Ramgarh Bust : राहुल दुबे गैंग के 7 शूटर दबोचे, पतरातु फ्लाईओवर से अल्ट्राटेक सीमेंट प्लांट तक हुई गोलीबारी का पर्दाफाश, 34 जिंदा कारतूस बरामद
रामगढ़ के पतरातु में पुलिस ने राहुल दुबे गिरोह के 7 सक्रिय गुर्गों को भारी मात्रा में देसी पिस्टल और 34 कारतूस के साथ गिरफ्तार किया है। ओसम डेयरी और अल्ट्राटेक प्लांट पर हुई ताबड़तोड़ फायरिंग के खुलासे की पूरी लाइव ऑन-फील्ड रिपोर्ट यहाँ देखें।
रामगढ़/पतरातु, 26 मई 2026 – झारखंड के रामगढ़ जिले में कोयलांचल और औद्योगिक घरानों से रंगदारी वसूलने वाले संगठित अपराध सिंडिकेट के खिलाफ जिला पुलिस ने अब तक की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक सर्जिकल स्ट्राइक की है। पतरातु थाना क्षेत्र में किसी बड़ी और सनसनीखेज हत्या की वारदात को अंजाम देने की फिराक में जुटे कुख्यात राहुल दुबे गिरोह (Rahul Dubey Gang) के सात खूंखार शूटरों को पुलिस ने चारों तरफ से घेराबंदी कर रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया है। पकड़े गए अपराधियों में एक नाबालिग (विधि विरुद्ध किशोर) भी शामिल है, जिसे गैंग द्वारा शूटर के रूप में ट्रेन किया जा रहा था। रामगढ़ एसपी मुकेश लुनायत के निर्देश पर हुई इस हाई-प्रोफाइल कार्रवाई में अपराधियों के पास से अत्याधुनिक विदेशी बनावट की पिस्टल, मैगजीन, भारी मात्रा में जिंदा गोलियां और तस्करों की तीन मोटरसाइकिलें बरामद की गई हैं। इस बड़ी कामयाबी से पतरातु, भुरकुंडा और पतरातू थर्मल पावर स्टेशन (PTPS) कॉरिडोर के उद्योगपतियों और ठेकेदारों ने बड़ी राहत की सांस ली है।
क्रैकडाउन की इनसाइड स्टोरी: 25 मई की वो खुफिया इनपुट, जब पतरातु एसडीपीओ की स्पेशल टीम ने डाला डेरा
रामगढ़ जिला पुलिस मुख्यालय और पतरातु अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (SDPO) कार्यालय से मिली लाइव ऑन-फील्ड इनपुट के अनुसार, यह पूरी कार्रवाई तकनीकी विंग की मदद से की गई।
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बड़ी डकैती और हत्या का था प्लान: बीते 25 मई को रामगढ़ एसपी को पुख्ता तकनीकी इनपुट मिला था कि राहुल दुबे गिरोह के शूटर पतरातु के एक गुप्त ठिकाने पर हथियारों के जखीरे के साथ जमा हुए हैं। वे किसी स्थानीय बड़े कोयला कारोबारी की हत्या कर रंगदारी का नया साम्राज्य स्थापित करना चाहते थे।
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जाल बिछाकर दबोचे गए गुर्गे: एसपी के निर्देश पर पतरातु एसडीपीओ राघवेंद्र शर्मा के नेतृत्व में एक स्वाट (SWAT) क्रैक टीम बनाई गई। पुलिस ने मुखबिरों की सटीक लोकेशन के आधार पर दबिश देकर मौके से विकास साव, विशाल कुमार, बिटु कुमार रवि, हीरालाल कुमार, दिगंबर प्रजापति उर्फ डेगन और एहतेसान अंसारी उर्फ दुर्लभ समेत एक नाबालिग को दबोच लिया।
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तीन थानों की केस फाइलों का निपटारा: पूछताछ में इन शूटरों ने कबूल किया कि हाल ही में पतरातु रेलवे फ्लाईओवर गेट पर दहशत फैलाने के लिए की गई अंधाधुंध गोलीबारी, ओसम डेयरी प्लांट (Osam Dairy) के बाहर हुई फायरिंग और अल्ट्राटेक सीमेंट प्लांट (Ultratech Cement) पर लेवी के लिए बरसाई गई गोलियों के पीछे इसी सिंडिकेट का हाथ था।
बरामदगी और क्रिमिनल डोजियर: 7.62 एमएम पिस्टल, 34 गोलियां और यूएपीए (UAPA) का डार्क बैकग्राउंड
पतरातु थाना पुलिस ने अपराधियों के पास से जो सामान जब्त किया है, वह यह साबित करने के लिए काफी है कि यह गैंग किस कदर पतरातु को दहलाने की तैयारी में था।
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हथियारों का लाइव जखीरा: अपराधियों के पास से 7.62 एमएम की एक सेमी-ऑटोमैटिक देसी पिस्टल, दो लोडेड मैगजीन और 34 पीस जिंदा कारतूस बरामद किए गए हैं।
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तीन स्पोर्ट्स बाइक और मोबाइल: इनके पास से दो टीवीएस अपाचे (TVS Apache) मोटरसाइकिल, एक स्टार सिटी प्लस बाइक और छह एक्टिव एंड्रॉइड स्मार्टफोन जब्त किए गए हैं, जिनका इस्तेमाल रंगदारी के इंटरनेशनल कॉल्स के लिए किया जा रहा था।
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गैंगस्टरों का पुराना इतिहास: पुलिस रिकॉर्ड्स के अनुसार, पकड़े गए विकास साव और दिगंबर प्रजापति उर्फ डेगन पुराने हिस्ट्रीशीटर हैं। इनके खिलाफ पहले से ही रंगदारी, हत्या के प्रयास, आर्म्स एक्ट और देशद्रोह से जुड़ी अत्यंत सख्त धाराओं वाले यूएपीए (UAPA) के तहत मामले दर्ज हैं। वहीं बिटु कुमार रवि पर भी हत्या के प्रयास का पुराना केस दर्ज है।
सीसीएल-औद्योगिक क्षेत्रों में आर्थिक अपराध विंग की तैनाती और फास्ट-ट्रैक कोर्ट ट्रायल समय की मांग
रामगढ़ के एसपी मुकेश लुनायत और पतरातु पुलिस टीम ने राहुल दुबे गिरोह के सात शूटरों को सलाखों के पीछे भेजकर जिले की कानून व्यवस्था को एक बड़ी और ऐतिहासिक संजीवनी दी है। लेकिन जब तक जेलों के भीतर से संचालित हो रहे इन गैंगस्टरों की आर्थिक रीढ़ को पूरी तरह जमींदोज नहीं किया जाएगा, तब तक पतरातु के औद्योगिक विकास पर मंडराते काले बादल नहीं छटेंगे। केवल आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजना काफी नहीं है। अब समय आ गया है कि झारखंड सरकार तुरंत पतरातु और भुरकुंडा जैसे संवेदनशील इंडस्ट्रियल जोन में 'एंटी-एक्सटॉर्शन सेल' (Anti-Extortion Cell) और विशेष औद्योगिक सुरक्षा बल तैनात करे। इसके साथ ही, विकास साव और दिगंबर प्रजापति जैसे अपराधियों के खिलाफ दर्ज यूएपीए (UAPA) मामलों की सुनवाई फास्ट-ट्रैक कोर्ट के माध्यम से कराकर उन्हें जल्द से जल्द कठोरतम सजा दिलानी होगी, ताकि रामगढ़ के इस गौरवशाली और ऐतिहासिक औद्योगिक भूभाग को रंगदारी और गोलीबारी के इस खूनी इतिहास से पूरी तरह मुक्त कराया जा सके।
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