Ranchi Suicide : डेयरी फार्म के कमरे में फंदे से झूल गया 21 साल का अमरजीत कुमार, पिता चारा लेकर लौटे तो उड़ गए होश

रांची के नामकुम थाना क्षेत्र अंतर्गत राजा उलातु के जिरगी टोली स्थित एक डेयरी फार्म में बिहार के लखीसराय निवासी 21 वर्षीय युवक अमरजीत कुमार ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली है। पिता द्वारा शव देखे जाने और रिम्स में चल रहे पोस्टमार्टम की पूरी लाइव ऑन-फील्ड रिपोर्ट यहाँ देखें।

May 26, 2026 - 14:24
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Ranchi Suicide : डेयरी फार्म के कमरे में फंदे से झूल गया 21 साल का अमरजीत कुमार, पिता चारा लेकर लौटे तो उड़ गए होश
Ranchi Suicide : डेयरी फार्म के कमरे में फंदे से झूल गया 21 साल का अमरजीत कुमार, पिता चारा लेकर लौटे तो उड़ गए होश

रांची, 26 मई 2026 – झारखंड की राजधानी रांची के ग्रामीण अंचल नामकुम थाना क्षेत्र से एक बेहद दुखद और दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। यहाँ के राजा उलातु पंचायत अंतर्गत जिरगी टोली में स्थित एक निजी डेयरी फार्म के बंद कमरे में एक 21 वर्षीय युवक ने फंदे से लटककर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। मृतक की पहचान अमरजीत कुमार के रूप में हुई है, जो मूल रूप से बिहार के लखीसराय जिले का रहने वाला था और पिछले कुछ समय से रांची में रहकर अपने पिता के साथ मेहनत-मजदूरी करता था। जवान बेटे का शव फंदे पर झूलता देख वृद्ध पिता के पैरों तले जमीन खिसक गई और उनके चीत्कार से पूरा डेयरी परिसर गूंज उठा। घटना की लाइव सूचना मिलते ही नामकुम थाना पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और शव को फंदे से नीचे उतारकर कानूनी प्रक्रिया शुरू की। पुलिस ने शव का पंचनामा (Inquest Operational report) तैयार कर उसे पोस्टमार्टम के लिए रिम्स (RIMS, रांची) भेज दिया है। इस दुखद आत्महत्या के पीछे के कारणों को लेकर इलाके में कई तरह की सामाजिक चर्चाएं हो रही हैं।

घटनाक्रम की इनसाइड स्टोरी: दोपहर के 3 बजे का वो खौफनाक सन्नाटा, जब पिता के पीछे बंद हुआ कमरे का दरवाजा

नामकुम थाना पुलिस और जिरगी टोली के स्थानीय ग्रामीणों से मिली लाइव ऑन-फील्ड इनपुट के अनुसार, सोमवार का दिन रोज की तरह ही सामान्य रूप से शुरू हुआ था, लेकिन दोपहर होते-होते यह एक कभी न भूलने वाले मातम में बदल गया।

  • डेयरी फार्म में रोज की तरह पहुंचे थे दोनों: मृतक अमरजीत कुमार और उसके पिता शिवनाथ साह नामकुम के जिरगी टोली स्थित इसी डेयरी फार्म में दैनिक कर्मचारी के रूप में काम करते थे और गायों की देखभाल करते थे। सोमवार को भी दोनों अपने नियत समय पर काम पर पहुंचे थे।

  • पिता गए थे चारा लेने: दोपहर करीब तीन बजे के आस-पास, पिता शिवनाथ साह गायों के लिए हरा चारा और कुट्टी लाने के लिए डेयरी परिसर से बाहर मुख्य बाजार की ओर गए थे। उस समय अमरजीत बिल्कुल सामान्य दिख रहा था और परिसर में ही मौजूद था।

  • कमरे में मिला शव: आधे घंटे बाद जब शिवनाथ साह चारा लेकर वापस डेयरी लौटे, तो उन्होंने अमरजीत को बाहर नहीं पाया। जब वे डेयरी परिसर के भीतर बने एक कर्मचारी विश्राम कक्ष की ओर बढ़े, तो देखा कि दरवाजा अंदर से बंद था। खिड़की से झांकने पर उनके होश उड़ गए; उनका इकलौता जवान बेटा फंदे से लटका हुआ था।

प्रशासनिक रुख: नामकुम पुलिस की जांच शुरू, रिम्स से पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार

नामकुम थाना प्रभारी ने बताया कि घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मामले को अपने हाथ में ले लिया है।

  1. साक्ष्यों का संकलन: पुलिस की सब-इन्स्पेक्टर टीम ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया है। कमरे से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है, जिसके कारण आत्महत्या के तात्कालिक कारणों का पता लगाने के लिए मृतक का मोबाइल फोन जब्त कर लिया गया है।

  2. शव परिजनों को सौंपने की प्रक्रिया: पुलिस ने शव को रिम्स (RIMS) के मोर्चरी वार्ड में सुरक्षित रखवाया है। मंगलवार को डॉक्टरों के बोर्ड द्वारा पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव को अंतिम संस्कार के लिए लखीसराय से आए शोकाकुल परिजनों को सौंप दिया जाएगा। पुलिस ने सीआरपीसी की धारा 174 के तहत अपमृत्यु (UD Case) का मामला दर्ज किया है।

खटाल श्रमिकों के लिए 'लेबर वेलफेयर काउंसिलिंग', प्रवासी पंजीकरण और मानसिक स्वास्थ्य सहायता समय की मांग

रांची के नामकुम में अमरजीत कुमार की इस असमय मौत ने राजधानी के चमकते शहरी विकास के पीछे छिपे ग्रामीण श्रमिकों के मानसिक अवसाद और उनके जीवन के कड़वे सच को उजागर कर दिया है। 2026 के इस आधुनिक दौर में भी अगर कोई 21 साल का युवा मजदूर अपने पिता के चंद मिनटों के लिए दूर जाने पर मौत को गले लगा लेता है, तो यह हमारे सामाजिक और प्रशासनिक ढांचे की एक बहुत बड़ी और ऐतिहासिक विफलता है। केवल शव का पोस्टमार्टम कराना और केस फाइल बंद कर देना समाधान नहीं है। रांची जिला प्रशासन और श्रम विभाग (Labour Department) को तुरंत नामकुम, खेलगांव और टाटीसिलवे जैसे डेयरी हब में काम करने वाले सभी प्रवासी मजदूरों का एक अनिवार्य 'हेल्थ एंड मेंटल वेलफेयर ऑडिट' (Mental Health Audit) कराना चाहिए। इसके साथ ही, खटाल मालिकों को यह निर्देश देने होंगे कि वे अपने कर्मचारियों को साप्ताहिक अवकाश और काउंसिलिंग की सुविधा दें, ताकि भविष्य में बिहार या झारखंड के किसी और गरीब पिता शिवनाथ साह को अपने जवान बेटे का शव इस तरह रांची के किसी बंद कमरे में फंदे से झूलता हुआ न देखना पड़े।

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Manish Tamsoy मनीष तामसोय कॉमर्स में मास्टर डिग्री कर रहे हैं और खेलों के प्रति गहरी रुचि रखते हैं। क्रिकेट, फुटबॉल और शतरंज जैसे खेलों में उनकी गहरी समझ और विश्लेषणात्मक क्षमता उन्हें एक कुशल खेल विश्लेषक बनाती है। इसके अलावा, मनीष वीडियो एडिटिंग में भी एक्सपर्ट हैं। उनका क्रिएटिव अप्रोच और टेक्निकल नॉलेज उन्हें खेल विश्लेषण से जुड़े वीडियो कंटेंट को आकर्षक और प्रभावी बनाने में मदद करता है। खेलों की दुनिया में हो रहे नए बदलावों और रोमांचक मुकाबलों पर उनकी गहरी पकड़ उन्हें एक बेहतरीन कंटेंट क्रिएटर और पत्रकार के रूप में स्थापित करती है।