Chatra Accident: टायर फटते ही बेकाबू होकर पलटी स्लीपर बस, गया से रायपुर जा रहे 12 यात्री लहूलुहान
चतरा-डोभी मार्ग पर टायर फटने से रायपुर जा रही स्लीपर बस पलट गई है। हादसे में जहानाबाद और गया के यात्रियों सहित 12 लोग घायल हुए हैं। मोरैंवा टोल प्लाजा के पास मची इस चीख-पुकार और रेस्क्यू ऑपरेशन की पूरी रिपोर्ट यहाँ मौजूद है।
चतरा, 2 मार्च 2026 – झारखंड के चतरा जिले में सोमवार को एक बड़ा सड़क हादसा सामने आया है। बिहार के गया (डुमरिया) से छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर जा रही एक हाई-स्पीड स्लीपर बस एनएच-22 पर बेकाबू होकर पलट गई। यह दर्दनाक घटना चतरा-डोभी मुख्य मार्ग पर मोरैंवा टोल प्लाजा से महज एक किलोमीटर पहले घटित हुई। बस के पलटते ही यात्रियों में चीख-पुकार मच गई। गनीमत यह रही कि इस भीषण दुर्घटना में किसी की जान नहीं गई, लेकिन एक दर्जन से अधिक यात्री गंभीर रूप से घायल हुए हैं।
धमाके के साथ फटा टायर: चश्मदीदों ने बताया आंखों देखा हाल
हादसा इतना अचानक था कि चालक को संभलने का मौका तक नहीं मिला। बस में सवार यात्री अनुज कुमार और अन्य चश्मदीदों के अनुसार:
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रफ़्तार और ब्लास्ट: बस काफी तेज रफ्तार में थी। जैसे ही वाहन घाटी क्षेत्र में पहुँचा, अचानक बस का अगला टायर एक जोरदार धमाके के साथ फट गया।
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अनियंत्रित हुई बस: टायर ब्लास्ट होते ही स्टेयरिंग ने काम करना बंद कर दिया और स्लीपर बस सड़क किनारे पलट गई।
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घायलों की स्थिति: दुर्घटना में लगभग 12 यात्री घायल हुए हैं। कई यात्रियों के हाथ और पैर में गंभीर फ्रैक्चर की आशंका है, जिससे उनकी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
रेस्क्यू ऑपरेशन: पूर्व मंत्री और पुलिस पहुँचे अस्पताल
घटना की सूचना मिलते ही चतरा थाना प्रभारी अवधेश सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुँचे। स्थानीय ग्रामीणों की मदद से बस के शीशे तोड़कर घायलों को बाहर निकाला गया।
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अस्पताल में भर्ती: गंभीर रूप से घायल 5 यात्रियों को चतरा सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वहीं, एक यात्री की नाजुक हालत को देखते हुए उसे बेहतर इलाज के लिए हजारीबाग मेडिकल अस्पताल रेफर किया गया है।
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नेताओं का दौरा: घटना की जानकारी मिलते ही पूर्व मंत्री सत्यानंद भोक्ता भी सदर अस्पताल पहुँचे और घायलों व उनके परिजनों से मुलाकात कर ढांढस बंधाया।
एनएच-22 और चतरा घाटी का इतिहास: जोखिम भरा सफर
चतरा और गया को जोड़ने वाला यह मार्ग (NH-22) ऐतिहासिक रूप से व्यापार और आवागमन का मुख्य जरिया रहा है। 18वीं और 19वीं शताब्दी में यह मार्ग घने जंगलों और पहाड़ियों के बीच एक संकरा रास्ता हुआ करता था। समय के साथ इसे नेशनल हाईवे का दर्जा मिला, लेकिन यहाँ की भौगोलिक संरचना (तीखे मोड़ और ढलान) आज भी ड्राइवरों के लिए चुनौती बनी हुई है।
इतिहास गवाह है कि चतरा की इन घाटियों में टायर फटने या ब्रेक फेल होने के कारण पहले भी कई बड़े बस हादसे हुए हैं। 2026 की यह घटना एक बार फिर लंबी दूरी की बसों की मैकेनिकल फिटनेस और हाईवे पर स्पीड लिमिट के पालन पर बड़े सवाल खड़े करती है।
घायलों की पहचान: बिहार और झारखंड के यात्री शामिल
अस्पताल प्रशासन ने घायलों की सूची जारी की है, जिनमें ज्यादातर यात्री बिहार के रहने वाले हैं:
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राकेश कुमार: जहानाबाद निवासी।
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रंधीर कुमार: वजीरगंज (गया) निवासी।
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संजीत कुमार: डुमरिया (गया) निवासी।
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सुजीत, कमलेश और अमृत कुमार: चतरा और स्थानीय क्षेत्रों के निवासी।
यातायात बहाल: क्रेन से सीधी की गई बस
हादसे के बाद एनएच-22 पर कुछ समय के लिए जाम की स्थिति बन गई थी। थाना प्रभारी ने बताया कि क्रेन मंगाकर पलटी हुई बस को सड़क से हटाया गया है ताकि रायपुर और गया की ओर जाने वाले अन्य वाहनों को रास्ता मिल सके। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि क्या बस की समय पर मेंटेनेंस हुई थी या फिर यह केवल एक दुर्भाग्यपूर्ण दुर्घटना थी।
सावधानी ही बचाव है
फिलहाल सभी घायलों के परिजनों को सूचित कर दिया गया है। चतरा पुलिस ने वाहन चालकों को सलाह दी है कि घाटी वाले क्षेत्रों में रफ़्तार कम रखें और पुराने टायरों के साथ लंबी दूरी का सफर तय न करें। प्रशासन की सतर्कता से एक बड़ी जनहानि टल गई है, लेकिन यात्रियों के मन में बैठा यह खौफ आसानी से नहीं जाएगा।
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