Valentine Week: प्यार का हफ्ता शुरू, गुलाब की खुशबू से महका बाजार, संत वैलेंटाइन की वो अधूरी कहानी जिसने दुनिया को प्रेम करना सिखाया
वैलेंटाइन वीक का आगाज 7 फरवरी से हो चुका है। रोम के उस पादरी की खौफनाक कुर्बानी और सात दिनों के इस रोमांटिक सफर की पूरी दास्तां यहाँ मौजूद है वरना आप प्यार के इस त्योहार के पीछे छिपे असली बलिदान और इतिहास से अनजान रह जाएंगे।
नई दिल्ली/रोम, 7 फरवरी 2026 – फरवरी का महीना फिजाओं में प्यार की खुशबू लेकर आता है। आज 7 फरवरी है, यानी प्यार करने वालों के लिए साल का सबसे खास हफ्ता 'वैलेंटाइन वीक' शुरू हो चुका है। दुनिया भर के प्रेमी जोड़े इन सात दिनों को अलग-अलग अंदाज में सेलिब्रेट करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जिस दिन को आप गुलाब, चॉकलेट और टेडी बियर के साथ मना रहे हैं, उसकी शुरुआत एक खूनी संघर्ष और महान बलिदान से हुई थी? आइए जानते हैं सात दिनों का ये पूरा कैलेंडर और उस पादरी की कहानी जिसने प्यार के लिए अपनी जान दे दी।
7 से 14 फरवरी: प्यार के सात पड़ाव
वैलेंटाइन वीक का हर दिन एक नई भावना और इजहार का मौका लेकर आता है।
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7 फरवरी (रोज डे): आज के दिन कपल्स एक-दूसरे को लाल गुलाब देकर अपने प्यार का इजहार कर रहे हैं। लाल गुलाब को दिल की धड़कन और गहरे प्रेम का प्रतीक माना जाता है।
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8 फरवरी (प्रपोज डे): यह दिन उन लोगों के लिए है जो अपने दिल की बात जुबां पर लाने का इंतजार कर रहे हैं।
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9 फरवरी (चॉकलेट डे): रिश्तों में मिठास घोलने के लिए प्रेमी एक-दूसरे को खास चॉकलेट्स गिफ्ट करते हैं।
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10 फरवरी (टेडी डे): मासूमियत और कोमलता का एहसास कराने के लिए इस दिन पार्टनर को टेडी बियर दिया जाता है।
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11 फरवरी (प्रॉमिस डे): यह दिन सबसे गंभीर होता है, जहाँ साथ जीने-मरने और हमेशा साथ निभाने की कसमें खाई जाती हैं।
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12 और 13 फरवरी (हग और किस डे): ये दिन अपनेपन और शारीरिक सामीप्य के जरिए प्यार को गहराई देने के लिए मनाए जाते हैं।
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14 फरवरी (वैलेंटाइन डे): आखिर में आता है वो मुख्य दिन, जब पूरी दुनिया प्रेम का जश्न मनाती है।
वैलेंटाइन डे का इतिहास आधुनिक कम और ऐतिहासिक रूप से अधिक गहरा है। इसकी जड़ें तीसरी शताब्दी के रोम देश से जुड़ी हैं। 'ऑरिया ऑफ जैकोबस डी वॉरिजन' नाम की प्राचीन पुस्तक के अनुसार, उस दौर में संत वैलेंटाइन नाम के एक पादरी हुआ करते थे। वे मानवता और प्रेम के कट्टर समर्थक थे।
इतिहास गवाह है कि उस समय रोम का राजा क्लॉडियस एक अत्यंत क्रूर और सनकी शासक था। उसका मानना था कि प्रेम और विवाह करने से सैनिकों की बुद्धि और शक्ति कम हो जाती है, वे अपने लक्ष्य से भटक जाते हैं। इसी सोच के कारण क्लॉडियस ने पूरे रोम में सैनिकों के विवाह पर प्रतिबंध लगा दिया था।
संत वैलेंटाइन को यह अन्याय बर्दाश्त नहीं हुआ। उन्होंने राजा के आदेश को चुनौती देते हुए चोरी-छिपे सैनिकों और अधिकारियों का विवाह करवाना शुरू कर दिया। जब क्लॉडियस को इस 'बगावत' का पता चला, तो वह आगबबूला हो गया। उसने संत वैलेंटाइन को गिरफ्तार कर लिया और 269 ईसा पूर्व में 14 फरवरी के दिन उन्हें फांसी पर चढ़ा दिया। फांसी से पहले वैलेंटाइन ने जेलर की अंधी बेटी को अपनी आंखें दान की थीं और एक पत्र छोड़ा था, जिस पर लिखा था— 'फ्रॉम योर वैलेंटाइन'। उसी दिन से उनकी याद में हर साल 14 फरवरी को प्रेम दिवस मनाया जाने लगा।
रोम से पूरी दुनिया तक का सफर
रोम की गलियों से शुरू हुई यह परंपरा आज एक वैश्विक संस्कृति बन चुकी है। 19वीं और 20वीं शताब्दी के दौरान इंग्लैंड और अमेरिका में ग्रीटिंग कार्ड्स के जरिए इसे और लोकप्रियता मिली। आज यह व्यापारिक रूप से भी एक बड़ा अवसर है, जहाँ करोड़ों का कारोबार होता है, लेकिन इसकी मूल भावना आज भी वही 'त्याग' है जो संत वैलेंटाइन ने सिखाया था।
केवल गिफ्ट नहीं, जज्बात का है नाम
वैलेंटाइन वीक केवल महंगे तोहफे देने का जरिया नहीं है, बल्कि यह उस पादरी को याद करने का दिन भी है जिसने समाज में प्रेम की स्थापना के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी। तो इस बार जब आप अपने पार्टनर को गुलाब दें, तो उस 'वैलेंटाइन' की कुर्बानी को भी जरूर याद करें।
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