PM Modi CM Meeting : ऊर्जा संकट पर पीएम मोदी का बड़ा एक्शन, कल सभी मुख्यमंत्रियों के साथ इमरजेंसी मीटिंग

ईरान और अमेरिका-इजरायल युद्ध के बीच भारत में गहराते ऊर्जा संकट को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कल शुक्रवार को सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ हाई-लेवल बैठक करेंगे। तेल और गैस की सप्लाई सुनिश्चित करने और 'टीम इंडिया' रणनीति की पूरी इनसाइड रिपोर्ट यहाँ देखें।

Mar 26, 2026 - 17:16
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PM Modi CM Meeting : ऊर्जा संकट पर पीएम मोदी का बड़ा एक्शन, कल सभी मुख्यमंत्रियों के साथ इमरजेंसी मीटिंग
PM Modi CM Meeting : ऊर्जा संकट पर पीएम मोदी का बड़ा एक्शन, कल सभी मुख्यमंत्रियों के साथ इमरजेंसी मीटिंग

नई दिल्ली, 26 मार्च 2026 – पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी भीषण युद्ध की लपटें अब भारत की दहलीज तक पहुँचने लगी हैं। ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच छिड़े इस महायुद्ध ने भारत के सामने एक गंभीर ऊर्जा संकट (Energy Crisis) खड़ा कर दिया है। इसी संकट से निपटने और देश की रणनीति तैयार करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कल यानी शुक्रवार को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों के साथ एक महत्वपूर्ण वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग करेंगे। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य 'टीम इंडिया' की भावना के साथ केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर तालमेल बिठाना है, ताकि युद्ध के वैश्विक दुष्प्रभावों से आम जनता को बचाया जा सके। हालांकि, चुनावी राज्यों के मुख्यमंत्री इस बैठक का हिस्सा नहीं होंगे।

'परीक्षा की घड़ी': राज्यसभा में पीएम की चेतावनी

प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में राज्यसभा में अपने संबोधन के दौरान देश को आने वाली चुनौतियों के प्रति आगाह किया था।

  • एकता की अपील: पीएम ने कहा कि अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच की जंग अगर लंबी खिंचती है, तो इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा। भारत भी इससे अछूता नहीं रह सकता।

  • सहयोग जरूरी: प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि आने वाला समय भारत के लिए किसी कठिन परीक्षा से कम नहीं है। इसमें राज्यों का सहयोग सबसे अनिवार्य है, क्योंकि बिजली और ईंधन की खपत का प्रबंधन जमीनी स्तर पर राज्यों को ही करना है।

  • सकारात्मक रुख: हालांकि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से निकलने वाले भारतीय जहाजों को लेकर नरम रुख दिखाया है, फिर भी अनिश्चितता के बादल गहराए हुए हैं।

युद्ध के 27 दिन: तेहरान पर हमले और ट्रंप का दावा

आज 28 फरवरी को शुरू हुए इस युद्ध को 27 दिन बीत चुके हैं, लेकिन शांति की कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही है।

  1. मौत का आंकड़ा: अब तक इस युद्ध में 3000 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है। तेहरान पर लगातार हमले हो रहे हैं और ईरान भी पलटवार कर रहा है।

  2. सीजफायर का सस्पेंस: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 5 दिनों के सीजफायर का ऐलान किया था, लेकिन हकीकत में जंग जारी है। ईरान ने साफ कहा है कि सीजफायर को लेकर कोई औपचारिक चर्चा नहीं हुई है, सिर्फ कुछ संदेशों का आदान-प्रदान हुआ है।

  3. पेट्रोलियम मंत्रालय का भरोसा: भारत में कई जगहों पर ऊर्जा किल्लत के लक्षण दिख रहे हैं, लेकिन मंत्रालय ने कहा है कि हमारे पास पर्याप्त तेल और गैस भंडार हैं। घबराने की कोई जरूरत नहीं है, कई तेल टैंकर भारत के रास्ते में हैं।

ऊर्जा संकट और वैश्विक युद्ध का इतिहास: भारत के लिए सबक

इतिहास गवाह है कि जब भी पश्चिम एशिया में अशांति हुई है, भारत की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा क्षेत्र पर सीधा असर पड़ा है।

  • 1973 का तेल संकट: ओपेक (OPEC) देशों के तेल प्रतिबंध के बाद भारत को भारी आर्थिक दबाव झेलना पड़ा था। उस वक्त से ही भारत ने अपने 'स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व' (SPR) बनाने पर काम शुरू किया।

  • खाड़ी युद्ध (1990): कुवैत पर इराक के हमले के दौरान भी भारत को कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल और आपूर्ति में बाधा का सामना करना पड़ा था।

  • सीख: वर्तमान सरकार इसी अनुभव से सीख लेते हुए इस बार पहले ही राज्यों के साथ मिलकर 'बैकअप प्लान' तैयार कर रही है ताकि जनता पर महंगाई का बोझ न बढ़े।

अगला कदम: कल की बैठक में क्या होगा खास?

शुक्रवार की इस बैठक में केवल चर्चा नहीं, बल्कि कुछ कड़े फैसलों की भी उम्मीद जताई जा रही है।

  • राशनिंग की योजना?: क्या सरकार ईंधन के उपयोग को लेकर कोई नई गाइडलाइन जारी करेगी? इस पर सबकी नजर रहेगी।

  • वैकल्पिक ऊर्जा: बैठक में सौर और अन्य नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) के इस्तेमाल को बढ़ाने पर राज्यों को विशेष प्रोत्साहन देने की चर्चा हो सकती है।

  • सप्लाई चेन की सुरक्षा: नौसेना के साथ मिलकर समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर भी मुख्यमंत्रियों को भरोसे में लिया जाएगा।

प्रधानमंत्री मोदी की कल की बैठक यह संकेत है कि भारत युद्ध के सबसे बुरे दौर के लिए खुद को तैयार कर रहा है। 'टीम इंडिया' का मंत्र यहाँ केवल नारा नहीं, बल्कि देश की ऊर्जा सुरक्षा की जरूरत बन गया है। पेट्रोलियम मंत्रालय की शांति की अपील के बावजूद, जमीनी हकीकत कल की बैठक के बाद ही साफ होगी। क्या भारत इस वैश्विक संकट के बीच अपनी विकास की रफ्तार बरकरार रख पाएगा? फिलहाल, पूरी दिल्ली की नजरें कल की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग पर टिकी हैं और सरकार हर मुमकिन कोशिश कर रही है कि जनता को युद्ध की आंच न महसूस हो।

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Manish Tamsoy मनीष तामसोय कॉमर्स में मास्टर डिग्री कर रहे हैं और खेलों के प्रति गहरी रुचि रखते हैं। क्रिकेट, फुटबॉल और शतरंज जैसे खेलों में उनकी गहरी समझ और विश्लेषणात्मक क्षमता उन्हें एक कुशल खेल विश्लेषक बनाती है। इसके अलावा, मनीष वीडियो एडिटिंग में भी एक्सपर्ट हैं। उनका क्रिएटिव अप्रोच और टेक्निकल नॉलेज उन्हें खेल विश्लेषण से जुड़े वीडियो कंटेंट को आकर्षक और प्रभावी बनाने में मदद करता है। खेलों की दुनिया में हो रहे नए बदलावों और रोमांचक मुकाबलों पर उनकी गहरी पकड़ उन्हें एक बेहतरीन कंटेंट क्रिएटर और पत्रकार के रूप में स्थापित करती है।