Ranchi Bribery: घूसखोर दारोगा की जेल में कटेगी रातें, कोर्ट ने जमानत अर्जी की खारिज, 50 हजार की डिमांड और 10 हजार की घूस ने डुबोई श्याम नंदन की वर्दी
एसीबी के जाल में फंसे दारोगा श्याम नंदन पासवान की जमानत याचिका कोर्ट ने खारिज कर दी है। एमवीआई जांच के नाम पर 50 हजार की रिश्वत मांगने और रंगे हाथों पकड़े जाने के इस हाई-प्रोफाइल भ्रष्टाचार मामले की पूरी कानूनी रिपोर्ट यहाँ मौजूद है वरना आप भी पुलिसिया तंत्र में फैले इस घूसखोरी के मकड़जाल की हकीकत जानने से चूक जाएंगे।
रांची, 23 जनवरी 2026 – भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए एसीबी (ACB) की विशेष अदालत ने आरोपी दारोगा श्याम नंदन पासवान को करारा झटका दिया है। 10 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किए गए दारोगा की जमानत याचिका अदालत ने सिरे से खारिज कर दी है। बेड़ो थाना क्षेत्र में तैनात इस दारोगा पर एक ट्रक दुर्घटना के बाद जांच के नाम पर मोटी रकम वसूलने का संगीन आरोप है। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि वर्दी की आड़ में भ्रष्टाचार करने वालों के खिलाफ साक्ष्य बेहद मजबूत हैं और ऐसे गंभीर मामलों में फिलहाल कोई राहत नहीं दी जा सकती।
50 हजार की डिमांड और 10 हजार का 'ट्रैप'
यह पूरा मामला एक 12 चक्का ट्रक की दुर्घटना से शुरू हुआ था। भ्रष्टाचार की यह कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है:
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हादसे का फायदा: बेड़ो थाना क्षेत्र में एक ट्रक दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। नियमानुसार, कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए मोटर वाहन निरीक्षक (MVI) की जांच अनिवार्य थी।
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सौदेबाजी: आरोप है कि दारोगा श्याम नंदन पासवान ने इस सामान्य सी जांच प्रक्रिया को कराने के बदले ट्रक चालक से 50 हजार रुपये की मांग की थी।
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एसीबी का जाल: जब ट्रक चालक ने पैसे देने में असमर्थता जताई, तो दारोगा ने उसे केस में फंसाने की धमकी दी। परेशान होकर चालक ने एसीबी से गुहार लगाई। 9 जनवरी को एसीबी ने जाल बिछाया और जैसे ही दारोगा ने रिश्वत की पहली किस्त के रूप में 10 हजार रुपये पकड़े, उसे गिरफ्तार कर लिया गया।
कोर्ट की फटकार: "आरोप गंभीर, राहत नामुमकिन"
दारोगा ने 13 जनवरी को अदालत में दलील दी थी कि उसे साजिश के तहत फंसाया गया है। लेकिन एसीबी की विशेष अदालत ने केस डायरी के अवलोकन के बाद इसे खारिज कर दिया।
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मजबूत साक्ष्य: अदालत ने माना कि प्रथम दृष्टया आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत पर्याप्त सबूत मौजूद हैं।
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जांच में सहयोग का दावा फेल: हालांकि आरोपी ने कहा कि वह जांच में सहयोग करेगा, लेकिन कोर्ट ने अपराध की प्रकृति को देखते हुए उसे जेल में ही रखने का फैसला सुनाया।
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वर्दी पर दाग: अदालत की इस सख्ती से उन पुलिसकर्मियों में खलबली मच गई है जो जनता की मजबूरी का फायदा उठाकर अपनी जेबें भरते हैं।
केस फाइल: दारोगा श्याम नंदन पासवान (Case Profile)
| विवरण | जानकारी (Details) |
| आरोपी | श्याम नंदन पासवान (दारोगा, बेड़ो थाना) |
| रिश्वत की कुल मांग | 50,000 रुपये |
| रंगे हाथों गिरफ्तारी | 10,000 रुपये लेते हुए (9 जनवरी) |
| शिकायत का आधार | ट्रक की एमवीआई (MVI) जांच कराने के नाम पर |
| वर्तमान स्थिति | जमानत याचिका खारिज, न्यायिक हिरासत में |
इतिहास का पन्ना: भ्रष्टाचार के खिलाफ 'एसीबी' और झारखंड पुलिस का दागदार अतीत
झारखंड के प्रशासनिक इतिहास में भ्रष्टाचार और पुलिसिया वसूली का मुद्दा नया नहीं है। 1990 के दशक में जब झारखंड बिहार का हिस्सा था, तब सड़कों पर 'एंट्री' और 'चेकपोस्ट' वसूली के किस्से आम थे। इतिहास गवाह है कि साल 2000 में झारखंड राज्य बनने के बाद भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) को अधिक शक्तियां दी गईं ताकि सरकारी तंत्र को साफ किया जा सके। पुराने रिकॉर्ड बताते हैं कि झारखंड में पुलिस विभाग के छोटे स्तर के अधिकारियों से लेकर कई बड़े नाम भी एसीबी के रडार पर रहे हैं। बेड़ो थाना जैसे ग्रामीण इलाकों में 'दुर्घटनाग्रस्त वाहनों' से वसूली करना एक पुराना ऐतिहासिक मर्ज रहा है। श्याम नंदन पासवान का यह मामला उसी 'सिस्टम' की उपज है जिसे खत्म करने के लिए 2026 में कोर्ट अब बेहद सख्त रुख अपना रही है।
ट्रक चालकों में खुशी, विभाग में हड़कंप
एसीबी की इस कार्रवाई और कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए स्थानीय ट्रांसपोर्टर्स ने इसे इंसाफ की जीत बताया है।
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धमकी का दौर खत्म: शिकायतकर्ता ने बताया कि पैसे न देने पर उसे करियर तबाह करने की धमकी दी जा रही थी।
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विभागीय कार्रवाई: गिरफ्तारी के बाद अब विभागीय स्तर पर भी श्याम नंदन पासवान पर बर्खास्तगी की तलवार लटक रही है।
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जनता का भरोसा: एसीबी ने अपील की है कि अगर कोई भी सरकारी कर्मचारी काम के बदले पैसे मांगे, तो डरे नहीं और तुरंत सूचित करें।
कानून के हाथ लंबे हैं
श्याम नंदन पासवान का मामला उन सभी के लिए एक चेतावनी है जो कानून की रक्षा करने की शपथ लेकर कानून तोड़ते हैं। कोर्ट के इस फैसले ने साफ कर दिया है कि भ्रष्टाचार के दलदल में धंसी वर्दी को अब कोई राहत नहीं मिलेगी।
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