Chaibasa Arrest: गोयराबेड़ा जंगल में पुलिस की लाइव घेराबंदी, ठेकेदार से वाट्सऐप लेवी वसूलने आए पीएलएफआई के 3 शूटर लोड पिस्टल के साथ दबोचे
पश्चिमी सिंहभूम के आनन्दपुर में बुरुईचिण्डा-गोयराबेड़ा सड़क निर्माण ठेकेदार से लेवी वसूलने पहुंचे पीएलएफआई से जुड़े संजु भोगता सहित 3 खूंखार अपराधियों को पुलिस ने लोड पिस्टल और 4 जिंदा कारतूस के साथ गिरफ्तार किया है। इस बड़ी रेड की पूरी विस्तृत रिपोर्ट यहाँ देखें।
चाईबासा/आनन्दपुर, 26 मई 2026 – पश्चिमी सिंहभूम (कोल्हान प्रमंडल) के घने जंगलों और सुदूरवर्ती इलाकों में विकास योजनाओं को ठप करने वाले उग्रवादी संगठनों के लेवी सिंडिकेट के खिलाफ जिला पुलिस ने एक बार फिर सबसे बड़ा और निर्णायक क्रैकडाउन किया है। आनन्दपुर थाना क्षेत्र के बुरुईचिण्डा से गोयराबेड़ा अंचल में सड़क निर्माण कार्य में जुटे ठेकेदार से लाखों रुपये की रंगदारी (लेवी) वसूलने पहुंचे कुख्यात पीएलएफआई (PLFI) संगठन के पूर्व विंग से जुड़े तीन शातिर अपराधियों को पुलिस की विशेष टीम ने अत्याधुनिक हथियारों के जखीरे के साथ रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया है। उग्रवादियों के पास से एक लोडेड देसी पिस्टल, मैगजीन, मिसफायर और जिंदा कारतूस के साथ कुल 7 मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं। पश्चिमी सिंहभूम के पुलिस अधीक्षक (SP) अमित रेनू के निर्देश पर हुई इस त्वरित और गुप्त छापेमारी से सारंडा और पोड़ाहाट वन क्षेत्र के ठेकेदारों व कंस्ट्रक्शन कंपनियों ने बड़ी राहत की सांस ली है।
क्रैकडाउन की इनसाइड स्टोरी: सोमवार सुबह 8:20 बजे की वो लाइव घेराबंदी, जब जंगल की ओर भागे उग्रवादी
चाईबासा जिला पुलिस मुख्यालय और आनन्दपुर थाना सूत्रों से मिली लाइव ऑन-फील्ड इनपुट के अनुसार, इस पूरे एंटी-नक्सल ऑपरेशन (Anti-Naxal Operation) को बेहद योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दिया गया।
-
एसपी को मिली थी सीक्रेट इनपुट: एसपी अमित रेनू को पुख्ता तकनीकी सूचना मिली थी कि बुरुईचिण्डा से गोयराबेड़ा के बीच बन रही नई सड़क के ठेकेदार को डराने और लेवी की रकम उठाने के लिए कुछ हथियारबंद अपराधी इलाके में रेकी कर रहे हैं। तत्काल आनन्दपुर थाना प्रभारी प्रिंस और सुबोध कुमार गौतम के नेतृत्व में झारखंड पुलिस के जवानों की एक क्रैक टीम बनाई गई।
-
जंगल के कच्चे रास्ते पर नाकेबंदी: सोमवार की सुबह ठीक 8:20 बजे जब पुलिस की गाड़ियां बुरुईचिण्डा-गोयराबेड़ा जाने वाली कच्ची सड़क के पास पहुंची, तो गोयराबेड़ा जंगल के मुहाने पर खड़े दो संदिग्ध युवक पुलिस की आहट पाकर घने जंगलों की ओर भागने लगे। जवानों ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए दौड़कर दोनों को दबोच लिया।
-
लोड पिस्टल और मोबाइल नेटवर्क बरामद: पकड़े गए अपराधियों की शिनाख्त 23 वर्षीय संजु भोगता (बेड़ाकुन्दुदा निवासी) और 27 वर्षीय कृष्णा भोगता (कुदाहाँसदा निवासी) के रूप में हुई। संजु भोगता की कमर से एक लोडेड देसी पिस्टल और मैगजीन बरामद हुई, जिसमें एक जिंदा और एक मिसफायर कारतूस फंसा हुआ था। कृष्णा के पास से तीन जिंदा कारतूस मिले।
व्हाट्सऐप सिंडिकेट और गाड़ियों को फूंकने का कबूलनामा: संजय साय की गिरफ्तारी
आनन्दपुर थाने की लॉकअप में जब उग्रवादियों से सख्ती से पूछताछ की गई, तो कोल्हान बेल्ट के एक बहुत बड़े टेरर फंडिंग नेटवर्क (Terror Funding) का पर्दाफाश हुआ।
-
इंटरनेट कॉलिंग से रंगदारी का खेल: संजु भोगता ने कबूल किया कि वे पुलिस की ट्रैकिंग से बचने के लिए सामान्य वॉयस कॉल के बजाय केवल वाट्सऐप (WhatsApp Virtual Calls) के जरिए ठेकेदारों को सीधे धमकी देते थे।
-
वैष्णवी इन्फ्रा प्रोजेक्ट आगजनी कांड का खुलासा: संजु ने स्वीकार किया कि बीते 9 फरवरी को ग्राम रोबोकेरा में 'वैष्णवी इन्फ्रा प्रोजेक्ट कंपनी' की साइट पर धावा बोलकर करोड़ों रुपये के वाहनों और डंपरों को फूंकने की वारदात (आनन्दपुर थाना कांड संख्या 04/26) में भी वही मुख्य शूटर था।
-
तीसरे कूरियर का भंडाफोड़: दोनों के लाइव बयान के आधार पर पुलिस ने इस सिंडिकेट के तीसरे मुख्य सूत्रधार 36 वर्षीय संजय साय (निवासी हारता) को भी दबोच लिया, जो लेवी की रकम को ठिकाने लगाने और लॉजिस्टिक्स सपोर्ट देने का काम करता था।
इतिहास के पन्नों से: पोड़ाहाट का ब्रिटिशकालीन इतिहास, सारंडा का उग्रवाद भूगोल और कोल्हान में 'लेवी सिंडिकेट' का डार्क इकोनॉमिक पैटर्न
आनन्दपुर का यह गोयराबेड़ा जंगल, ठेकेदार से व्हाट्सऐप पर मांगी गई लेवी और पीएलएफआई से जुड़े संजु भोगता की यह गिरफ्तारी केवल एक आज की सुर्खी नहीं है, बल्कि यह पश्चिमी सिंहभूम के उग्रवाद इतिहास और इसके डार्क इकोनॉमिक पैटर्न से गहराई से जुड़ी हुई है।
-
चाईबासा और आनन्दपुर का ऐतिहासिक व भौगोलिक बैकग्राउंड: ऐतिहासिक रूप से पश्चिमी सिंहभूम का यह अंचल 'हो' और 'मुंडा' जनजातियों की वीर भूमि रहा है। ब्रिटिश काल में 1837 में अंग्रेजों ने इस पूरे इलाके को 'कोलहान गवर्नमेन्ट एस्टेट' घोषित किया था ताकि यहाँ के जंगलों और खनिजों पर नियंत्रण किया जा सके। आनन्दपुर का क्षेत्र पोड़ाहाट राज और सारंडा (700 पहाड़ियों की भूमि) के जंगलों का प्रवेश द्वार है। इसकी भौगोलिक बनावट पहाड़ों, संकरी घाटियों और घने साल के जंगलों से घिरी है, जो उग्रवादी संगठनों को छिपने के लिए प्राकृतिक सुरक्षा प्रदान करती आई है।
-
कोल्हान में पीएलएफआई (PLFI) और 'लेवी इकोनॉमी' का डार्क इतिहास: यदि हम पिछले ढाई दशकों के चाईबासा, खूंटी और सिमडेगा के क्रिमिनल रिकॉर्ड्स को खंगालें, तो 'पीपल्स लिबरेशन फ्रंट ऑफ इंडिया' (PLFI) का उदय मुख्य धारा के नक्सलियों से टूटकर एक विशुद्ध लेवी-वसूलने वाले हिंसक सिंडिकेट के रूप में हुआ था। सारंडा और पोड़ाहाट के सुदूर गांवों में जब भी कोई सड़क, पुल या माइंस का ठेका शुरू होता है, तो ये संगठन कंस्ट्रक्शन कंपनियों की मशीनों (जैसे जेसीबी, पोकलेन) को फूंकने का एक डार्क ऐतिहासिक पैटर्न अपनाते हैं ताकि ठेकेदारों में खौफ पैदा कर कुल प्रोजेक्ट लागत का 5% से 10% हिस्सा लेवी के रूप में वसूला जा सके।
-
कच्ची सड़कों और वर्चुअल क्राइम का इतिहास: पहले ये उग्रवादी पर्चे (लेवी रसीद) फेंककर रंगदारी मांगते थे, लेकिन 2026 के इस आधुनिक दौर में इन्होंने व्हाट्सऐप और वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (VPN) का सहारा लेना शुरू कर दिया है, जो इस बार आनन्दपुर पुलिस की चौकसी के कारण विफल हुआ।
सारंडा-पोड़ाहाट कॉरिडोर में 'कंस्ट्रक्शन प्रोटेक्शन फोर्स' और फास्ट-ट्रैक बीएनएस ट्रायल समय की मांग
आनन्दपुर थाना प्रभारी प्रिंस और उनकी टीम ने संजु भोगता समेत तीन उग्रवादियों को समय रहते दबोचकर गोयराबेड़ा में चल रहे सड़क निर्माण कार्य को सुरक्षा की एक बड़ी संजीवनी दी है। इन अपराधियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता 2023 (BNS) की धारा 308 और आर्म्स एक्ट के तहत आनन्दपुर थाना कांड संख्या 13/26 दर्ज कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। लेकिन सुदूरवर्ती आदिवासी क्षेत्रों के ऐतिहासिक विकास को सुनिश्चित करने के लिए केवल गिरफ्तारियां काफी नहीं हैं। झारखंड सरकार और केंद्रीय गृह मंत्रालय को तुरंत संज्ञान लेते हुए सारंडा और पोड़ाहाट के विकास प्रोजेक्ट्स के लिए एक समर्पित 'कंस्ट्रक्शन प्रोटेक्शन फोर्स' (Construction Protection Force) का गठन करना चाहिए। इसके साथ ही, सरकारी गवाहों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए संजु भोगता के पुराने आगजनी मामलों का स्पीडी ट्रायल (Speedy Trial) कराना होगा, ताकि भविष्य में कोई भी देशद्रोही संगठन चाईबासा के इस ऐतिहासिक और प्राकृतिक रूप से समृद्ध भूभाग के विकास को अपने खूनी और डार्क लेवी इतिहास की बेड़ियों में न जकड़ सके।
What's Your Reaction?


