Aligarh Workshop: सुनहरा मौका, हिंदी बदल देगी आपकी किस्मत, डिजिटल युग में रोजगार का पिटारा खुला, अलीगढ़ में हुआ बड़ा खुलासा
क्षेत्रीय यूनानी चिकित्सा अनुसंधान संस्थान, अलीगढ़ में 'डिजिटल युग और हिंदी' पर हुए इस विशेष मंथन ने युवाओं के लिए तरक्की के नए रास्ते खोल दिए हैं। यूट्यूब, ब्लॉगिंग और विज्ञापन की दुनिया में हिंदी के जरिए लाखों के पैकेज और करियर बनाने के गुप्त मंत्रों की पूरी रिपोर्ट यहाँ दी गई है वरना आप भी आधुनिक दौर के इस सबसे बड़े अवसर से हमेशा अनजान रह जाएंगे।
अलीगढ़, 14 जनवरी 2026 – क्या आप जानते हैं कि जिस हिंदी को हम केवल बातचीत का माध्यम समझते हैं, वह आज की डिजिटल क्रांति में 'डॉलर' और 'रोजगार' बरसाने वाली भाषा बन चुकी है? 13 जनवरी 2026 को अलीगढ़ स्थित क्षेत्रीय यूनानी चिकित्सा अनुसंधान संस्थान के सभागार में आयोजित तृतीय एक दिवसीय हिंदी कार्यशाला में इसी कड़वे मगर मीठे सच से पर्दा उठाया गया। उप निदेशक (प्रभारी) डॉ. सय्यद अब्बास हैदर ज़ैदी की अगुवाई में आयोजित इस कार्यशाला का विषय था— 'संचार क्रांति एवं डिजिटल युग में हिंदी भाषा और रोज़गार'। इस कार्यक्रम ने न केवल संस्थान के कर्मचारियों को प्रेरित किया, बल्कि यह भी साबित कर दिया कि इंटरनेट के दौर में हिंदी अब केवल भावनाओं की नहीं, बल्कि प्रोफेशनल्स की पहली पसंद बन गई है।
डिजिटल इंडिया का जादू: जब मुट्ठी में आई दुनिया
मुख्य अतिथि के रूप में पधारे अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) के हिंदी विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. गुलाम फरीद साबरी ने अपने वक्तव्य से सबको सोचने पर मजबूर कर दिया।
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बदलता भारत: डॉ. साबरी ने कहा कि पिछले दो दशकों में भारत ने संचार के क्षेत्र में जो छलांग लगाई है, वह अकल्पनीय है। 2015 में शुरू हुआ 'डिजिटल इंडिया' अभियान आज हमारे जीवन की धड़कन बन चुका है।
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शिक्षा हुई सुलभ: आज मोबाइल और इंटरनेट की बदौलत 'मूक्स' (MOOCs) जैसे पाठ्यक्रमों ने शिक्षा को अमीरों के महलों से निकालकर गरीबों की झोपड़ी तक पहुँचा दिया है। अब ज्ञान के लिए किसी बड़े शहर जाने की जरूरत नहीं, बस एक क्लिक काफी है।
हिंदी में छप्परफाड़ रोज़गार: कहाँ हैं मौके?
कार्यशाला में सबसे ज्यादा चर्चा हिंदी के जरिए मिलने वाले करियर विकल्पों पर हुई। डॉ. साबरी ने स्पष्ट किया कि यदि आप हिंदी जानते हैं, तो आप बेरोजगार नहीं रह सकते।
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डिजिटल कंटेंट क्रिएशन: यूट्यूब (YouTube), इंस्टाग्राम रील्स और ब्लॉगिंग के क्षेत्र में हिंदी यूजर्स की बाढ़ आई हुई है। कंपनियों को ऐसे लेखकों की जरूरत है जो जनता की भाषा में बात कर सकें।
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अनुवाद और शिक्षण: ई-कॉमर्स वेबसाइट्स से लेकर मल्टीनेशनल कंपनियों तक को हिंदी अनुवादकों की भारी मांग है।
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मीडिया और विज्ञापन: विज्ञापन की दुनिया में 'स्लोगन' लिखने से लेकर स्क्रिप्ट राइटिंग तक, हिंदी का दबदबा कायम है।
हिंदी कार्यशाला: एक नज़र में (Workshop Snapshot)
| विवरण | जानकारी (Details) |
| आयोजक | क्षेत्रीय यूनानी चिकित्सा अनुसंधान संस्थान, अलीगढ़ |
| विषय | संचार क्रांति, डिजिटल युग और हिंदी रोज़गार |
| मुख्य अतिथि | डॉ. गुलाम फरीद साबरी (सहायक प्राध्यापक, AMU) |
| मार्गदर्शन | डॉ. सय्यद अब्बास हैदर ज़ैदी (उप निदेशक) |
| संचालन | श्री परवेज़ अहमद (हिंदी अधिकारी) |
सराहनीय योगदान: टीम वर्क से मिली सफलता
इस कार्यशाला को सफल बनाने में संस्थान के कई अधिकारियों और कर्मचारियों ने दिन-रात एक कर दिया।
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कुशल संचालन: श्री परवेज़ अहमद (हिंदी अधिकारी) ने न केवल कार्यक्रम का संचालन किया, बल्कि डिजिटल युग में हिंदी के महत्व पर भी प्रकाश डाला।
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समर्पित टीम: मोहम्मद जाहिद अंसारी (इन्वेस्टिगेटर), डॉ. आर.एस. वर्मा (अनुसंधान अधिकारी), श्री रिज़वानुद्दीन (J.A.O.) और श्रीमती फरहा खानम (हिंदी सदस्य) के योगदान को डॉ. ज़ैदी ने खूब सराहा।
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उपस्थिति: संस्थान के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों ने व्याख्यान में गहरी रुचि दिखाई और यह संकल्प लिया कि वे अपने दैनिक सरकारी कार्यों में अधिक से अधिक हिंदी का उपयोग करेंगे।
हिंदी को जीवन में उतारें
कार्यशाला का सार यही था कि हिंदी अब केवल साहित्य की भाषा नहीं रह गई है, बल्कि यह तकनीक और तकनीक से जुड़े रोजगार की वैश्विक भाषा बन चुकी है। डॉ. साबरी के शब्दों में— "हिंदी को केवल दिवसों तक सीमित न रखें, इसे अपने दैनिक डिजिटल व्यवहार में उतारें।"
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