Ranchi Raid: रांची में बंद घरों को निशाना बनाने वाले शातिर गैंग का पर्दाफाश, दिनदहाड़े रेकी कर उड़ाते थे जेवर, ज्वेलर्स के साथ मिलकर रची थी खौफनाक साजिश
रांची के नामकुम में आतंक मचाने वाले 'सेंधमार गिरोह' का पुलिस ने खात्मा कर दिया है। दिनदहाड़े चोरी करने वाले फिरदोस और जेवर गलाने वाले ज्वेलर्स दिलीप सोनी की गिरफ्तारी के साथ भारी मात्रा में सोना बरामद हुआ है। पुलिस की इस बड़ी सफलता और गिरोह के काम करने के अनोखे तरीके की पूरी रिपोर्ट यहाँ मौजूद है वरना आप राजधानी में सक्रिय इस बड़े खतरे से अनजान रह जाएंगे।
रांची, 14 फरवरी 2026 – झारखंड की राजधानी रांची के नामकुम थाना क्षेत्र में पिछले कुछ समय से बंद घरों को निशाना बनाने वाले एक संगठित गिरोह का पुलिस ने सनसनीखेज खुलासा किया है। रांची एसएसपी राकेश रंजन के निर्देश पर गठित एसआईटी (SIT) ने कार्रवाई करते हुए गिरोह के दो मुख्य सदस्यों को दबोच लिया है। यह गिरोह इतना शातिर था कि न केवल रात के अंधेरे में बल्कि दिन के उजाले में भी सूने घरों के ताले तोड़कर कीमती जेवर और नकदी उड़ा लेता था। रुरल एसपी प्रवीण पुष्कर ने शनिवार को इस पूरे 'सिंडिकेट' के काम करने के तरीके और बरामदगी की जानकारी साझा की।
दो मास्टरमाइंड गिरफ्तार: फिरदोस और दिलीप के पुराने पाप
पुलिस ने इस मामले में जिन दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, उनका आपराधिक इतिहास काफी पुराना रहा है।
-
फिरदोस अली (19 वर्ष): मौलाना आजाद कॉलोनी, नामकुम का रहने वाला है। वह गिरोह का मुख्य 'सेंधमार' है।
-
दिलीप सोनी (37 वर्ष): लोहरा कोचा, लालपुर का निवासी। यह कांटाटोली स्थित “मां ज्वेलर्स” का संचालक है और चोरी के माल को ठिकाने लगाने का काम करता था।
ये दोनों पहले भी ज्वेलरी चोरी और उसे खपाने के जुर्म में जेल की हवा खा चुके हैं, लेकिन बाहर आते ही इन्होंने फिर से अपना खौफनाक धंधा शुरू कर दिया।
रेकी, चोरी और गलाने का खेल: कैसे चलता था धंधा?
एसपी ने बताया कि यह गिरोह बहुत ही प्रोफेशनल तरीके से काम करता था। इनका तरीका कुछ इस प्रकार था:
-
दिनदहाड़े रेकी: गिरोह के सदस्य मोहल्लों में घूमकर उन घरों को चिह्नित करते थे जो बंद होते थे।
-
सेंधमारी: जैसे ही पक्का होता कि घर में कोई नहीं है, ये ताला तोड़कर अंदर घुस जाते। इनका मुख्य टारगेट कैश और सोना होता था।
-
मां ज्वेलर्स का 'भट्ठी' कनेक्शन: चोरी के जेवर तुरंत दिलीप सोनी की दुकान पर पहुँचाए जाते थे। दिलीप उन्हें बाजार भाव से काफी कम दाम में खरीदता और बिना देरी किए गला देता था, ताकि पुलिस को कोई सबूत न मिल सके।
पुलिस की बड़ी बरामदगी: लूट का हिसाब (Seizure Snapshot)
| बरामद सामान | मात्रा/विवरण |
| गलाया हुआ सोना | 15.40 ग्राम (पत्तर और स्क्रैप) |
| अंगूठियां | 18 ग्राम (बड़ी और छोटी) |
| अन्य जेवर | मंगलसूत्र, नथिया, दोलना (23.10 ग्राम) |
| डिजाइनर लॉकेट | भगवान और अन्य (8.5 ग्राम) |
| कान के जेवर | 22 पीस बाली और टॉप्स |
| डिजिटल सबूत | ओप्पो मोबाइल और रजिस्टर्ड नंबरों की लिस्ट |
एसआईटी की ताबड़तोड़ छापेमारी
मुख्यालय डीएसपी अमर कुमार पांडेय के नेतृत्व में बनी टीम में नामकुम थानेदार मनोज कुमार, एसआई शशि रंजन, गौतम कुमार और अन्य सशस्त्र बल शामिल थे। पुलिस ने दावा किया है कि गिरोह के कुछ और सदस्य अभी भी फरार हैं, जिनकी पहचान कर ली गई है और जल्द ही वे भी सलाखों के पीछे होंगे।
प्रशासन की अपील: पड़ोसियों को बताएं और सुरक्षित रहें
एसपी प्रवीण पुष्कर ने शहरवासियों से अपील की है कि अगर वे घर छोड़कर बाहर जा रहे हैं, तो अपने पड़ोसियों को जरूर सूचित करें। घर में सीसीटीवी कैमरे लगवाएं और किसी भी संदिग्ध फेरीवाले या अंजान व्यक्ति के दिखने पर तुरंत 100 या 112 नंबर पर कॉल करें।
अपराध का अंत निश्चित है
नामकुम पुलिस की इस कामयाबी ने रांची के लोगों को बड़ी राहत दी है। दिनदहाड़े होने वाली इन चोरी की घटनाओं ने स्थानीय लोगों की नींद उड़ा दी थी, लेकिन पुलिस की मुस्तैदी ने साबित कर दिया है कि अपराधी चाहे कितना भी शातिर क्यों न हो, वह कानून की पहुंच से बाहर नहीं है।
What's Your Reaction?


