Baharagora Tragedy : बिजली गुल होने पर छत पर सोया था परिवार, आधी रात को 5 साल का इकलौता लाडला नीचे गिरा, बहरागोड़ा अस्पताल पहुंचने से पहले दम तोड़ा
बहरागोड़ा प्रखंड की कुमारडुबी पंचायत के निरंजनपुर गांव में बिजली कटने के कारण छत पर सोए उपेन मुंडा के 5 वर्षीय मासूम बेटे विद्युत मुंडा की छत से गिरकर दर्दनाक मौत हो गई है। सरस्वती शिशु मंदिर के शिक्षकों और ग्रामीणों की शोक संवेदना की पूरी लाइव रिपोर्ट यहाँ देखें।
बहरागोड़ा/जमशेदपुर, 25 मई 2026 – पूर्वी सिंहभूम (जमशेदपुर) जिले के ग्रामीण इलाकों में बिजली विभाग की लचर व्यवस्था और भीषण उमस ने एक हंसते-खेलते हंसमुख परिवार का चिराग हमेशा के लिए बुझा दिया है। बहरागोड़ा प्रखंड के कुमारडुबी पंचायत अंतर्गत निरंजनपुर गांव से एक बेहद हृदय विदारक और रूह कँपा देने वाली दुखद घटना सामने आई है। यहाँ रविवार की आधी रात को बिजली गुल होने के कारण अपने माता-पिता के साथ घर की खुली छत पर सोए एक पांच वर्षीय मासूम बच्चे विद्युत मुंडा की छत से अनियंत्रित होकर नीचे गिर जाने से दर्दनाक मौत हो गई। आधी रात को अचानक नींद खुलने के बाद नीचे कमरे में जाने के प्रयास के दौरान यह भयंकर हादसा हुआ। लहूलुहान और अचेत अवस्था में माता-पिता उसे तुरंत बहरागोड़ा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (अस्पताल) लेकर भागे, लेकिन बदकिस्मती से मासूम ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। इस भयानक हादसे के बाद से पूरे निरंजनपुर गांव में सोमवार सुबह से सन्नाटा पसरा हुआ है और माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल है।
वारदात की दास्तां: उमस भरी वो काली रात, इकलौते लाडले की खुली आंख और अंधेरे में लील गया काल
बहरागोड़ा थाना क्षेत्र और निरंजनपुर के चश्मदीद ग्रामीणों से मिली लाइव ऑन-फील्ड इनपुट के अनुसार, यह घटना पूरी तरह से बिजली संकट और सुरक्षा सुरक्षात्मक बाउंड्री न होने का एक संयुक्त और खौफनाक परिणाम है।
-
बिजली संकट ने छत पर भेजा परिवार: रविवार की रात कुमारडुबी पंचायत क्षेत्र में भारी उमस और गर्मी थी, इसी बीच देर रात गांव की बिजली पूरी तरह गुल हो गई। कमरों के भीतर दम घुटने जैसी स्थिति होने के बाद उपेन मुंडा अपनी पत्नी और अपने इकलौते लाडले बेटे विद्युत मुंडा (5 वर्ष) को लेकर ठंडी हवा के लिए घर की खुली छत पर सोने चले गए।
-
नींद में नीचे जाने का प्रयास और अनियंत्रित फॉल: आधी रात को जब पूरा परिवार गहरी नींद में था, तभी अचानक मासूम विद्युत की नींद खुल गई। वह अंधेरे में छत से नीचे जाने वाले रास्ते या जीने की ओर बढ़ने लगा। इसी दौरान नींद के झोंके और अंधेरे के कारण उसका संतुलन बिगड़ गया और वह बिना मुंडेर या रेलिंग वाली छत से सीधे कंक्रीट की जमीन पर जा गिरा।
-
रास्ते में ही टूट गईं सांसें: भारी आवाज और चीख-पुकार सुनकर माता-पिता की नींद खुली। नीचे जाकर देखा तो मासूम खून से लथपथ तड़प रहा था। उसे तुरंत गाड़ी से बहरागोड़ा अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने जांच करते ही उसे मृत घोषित कर दिया, क्योंकि सिर में अंदरूनी चोट के कारण भारी ब्लीडिंग हो चुकी थी।
प्रशासनिक और सामाजिक रुख: सरस्वती शिशु मंदिर के शिक्षकों ने दी श्रद्धांजलि, गांव में पसरा मातम
इस मार्मिक घटना की खबर जैसे ही सोमवार सुबह बहरागोड़ा और आसपास के इलाकों में फैली, स्थानीय प्रबुद्ध नागरिक और शिक्षाविद पीड़ित परिवार को सांत्वना देने पहुंचे।
-
शिशु मंदिर के शिक्षकों ने बंधाया ढांढस: सोमवार सुबह इस दुखद खबर को सुनकर सरस्वती शिशु मंदिर, पाटपुर दरखुली के वरिष्ठ शिक्षक रोहित कुइला, शक्ति कुमार साहू, गौरीशंकर गंड, राजेश कुइला एवं सुकुमार साहू सहित दर्जनों ग्रामीणों ने उपेन मुंडा के घर पहुंचकर पीड़ित माता-पिता से मुलाकात की। शिक्षकों ने मासूम की आत्मा की शांति के लिए गहरी शोक संवेदना प्रकट की।
-
बिजली विभाग के खिलाफ सुलग रहा आक्रोश: घटना के बाद से स्थानीय ग्रामीणों में बिजली विभाग की अनियमित कटौती को लेकर भारी गुस्सा देखा जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि ग्रामीण फीडर में रात को बिजली रहती, तो परिवार छत पर सोने न जाता और इस मासूम की जान बच सकती थी।
ग्रामीण विद्युतीकरण का आधुनिकीकरण और छतों पर सुरक्षा मुंडेर का निर्माण अनिवार्य करना समय की मांग
बहरागोड़ा के निरंजनपुर गांव में हुई विद्युत मुंडा की इस असमय और दर्दनाक मौत ने हमारे आधुनिक समाज और प्रशासनिक दावों के मुंह पर एक करारा तमाचा जड़ा है। आजादी के इतने दशकों बाद भी अगर एक मासूम को सिर्फ इसलिए अपनी जान गंवानी पड़े क्योंकि उसके गांव में रात को पंखा चलाने के लिए बिजली नहीं थी, तो यह बेहद शर्मनाक है। बिजली विभाग को तुरंत बहरागोड़ा और कुमारडुबी पंचायत के ग्रामीण सब-स्टेशनों को अपग्रेड करना चाहिए ताकि रात के समय निर्बाध बिजली मिल सके। इसके साथ ही, स्थानीय मुखिया और पंचायत प्रशासन को ग्रामीण क्षेत्रों में आवास निर्माण के दौरान छतों पर अनिवार्य रूप से सुरक्षा रेलिंग लगाने के लिए जागरूकता अभियान चलाना होगा, ताकि भविष्य में किसी और गरीब और बेबस माता-पिता का इकलौता लाडला इस तरह काल का ग्रास न बन सके।
What's Your Reaction?


