Om Birla : स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव, 118 सांसदों ने घेरा, प्रियंका गांधी का बड़ा हमला- 'सरकार के दबाव में हैं अध्यक्ष'
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ कांग्रेस के अविश्वास प्रस्ताव और सदन में मचे घमासान की पूरी इनसाइड स्टोरी यहाँ मौजूद है वरना आप प्रियंका गांधी के तीखे वार और स्पीकर को हटाने के कठिन संवैधानिक नियमों के सच से पूरी तरह अनजान रह जाएंगे।
नई दिल्ली, 10 फरवरी 2026 – भारतीय संसदीय लोकतंत्र के इतिहास में एक और बड़ा अध्याय जुड़ गया है। विपक्ष ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया है। कांग्रेस के नेतृत्व में लाए गए इस प्रस्ताव को 118 सांसदों का समर्थन प्राप्त है। विपक्ष का सीधा आरोप है कि स्पीकर का रवैया सत्तापक्ष के प्रति झुकाव वाला है और सदन में विपक्षी आवाज़ को बेरहमी से कुचला जा रहा है। राहुल गांधी के भाषण को बीच में रोकने और सांसदों के निलंबन ने इस आग में घी डालने का काम किया है।
प्रियंका गांधी का वार: "सरकार के दबाव में हैं स्पीकर"
प्रस्ताव पेश किए जाने के बाद कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने कड़े लहजे में स्पीकर और सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, "स्पीकर साहब का खुद निरादर किया गया है। उन पर सरकार का इतना भारी दबाव है कि उन्हें खुद अपनी सफाई देनी पड़ रही है, जो संसदीय मर्यादा के खिलाफ है।" प्रियंका ने यह भी दावा किया कि उस दिन प्रधानमंत्री मोदी की सदन में आने की हिम्मत नहीं हुई, इसलिए स्पीकर को उनके बचाव में उतरना पड़ा।
क्यों भड़की है अविश्वास की यह आग?
संसद में धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान उस वक्त विवाद बढ़ गया जब विपक्ष के नेता राहुल गांधी को अपना भाषण पूरा करने से रोक दिया गया। राहुल गांधी 'विप' के नेता नरवणे की किताब पर कुछ तथ्य रखना चाहते थे। इस मुद्दे पर हुए हंगामे के बाद कांग्रेस के 7 सांसदों सहित कुल 8 सांसदों को सदन से निलंबित कर दिया गया, जिसे विपक्ष ने 'तानाशाही' करार दिया है।
संवैधानिक प्रक्रिया: कैसे हटते हैं लोकसभा स्पीकर? (Rules Snapshot)
| नियम/अनुच्छेद | विवरण (Key Provisions) |
| अनुच्छेद 94 | स्पीकर को पद से हटाने की संवैधानिक शक्ति प्रदान करता है। |
| नोटिस की अवधि | प्रस्ताव लाने के लिए कम से कम 14 दिन का पूर्व नोटिस अनिवार्य है। |
| समर्थन | प्रस्ताव पर चर्चा के लिए कम से कम 50 सांसदों का लिखित समर्थन जरूरी है। |
| मतदान | सदन के तत्कालीन सदस्यों के बहुमत (Simple Majority) से पारित होना आवश्यक। |
| विशेष स्थिति | चर्चा के दौरान स्पीकर सदन की अध्यक्षता नहीं कर सकते। |
अब आगे क्या होगा?
नियमों के मुताबिक, लोकसभा महासचिव को नोटिस मिलने के बाद अब 14 दिनों का इंतजार करना होगा। इसके बाद ही सदन में चर्चा की तारीख तय होगी। यदि प्रस्ताव पर बहस होती है, तो सदन में पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी जुबानी जंग देखने को मिलेगी। प्रियंका गांधी के 'साजिश' वाले बयान ने पहले ही माहौल को गरमा दिया है।
सदन की गरिमा पर सवाल
ओम बिरला के खिलाफ लाया गया यह प्रस्ताव केवल एक प्रक्रिया नहीं, बल्कि सरकार और विपक्ष के बीच बढ़ती खाई का प्रतीक है। क्या विपक्ष 14 दिन बाद सदन में एकजुट रह पाएगा या यह प्रस्ताव भी इतिहास के उन पन्नों में दर्ज हो जाएगा जहाँ अब तक कोई भी स्पीकर अविश्वास से नहीं हारा है?
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