के रहने वाले 35 वर्षीय सुनील कुमार ने अपने ही घर में फंदे से लटककर आत्महत्या कर ली। यह घटना उस वक्त और भी मर्मस्पर्शी हो गई जब पता चला कि सुनील हाल ही में टेल्को (टाटा मोटर्स) कंपनी में स्थायी कर्मचारी बने थे। जिस घर में 'परमानेंट' होने की खुशियां मनाई जा रही थीं, वहां अब सन्नाटा पसरा है। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम करा दिया है और मामले की तहकीकात में जुट गई है।
वारदात की दास्तां: नशे की हालत में लौटे और फिर खामोशी
सुनील कुमार के घर में शुक्रवार की रात सब कुछ सामान्य लग रहा था, लेकिन अंदर ही अंदर कोई तूफान पल रहा था।
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रात का मंजर: शुक्रवार की रात सुनील ड्यूटी से घर लौटे। बताया जा रहा है कि वह नशे की हालत में थे। घर पहुँचते ही वह बिना किसी से बात किए सीधे अपने कमरे में चले गए और दरवाजा अंदर से बंद कर लिया।
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अनसुनी पुकार: देर रात उनकी पत्नी उन्हें खाना खाने के लिए बुलाने गईं, लेकिन अंदर से कोई जवाब नहीं मिला। पत्नी को लगा कि शायद थकान और नशे की वजह से वह गहरी नींद में सो गए हैं, इसलिए उन्होंने उन्हें परेशान नहीं किया।
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दरवाजा टूटा और खुला राज: शनिवार सुबह जब काफी देर तक सुनील कमरे से बाहर नहीं निकले और आवाज देने पर भी सन्नाटा रहा, तो पत्नी को अनहोनी की आशंका हुई। शोर मचाने पर पड़ोसी जुटे और दरवाजा तोड़ा गया। अंदर पंखे से सुनील का शव लटक रहा था।
पुलिस की जांच: आखिर क्या थी वजह?
सूचना मिलते ही बिरसानगर थाना पुलिस मौके पर पहुँची।
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शव का पोस्टमार्टम: पुलिस ने शव को नीचे उतारकर पंचनामा किया और एमजीएम अस्पताल में पोस्टमार्टम कराया। शनिवार शाम को शव परिजनों को सौंप दिया गया।
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आत्महत्या की गुत्थी: प्रारंभिक जांच में पुलिस इसे सुसाइड मान रही है। हालांकि, पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि क्या कोई पारिवारिक तनाव था या फिर नशे की लत की वजह से उन्होंने यह कदम उठाया।
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मासूम का सिर से उठा साया: सुनील का एक छोटा बच्चा है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है, वे यह समझ नहीं पा रहे कि जो शख्स अभी कुछ महीने पहले ही करियर के ऊंचे मुकाम पर पहुँचा था, उसने ऐसा क्यों किया।
सवालों के घेरे में 'नशा और तनाव'
सुनील की मौत ने समाज के सामने कई कड़वे सवाल छोड़ दिए हैं।
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खुशी या दबाव: जनवरी में परमानेंट होने के बाद मई में ऐसा कदम उठाना क्या यह दर्शाता है कि आर्थिक सुरक्षा ही मानसिक शांति की गारंटी नहीं है?
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नशे का जाल: क्या नशे की हालत ने विवेक को शून्य कर दिया था? स्थानीय लोगों का कहना है कि नशा युवाओं और कामगारों के बीच एक बड़ी समस्या बनता जा रहा है।
बिरसानगर की यह घटना एक हंसते-खेलते परिवार के उजड़ने की दास्तां है। सुनील कुमार के पीछे उनकी पत्नी और एक मासूम बच्चा है, जिसका भविष्य अब अनिश्चितता के साये में है। टेल्को कंपनी में परमानेंट होने का जश्न अभी फीका भी नहीं पड़ा था कि यह मातम छा गया। पुलिस की विस्तृत जांच के बाद ही साफ हो पाएगा कि सुनील के मन में उस रात ऐसा क्या चल रहा था जिसने उन्हें अपनी जान लेने पर मजबूर कर दिया।
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