India Breakdown: कल ओला-उबर और रेपिडो का चक्का जाम, देशभर में ड्राइवर्स की महाहड़ताल, घर से निकलने से पहले जान लें 'ऑल इंडिया ब्रेकडाउन' का सच
कल 7 फरवरी को देशभर में ओला, उबर और रेपिडो की सेवाएं ठप रहने वाली हैं। ड्राइवर्स के 'ऑल इंडिया ब्रेकडाउन' आंदोलन और कैब-ऑटो की किल्लत से जुड़ी हर बड़ी जानकारी यहाँ मौजूद है वरना आप कल दफ्तर या एयरपोर्ट जाने के लिए घंटों परेशान हो सकते हैं।
नई दिल्ली/हैदराबाद, 6 फरवरी 2026 – अगर आप कल यानी शनिवार, 7 फरवरी को कहीं जाने के लिए ओला, उबर या रेपिडो बुक करने की सोच रहे हैं, तो अपनी प्लानिंग अभी बदल लीजिए। देशभर के लाखों एप-बेस्ड ड्राइवर्स ने 'ऑल इंडिया ब्रेकडाउन' का एलान कर दिया है। तेलंगाना गिग एंड प्लेटफॉर्म वर्कर्स यूनियन (TGPWU) ने राष्ट्रीय मजदूर संगठनों के साथ मिलकर इस स्ट्राइक को सफल बनाने की तैयारी कर ली है। कल सुबह से ही सड़कों पर ओला-उबर की कारें, ऑटो और रेपिडो की बाइक टैक्सी नदारद रह सकती हैं, जिससे आम जनता को भारी मुसीबत का सामना करना पड़ सकता है।
'ऑल इंडिया ब्रेकडाउन': क्यों हो रहा है चक्का जाम?
ड्राइवर्स ने इस हड़ताल को अस्तित्व की लड़ाई बताया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (X) पर यूनियन ने तीखे शब्दों में अपना विरोध दर्ज कराया है।
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शोषण का आरोप: यूनियन का कहना है कि एप-बेस्ड कंपनियां ड्राइवर्स का 'अंतहीन शोषण' कर रही हैं।
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किराया प्रणाली का अभाव: ड्राइवर्स की सबसे बड़ी नाराजगी इस बात को लेकर है कि सरकार ने इनके लिए कोई न्यूनतम किराया (Minimum Fare) तय नहीं किया है, जिससे कंपनियां मनमाना कमीशन काट रही हैं।
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आर्थिक असुरक्षा: नितिन गडकरी को लिखे पत्र में यूनियन ने साफ कहा है कि लाखों ट्रांसपोर्ट वर्कर्स गरीबी की दलदल में धकेले जा रहे हैं, जबकि एग्रीगेटर कंपनियां मोटा मुनाफा कमा रही हैं।
नितिन गडकरी को पत्र: अंतिम चेतावनी
यूनियन ने केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री को पत्र लिखकर रेगुलेशन की मांग की है। ड्राइवर्स चाहते हैं कि सरकार किराया तय करने की चाबी अपने हाथ में ले, ताकि ड्राइवरों को उनकी मेहनत का सही दाम मिल सके। जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं, यह 'ब्रेकडाउन' भविष्य में और बड़ा रूप ले सकता है।
कैब-ऑटो हड़ताल: मुख्य विवरण (Strike Snapshot)
| विवरण | प्रमुख जानकारी (Key Facts) |
| हड़ताल की तारीख | शनिवार, 7 फरवरी 2026 |
| आंदोलन का नाम | ऑल इंडिया ब्रेकडाउन (All India Breakdown) |
| प्रभावित सेवाएं | ओला (Ola), उबर (Uber), रेपिडो (Rapido), पोर्टर (Porter) |
| मुख्य मांग | न्यूनतम किराया तय करना और शोषण रोकना |
| आयोजक | तेलंगाना गिग एंड प्लेटफॉर्म वर्कर्स यूनियन (TGPWU) |
आम जनता पर क्या होगा असर?
शनिवार को वीकेंड होने के कारण रेलवे स्टेशनों, एयरपोर्ट्स और मॉल्स जाने वाले लोगों की संख्या अधिक होती है।
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वेटिंग टाइम: अगर कुछ गाड़ियां चलेंगी भी, तो 'सर्ज प्राइसिंग' (Surge Pricing) की वजह से किराया आसमान छू सकता है।
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कैंसिलेशन: एप पर बुकिंग मिलने के बावजूद ड्राइवर्स के हड़ताल में शामिल होने से ट्रिप कैंसिल होने की दर 90% तक जा सकती है।
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विकल्प: यात्रियों को कल के लिए मेट्रो, डीटीसी बसें या अपनी निजी गाड़ियों का इस्तेमाल करने की सलाह दी जा रही है।
डिजिटल आजादी या हकीकत?
कल की हड़ताल केवल एक दिन का चक्का जाम नहीं है, बल्कि यह उन लाखों परिवारों की आवाज है जो मोबाइल स्क्रीन के पीछे छिपे 'एल्गोरिदम' से लड़ रहे हैं। अब देखना यह होगा कि सरकार इस 'ऑल इंडिया ब्रेकडाउन' के बाद क्या कोई सख्त रेगुलेशन लेकर आती है या जनता को ऐसे ही परेशान होना पड़ेगा।
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