Dollar Danger: ब्रिक्स के 'डिजिटल ब्रह्मास्त्र' से उड़े ट्रंप के होश, अब डॉलर के बिना होगा भारत-रूस और चीन का व्यापार, नया पेमेंट सिस्टम खत्म करेगा अमेरिका का दबदबा
ब्रिक्स देशों द्वारा डॉलर को मात देने के लिए तैयार किए गए 'डिजिटल पेमेंट सिस्टम' और डोनाल्ड ट्रंप की बढ़ती बेचैनी की पूरी एक्सक्लूसिव रिपोर्ट यहाँ मौजूद है। भारत के ई-रुपया और चीन के डिजिटल युआन के एक साथ आने से कैसे बदलेगी दुनिया की अर्थव्यवस्था, इसका पूरा विवरण विस्तार से पढ़िए वरना आप डॉलर के पतन की इस ऐतिहासिक खबर से चूक जाएंगे।
नई दिल्ली, 30 जनवरी 2026 – वैश्विक अर्थव्यवस्था (Global Economy) के मंच पर एक ऐसा महा-बदलाव होने जा रहा है, जिसने वॉशिंगटन से लेकर न्यूयॉर्क तक खलबली मचा दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तमाम धमकियों और 'टैरिफ वॉर' के बावजूद, भारत, रूस और चीन की अगुवाई वाला ब्रिक्स (BRICS) समूह अब डॉलर की बादशाहत को खत्म करने के सबसे करीब पहुँच गया है। इस साल भारत की मेजबानी में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले एक ऐसे 'साझा डिजिटल पेमेंट सिस्टम' का खाका तैयार कर लिया गया है, जो अंतरराष्ट्रीय व्यापार से डॉलर की जरूरत को ही खत्म कर देगा।
डॉलर नहीं, 'डिजिटल इंटीग्रेशन' है नया हथियार
ब्रिक्स देशों ने किसी नई साझा करेंसी (Common Currency) के झंझट में पड़ने के बजाय एक स्मार्ट रास्ता चुना है। अब भारत का ई-रुपया, चीन का डिजिटल युआन और रूस का डिजिटल रूबल एक साझा तकनीकी प्लेटफॉर्म पर एक साथ काम करेंगे।
-
स्विफ्ट (SWIFT) की छुट्टी: अब तक अंतरराष्ट्रीय लेनदेन के लिए डॉलर आधारित 'स्विफ्ट' सिस्टम पर निर्भर रहना पड़ता था, जिसे अमेरिका अक्सर प्रतिबंधों के हथियार के रूप में इस्तेमाल करता है। नया सिस्टम इसे पूरी तरह बाईपास कर देगा।
-
संप्रभुता बरकरार: इस सिस्टम की सबसे बड़ी खूबी यह है कि हर देश अपनी डिजिटल करेंसी पर पूरा नियंत्रण रखेगा, बस आपसी लेनदेन का 'पाइपलाइन' एक हो जाएगा।
भारत का 'UPI मॉडल' बनेगा दुनिया का आधार
इस पूरे प्रोजेक्ट में भारत एक 'गेम चेंजर' की भूमिका में है। भारत ने अपने UPI की सफलता से दुनिया को दिखा दिया है कि डिजिटल ट्रांजेक्शन कैसे क्रांतिकारी हो सकते हैं।
-
व्यावहारिक समाधान: रूस के साथ रुपये में व्यापार के दौरान आई समस्याओं (रुपये का सरप्लस जमा होना) से सबक लेते हुए भारत ने 'बहुपक्षीय सिस्टम' (Multilateral System) का सुझाव दिया है।
-
लागत में कमी: इस सिस्टम से ट्रांजेक्शन कॉस्ट करीब 40% से 50% तक कम होने की उम्मीद है, जिससे भारतीय निर्यातकों को सीधा फायदा होगा।
ब्रिक्स डिजिटल पेमेंट सिस्टम: कैसे काम करेगा यह जादुई चक्र? (Operational Model)
| तकनीकी पिलर | कार्यप्रणाली (How it works) | फायदा (Benefits) |
| सेटलमेंट साइकिल | महीने भर के आयात-निर्यात का नेट हिसाब | बार-बार भुगतान की जरूरत खत्म |
| फॉरेक्स स्वैप लाइन | सेंट्रल बैंकों के बीच करेंसी का सीधा विनिमय | डॉलर खरीदने की मजबूरी का अंत |
| इंटीग्रेटेड प्लेटफॉर्म | ई-रुपया + डिजिटल युआन + रूबल | इंस्टेंट और सुरक्षित पेमेंट |
ट्रंप की बेचैनी और अमेरिका का डर
डोनाल्ड ट्रंप का 'अमेरिका फर्स्ट' एजेंडा डॉलर की मजबूती पर टिका है। अगर ब्रिक्स देश अपने व्यापार से डॉलर को बाहर कर देते हैं, तो अमेरिका के लिए अपने भारी कर्ज को मैनेज करना मुश्किल हो जाएगा। इसीलिए ट्रंप बार-बार ब्रिक्स देशों को चेतावनी देते रहे हैं। लेकिन भारत की मेजबानी में हो रही यह चर्चा संकेत दे रही है कि अब दुनिया 'डीडॉलराइजेशन' (De-dollarization) की राह पर चल पड़ी है।
एक नए आर्थिक युग का उदय
ब्रिक्स का यह नया डिजिटल पेमेंट सिस्टम केवल पैसों के लेनदेन का जरिया नहीं है, बल्कि यह पश्चिम के आर्थिक वर्चस्व के खिलाफ एक बड़ा भू-राजनीतिक (Geopolitical) बयान है। भारत इसमें संतुलन बनाने वाले 'धुरी' की तरह काम कर रहा है।
What's Your Reaction?


