Dhanbad ACB Raid : 15 करोड़ का जमादार, रिटायर्ड सिपाही के पास मिली करोड़ों की दौलत
धनबाद में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए रिटायर्ड जमादार लालेश्वर सिंह को गिरफ्तार किया है। 15 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति और पूर्व केंद्रीय मंत्री से जुड़े इस हाई-प्रोफाइल केस की पूरी रिपोर्ट यहाँ मौजूद है।
धनबाद, 3 मार्च 2026 – कोयलांचल की धरती पर भ्रष्टाचार के खिलाफ अब तक की सबसे चौंकाने वाली कार्रवाई सामने आई है। धनबाद भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में एक सेवानिवृत्त जमादार (रिटायर्ड कांस्टेबल) को गिरफ्तार किया है। 63 वर्षीय लालेश्वर सिंह की गिरफ्तारी ने महकमे में हड़कंप मचा दिया है। एक मामूली पद पर तैनात रहे कर्मचारी के पास 15 करोड़ रुपये की बेहिसाब दौलत मिलना न केवल जांच का विषय है, बल्कि सिस्टम की कमियों पर भी बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है।
आधी रात को छापेमारी: हीरापुर आवास से गिरफ्तारी
एसीबी की टीम ने पूरी योजना के साथ सोमवार देर रात लालेश्वर सिंह के हीरापुर स्थित आलीशान आवास पर दबिश दी।
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साक्ष्यों की बरामदगी: छापेमारी के दौरान टीम को संपत्ति से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, निवेश के कागजात और बैंक डिटेल्स मिली हैं।
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वर्चस्व का अंत: घंटों चली तलाशी के बाद जब पुख्ता सबूत हाथ लगे, तब टीम ने लालेश्वर सिंह को हिरासत में ले लिया।
15 करोड़ का साम्राज्य: वेतन से कहीं ज्यादा दौलत
एसीबी अधिकारियों की शुरुआती जांच में जो आंकड़े सामने आए हैं, वे होश उड़ाने वाले हैं। आरोपी ने अपनी पूरी सेवा अवधि के दौरान वैध आय (सैलरी) से लगभग 15 करोड़ रुपये अधिक की संपत्ति खड़ी कर ली थी।
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अचल संपत्ति का जाल: सूत्रों के अनुसार, धनबाद के प्रमुख इलाकों में जमीन और मकानों के अलावा कई अन्य शहरों में भी निवेश के सुराग मिले हैं।
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हाई-प्रोफाइल कनेक्शन: बताया जा रहा है कि लालेश्वर सिंह पूर्व केंद्रीय मंत्री रीता वर्मा की सुरक्षा में गार्ड के रूप में भी तैनात रह चुके हैं। इस रसूख का इस्तेमाल उन्होंने अवैध संपत्ति बनाने में किया या नहीं, पुलिस इसकी गहराई से जांच कर रही है।
8 साल की लंबी जांच: 2016 से 2026 तक का सफर
यह गिरफ्तारी किसी अचानक हुई कार्रवाई का नतीजा नहीं है, बल्कि एक दशक लंबी चली कानूनी प्रक्रिया का परिणाम है:
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2016: भ्रष्टाचार की पहली शिकायत मिली और गोपनीय जांच शुरू हुई।
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2019: साक्ष्यों के आधार पर प्रारंभिक जांच (PE) दर्ज की गई।
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2020: जांच रिपोर्ट मुख्यालय को सौंपी गई, जिसमें करोड़ों की अवैध संपत्ति की पुष्टि हुई।
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2023: मुख्यालय से हरी झंडी मिलने के बाद औपचारिक प्राथमिकी (FIR) दर्ज हुई।
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2026: पर्याप्त सबूतों के आधार पर गिरफ्तारी सुनिश्चित की गई।
बीमार पड़े 'करोड़पति' जमादार: अस्पताल में भर्ती
गिरफ्तारी की खबर और एसीबी के शिकंजे ने आरोपी की सेहत पर भी असर डाला है।
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मेडिकल इमरजेंसी: हिरासत में लिए जाने के तुरंत बाद लालेश्वर सिंह ने बीपी और शुगर बढ़ने की शिकायत की।
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SNMMCH में इलाज: मानवीय आधार पर एसीबी टीम ने उन्हें शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (एसएनएमएमसीएच) में भर्ती कराया है। डॉक्टरों के अनुसार, उनका शुगर लेवल काफी बढ़ा हुआ है, इसलिए फिलहाल उन्हें मेडिकल ऑब्जर्वेशन में रखा गया है।
गिरफ्तारी का विवरण: एक नजर में
| विवरण | प्रमुख जानकारी |
| आरोपी | लालेश्वर सिंह (63 वर्ष), रिटायर्ड जमादार |
| आरोप | आय से अधिक संपत्ति (DA Case) |
| अनुमानित संपत्ति | ₹15 करोड़ (लगभग) |
| स्थान | हीरापुर, धनबाद |
अगला कदम: न्यायालय में पेशी
एसीबी की विशेष टीम अस्पताल में डॉक्टरों की रिपोर्ट का इंतजार कर रही है। जैसे ही डॉक्टरों से हरी झंडी मिलेगी, आरोपी को विशेष एसीबी कोर्ट में पेश किया जाएगा। सूत्रों का कहना है कि एसीबी रिमांड की मांग कर सकती है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस 15 करोड़ की काली कमाई के पीछे और कौन-कौन से बड़े चेहरे शामिल हैं।
भ्रष्टाचार पर कड़ा प्रहार
धनबाद के इस मामले ने यह साबित कर दिया है कि कानून के हाथ लंबे होते हैं। भले ही जांच में समय लगा हो, लेकिन 15 करोड़ की अवैध संपत्ति का मालिक अब सलाखों के पीछे जाने को तैयार है। कोयलांचल में सक्रिय अन्य 'सफेदपोश' भ्रष्टाचारियों के बीच इस कार्रवाई से दहशत का माहौल है।
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