Fuel Price : पेट्रोल-डीजल की कीमतों में आग से बढ़ेगी भयंकर महंगाई, क्रिसिल की रिपोर्ट ने उड़ाए होश! 10 रुपये तक बढ़ सकते हैं दाम, दूध-फल से लेकर सीमेंट-कपड़ा सब कुछ होने वाला है महंगा
पेट्रोल-डीजल के दामों में 10 रुपये तक की संभावित बढ़ोतरी से देश में माल ढुलाई महंगी होने और आम उपभोग की चीजों के दाम बढ़ने को लेकर रेटिंग एजेंसी क्रिसिल की आई चौंकाने वाली रिपोर्ट यहाँ देखें।
नई दिल्ली, 2 जून 2026 – देश के आम नागरिकों की जेब पर एक बार फिर बहुत बड़ा आर्थिक बोझ बढ़ने वाला है। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल (CRISIL) ने मंगलवार को जारी अपनी ताजा रिपोर्ट में एक बेहद चौंकाने वाला अनुमान जताया है। रिपोर्ट के मुताबिक, पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी से पूरी भारतीय अर्थव्यवस्था पर महंगाई (Inflation) का भारी दबाव बढ़ने की आशंका है। आने वाले दिनों में ट्रांसपोर्टेशन और मैन्युफैक्चरिंग की लागत बढ़ने वाली है, जिससे सुबह की चाय से लेकर मकान बनाने के सीमेंट तक, सब कुछ महंगा हो सकता है। रिपोर्ट बताती है कि पिछले 15 मई के बाद से ही तेल की कीमतों में करीब 7.5 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हो चुकी है और अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल (Crude Oil) इसी तरह गर्म रहा, तो यह बढ़ोतरी जल्द ही 10 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच जाएगी।
महंगाई की इनसाइड स्टोरी: खुदरा महंगाई पर सीधा असर, थाली से लेकर कपड़ों तक पहुंचेगी आंच
क्रिसिल की इस आर्थिक रिपोर्ट से मिले आंकड़ों के अनुसार, ईंधन की कीमतों में लगी यह आग सीधे आम जनता के बजट को बिगाड़ने वाली है:
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खुदरा महंगाई में उछाल: रिपोर्ट के मुताबिक, पेट्रोल-डीजल के दामों में 7.5 रुपये की बढ़ोतरी होने से ही रिटेल इन्फ्लेशन (खुदरा महंगाई) करीब 0.36 प्रतिशत बढ़ सकती है। अगर यह बढ़ोतरी 10 रुपये तक गई, तो खुदरा महंगाई में 0.48 प्रतिशत का सीधा इजाफा होगा।
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माल ढुलाई होगी महंगी: भारत में करीब 71 प्रतिशत माल की ढुलाई सड़क मार्ग के जरिए होती है। ट्रक और कमर्शियल वाहनों की कुल लागत का 42 प्रतिशत हिस्सा अकेले ईंधन पर खर्च होता है। डीजल महंगा होने से ट्रांसपोर्टर भाड़ा बढ़ाएंगे, जिससे फल, दूध, दालें, चाय-कॉफी, मसाले, अंडे और मछली जैसी रोजमर्रा की चीजें महंगी हो जाएंगी।
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कंपनियां बढ़ाएंगी दाम: केवल खाने-पीने की चीजें ही नहीं, बल्कि कपड़ा, इलेक्ट्रॉनिक्स, सीमेंट, रसायन और धातु उद्योगों में भी लागत बढ़ जाएगी। ऐसे में कंपनियां अपना नुकसान बचाने के लिए सामान के दाम बढ़ाएंगी या पैकेट के साइज को छोटा (क्वांटिटी में कटौती) कर देंगी।
रिजर्व बैंक की पैनी नजर, मानसून और अल नीनो का नया खतरा
क्रिसिल की इस रिपोर्ट ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के सामने भी एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। हालांकि, राहत की बात यह है कि वर्तमान में कुल महंगाई दर आरबीआई के 4 प्रतिशत के लक्ष्य से नीचे चल रही है और यह बैंक के सुरक्षित दायरे (2 से 6 प्रतिशत) के भीतर ही रहेगी। लेकिन आगे इसके तेजी से बढ़ने के पूरे आसार हैं।
2026 के इस दौर में, आरबीआई की नजर न केवल ईंधन की कीमतों पर है, बल्कि कमजोर मानसून और 'अल नीनो' (El Nino) जैसी मौसम संबंधी स्थितियों पर भी है। अगर मौसम के चलते फसलों को नुकसान हुआ और उधर पेट्रोल-डीजल के दाम भी बढ़ते रहे, तो खाद्य महंगाई को रोकना मुश्किल हो जाएगा। आने वाले महीनों में देखना होगा कि सरकार इस संकट से निपटने के लिए क्या कदम उठाती है, ताकि आम जनता को इस चौतरफा महंगाई की मार से बचाया जा सके।
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