Jamshedpur Review : बागबेड़ा-गोविंदपुर जलापूर्ति पर उपायुक्त का कड़ा एक्शन, 15 जून तक काम पूरा करने का मिला विधिक अल्टीमेटम!
जमशेदपुर समाहरणालय में उपायुक्त राजीव रंजन द्वारा बागबेड़ा व छोटा गोविंदपुर जलापूर्ति योजनाओं की सुस्त रफ्तार पर दिए गए कड़े विधिक अल्टीमेटम और ओडीएफ प्लस गांवों की लाइव ऑन-फील्ड समीक्षा रिपोर्ट यहाँ देखें।
जमशेदपुर, 1 जून 2026 – जमशेदपुर के साकची कलेक्ट्रेट में आज पानी और साफ-सफाई की सुस्त रफ्तार को लेकर एक बड़ी मीटिंग हुई। पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त (DC) राजीव रंजन ने पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के काम की समीक्षा की। इस बैठक में जब जल जीवन मिशन और स्वच्छ भारत मिशन की सुस्त रफ्तार सामने आई, तो डीसी ने अधिकारियों क्लास लगा दी। उन्होंने साफ कहा कि बागबेड़ा जलापूर्ति योजना के वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट का काम हर हाल में 15 जून 2026 तक पूरा हो जाना चाहिए। वहीं छोटा गोविंदपुर योजना के बचे हुए काम को एक महीने के अंदर चालू करने का अल्टीमेटम दिया है। डीसी ने साफ कर दिया है कि जनता के काम में ढिलाई अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
मीटिंग की इनसाइड स्टोरी: गोविंदपुर से पटमदा तक अफसरों को लगी डांट
समाहरणालय से मिली जानकारी के मुताबिक, ग्रामीण इलाकों में पानी का संकट दूर करने के लिए डीसी ने कड़े निर्देश दिए हैं:
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बागबेड़ा-गोविंदपुर पर कड़ा रुख: बागबेड़ा प्रोजेक्ट के काम को 15 जून तक हर हाल में खत्म करने को कहा गया है, ताकि लोगों को जल्द राहत मिले। छोटा गोविंदपुर के एक्सटेंशन वाले हिस्से को भी एक महीने में चालू करना होगा।
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फॉरेस्ट क्लियरेंस का पेच: बोड़ाम-पटमदा की बड़ी ग्रामीण जलापूर्ति योजना की समीक्षा करते हुए डीसी ने कहा कि वन विभाग (Forest Department) से अटके एनओसी (NOC) के मामले को जल्द से जल्द सुलझाया जाए।
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शौचालय निर्माण में तेजी: अबुआ आवास योजना के तहत बनने वाले घरों में शौचालय का काम जल्द पूरा करने के लिए लाभार्थियों के साथ तुरंत बैठक करने का आदेश दिया गया है। साथ ही ओडीएफ प्लस गांवों की चेकिंग एक हफ्ते में पूरी करने को कहा है।
ग्राउंड लेवल पर मॉनिटरिंग और कड़े कदम जरूरी
उपायुक्त राजीव रंजन और उप विकास आयुक्त (DDC) नागेंद्र पासवान की इस बैठक से साफ है कि प्रशासन अब सुस्त एजेंसियों को बख्शने के मूड में नहीं है। डीसी ने कहा कि पानी और सफाई सीधे तौर पर जनता से जुड़े मुद्दे हैं, इसलिए इसमें कोई भी बहानेबाजी नहीं चलेगी। जो प्रोजेक्ट पूरे हो चुके हैं, उन्हें एक हफ्ते के अंदर 'ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति' को सौंपने का आदेश दिया गया है।
लेकिन केवल बैठकों और अल्टीमेटम से इस पुराने संकट का परमानेंट इलाज नहीं हो सकता। 2026 के इस डिजिटल दौर में पानी की सप्लाई और पाइपलाइन की निगरानी के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल होना चाहिए। साथ ही, जो ठेकेदार बार-बार डेडलाइन फेल करते हैं, उन पर भारी जुर्माना लगाना चाहिए और उन्हें ब्लैकलिस्ट करना चाहिए। जब तक ग्राउंड लेवल पर कड़ाई से काम नहीं होगा, तब तक जमशेदपुर के इन ग्रामीण इलाकों को पानी की बूंद-बूंद के संकट से पूरी तरह मुक्ति नहीं मिल पाएगी।
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