Jamshedpur Internship Program : महिला यूनिवर्सिटी की छात्राओं के लिए विशेष इंटर्नशिप शुरू, अब किताबों से बाहर निकलकर सीखेंगी राजनीति और समाज का असली सच!
जमशेदपुर महिला विश्वविद्यालय की छात्राओं के लिए नेचर संस्था द्वारा शुरू किए गए दो महीने के विशेष इंटर्नशिप कार्यक्रम और बागबेड़ा में ग्रामीण प्रशासन की लाइव ट्रेनिंग की पूरी रिपोर्ट यहाँ देखें।
जमशेदपुर, 2 जून 2026 – लौह नगरी जमशेदपुर में उच्च शिक्षा को केवल क्लासरूम और किताबों तक सीमित न रखकर उसे समाज की जमीनी हकीकत से जोड़ने के लिए एक बहुत ही शानदार शुरुआत हुई है। नेचर (Nature) संस्था और बागबेड़ा स्थित अनुग्रह नारायण सिंह शिक्षण एवं सेवा संस्थान के साझा प्रयास से जमशेदपुर महिला विश्वविद्यालय (Jamshedpur Women's University) की छात्राओं के लिए एक विशेष इंटर्नशिप कार्यक्रम का भव्य उद्घाटन किया गया है। यह पूरा प्रोग्राम प्राध्यापक और जिला पार्षद डॉ. कविता परमार के नेतृत्व में चलाया जा रहा है, जिसमें राजनीति विज्ञान, हिंदी, इतिहास, भूगोल और समाजशास्त्र जैसे कई विषयों की छात्राएं शामिल हैं। दो महीने तक चलने वाले इस खास व्यावहारिक प्रशिक्षण के दौरान बेटियां गांवों में जाकर पंचायती राज व्यवस्था, लोकल एडमिनिस्ट्रेशन और ग्रामीण संस्कृति को करीब से समझेंगी और उन पर रिसर्च करेंगी।
इंटर्नशिप की इनसाइड स्टोरी: बागबेड़ा के गांवों का दौरा और लोकजीवन पर रिपोर्ताज
अनुग्रह नारायण सिंह संस्थान के परिसर में आयोजित इस उद्घाटन समारोह का शुभारंभ प्रोफेसर रंजीत प्रसाद, प्रोफेसर अशोक अविचल और डॉ. कविता परमार समेत कई गणमान्य लोगों ने दीप जलाकर किया। इस इंटर्नशिप की रूपरेखा बेहद दिलचस्प है:
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राजनीति की व्यावहारिक समझ: राजनीति विज्ञान की छात्राएं सीधे गांवों का रुख करेंगी। वे बागबेड़ा और उसके आस-पास की पंचायतों का दौरा करके त्रि-स्तरीय पंचायती राज (ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद) के काम करने के तरीके को देखेंगी। छात्राएं सीधे मुखिया, वार्ड मेंबरों और महिला स्वयं सहायता समूहों (SHG) से मिलकर उनकी चुनौतियों पर बात करेंगी।
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साहित्य और पत्रकारिता का संगम: हिंदी विषय की छात्राओं को इस दौरान कहानी, कविता, संगोष्ठी पत्रकारिता और रिपोर्ताज लेखन की लाइव ट्रेनिंग दी जाएगी। ये छात्राएं ग्रामीण समाज, लोकगीतों, जनजातीय परंपराओं और महिला सशक्तिकरण जैसे विषयों पर ग्राउंड डेटा इकट्ठा कर उनका दस्तावेजीकरण (Documentation) करेंगी।
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विशेषज्ञों की पाठशाला: इसके साथ ही संस्थान में विशेष क्लास भी लगेंगी, जहाँ एक्सपर्ट्स आकर छात्राओं को सतत विकास, सोशल जस्टिस, लोकतांत्रिक सहभागिता और रिसर्च करने के सही तरीकों के बारे में विस्तार से बताएंगे।
उद्घाटन के मौके पर डॉ. कविता परमार ने बेहद सटीक बात कही कि शिक्षा का असली मतलब सिर्फ डिग्री लेना नहीं, बल्कि समाज की जमीनी सच्चाइयों से रूबरू होना है। ग्रामीण समाज ही हमारे देश की आत्मा है, और जब यूनिवर्सिटी की छात्राएं इन व्यवस्थाओं को खुद अपनी आंखों से काम करते हुए देखेंगी, तो उनमें कमाल का लीडरशिप स्किल, संवाद कौशल और सामाजिक संवेदनशीलता पैदा होगी।
2026 के इस आधुनिक और डिजिटल युग में, जहाँ युवा वर्ग जमीनी मुद्दों से कटकर सोशल मीडिया की आभासी दुनिया में खोया रहता है, वहाँ दो महीने का यह फील्डवर्क इन छात्राओं के व्यक्तिगत और करियर विकास के लिए एक बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित होने वाला है। प्रोफेसर अशोक अविचल और प्रोफेसर रंजीत प्रसाद ने भी छात्राओं का हौसला बढ़ाते हुए उन्हें इस मौके का पूरा फायदा उठाने और प्रभावशाली लोगों से खुलकर संवाद करने की सलाह दी है। उम्मीद है कि इस इंटर्नशिप से निकलने वाली रिपोर्ट्स आने वाले समय में कोल्हान की ग्रामीण समस्याओं को सुलझाने में प्रशासन के लिए एक मजबूत गाइड का काम करेंगी।
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