Tarique Rahman PM Bangladesh : बांग्लादेश में 'बेगमों की जंग' खत्म, 17 साल का वनवास काट तारिक रहमान बने प्रधानमंत्री
बांग्लादेश की राजनीति में दशकों पुराना 'बेगमों का युद्ध' अब समाप्त हो गया है। 17 साल बाद वतन वापसी कर तारिक रहमान के प्रधानमंत्री बनने और भारत के लोकसभा स्पीकर ओम बिरला की मौजूदगी के पीछे छिपे बड़े कूटनीतिक संदेश की पूरी रिपोर्ट यहाँ मौजूद है वरना आप पड़ोसी देश के इस ऐतिहासिक बदलाव के असली मायने मिस कर देंगे।
ढाका/नई दिल्ली, 17 फरवरी 2026 – पड़ोसी देश बांग्लादेश के इतिहास में आज एक नया अध्याय जुड़ गया है। 'बेगमों की लड़ाई' के रूप में मशहूर शेख हसीना और खालिदा जिया के दशकों पुराने राजनीतिक वर्चस्व के बाद, अब सत्ता की कमान एक पुरुष प्रधानमंत्री के हाथ में आ गई है। बांग्लादेश नेशनल पार्टी (BNP) के चीफ तारिक रहमान ने मंगलवार को देश के नए प्रधानमंत्री के तौर पर शपथ ली। 17 साल के लंबे देश निकाला और निर्वासन के बाद रहमान की यह वापसी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। ढाका के जातीय संसद भवन में हुए इस भव्य समारोह ने न केवल बांग्लादेश, बल्कि पूरे दक्षिण एशिया की भू-राजनीति में हलचल पैदा कर दी है।
ऐतिहासिक शपथ ग्रहण: 35 साल बाद बदला 'जेंडर' पैटर्न
राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने जातीय संसद भवन के साउथ प्लाजा में आयोजित समारोह में तारिक रहमान को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई।
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भारी बहुमत: 300 सदस्यों वाली संसद में BNP ने अकेले 151 से ज्यादा सीटें जीतीं, जबकि उनके गठबंधन को कुल 212 सीटें मिली हैं।
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मंत्रिमंडल का चेहरा: नई सरकार में 25 कैबिनेट और 24 राज्य मंत्रियों को शामिल किया जा रहा है। खास बात यह है कि अल्पसंख्यकों को भरोसा देने के लिए मंत्रिमंडल में एक हिंदू मंत्री को भी जगह दी गई है।
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बड़ा बदलाव: तारिक रहमान पिछले 35 सालों में बांग्लादेश के पहले पुरुष प्रधानमंत्री हैं। इससे पहले सत्ता केवल शेख हसीना और खालिदा जिया के इर्द-गिर्द घूमती थी।
भारत की मौजूदगी: ओम बिरला का शामिल होना एक बड़ा संकेत
इस शपथ ग्रहण समारोह में भारत की ओर से लोकसभा स्पीकर ओम बिरला की उपस्थिति ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिज्ञों का ध्यान खींचा है। शेख हसीना के जाने के बाद भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में जो अनिश्चितता देखी जा रही थी, वहां भारत का यह कदम नई सरकार के साथ रिश्तों को पटरी पर लाने का एक मजबूत संकेत माना जा रहा है।
तारिक सरकार: सत्ता का नया समीकरण (Power Structure)
| विवरण | प्रमुख जानकारी (Key Highlights) |
| प्रधानमंत्री | तारिक रहमान (खालिदा जिया के पुत्र) |
| गठबंधन की सीटें | 212 (कुल 300 में से) |
| निर्वासन काल | 17 साल (12 फरवरी 2026 को हुई जीत) |
| भारतीय प्रतिनिधि | ओम बिरला (लोकसभा स्पीकर) |
| कैबिनेट का स्वरूप | समावेशी (हिंदू मंत्री सहित 49 सदस्य) |
चुनौतियां और उम्मीदें: क्या बदलेगा बांग्लादेश?
तारिक रहमान के सामने सबसे बड़ी चुनौती देश की डगमगाती अर्थव्यवस्था को संभालना और भारत के साथ बिगड़े हुए कूटनीतिक संतुलन को सुधारना है। जानकारों का मानना है कि तारिक का पांच साल का कार्यकाल यह तय करेगा कि बांग्लादेश 'इस्लामिक कट्टरपंथ' की ओर झुकेगा या एक आधुनिक लोकतांत्रिक राष्ट्र के रूप में उभरेगा।
दक्षिण एशिया में नई बिसात
शेख हसीना युग के अंत और तारिक रहमान के उदय ने दक्षिण एशिया में शक्ति संतुलन को बदल दिया है। भारत के लिए यह 'वेट एंड वॉच' की स्थिति है, लेकिन ओम बिरला को भेजकर नई दिल्ली ने अपने पत्ते साफ कर दिए हैं।
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