Khunti Raid : खूंटी में अफीम तस्करों पर पुलिस का काल बनकर टूटा कहर, 21 बोरों में छिपा था 50 लाख का नशा, दो सगे भाई धरे गए
खूंटी के अड़की थाना क्षेत्र में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 330 किलो अफीम (डोडा) बरामद की है। 21 बोरों में भरे नशे की खेप के साथ अंकित और लालू हजाम की गिरफ्तारी और एसपी मनीष टोप्पो के नेतृत्व में हुई इस छापेमारी की पूरी इनसाइड स्टोरी यहाँ देखें।
खूंटी, 26 मार्च 2026 – झारखंड के खूंटी जिले में नशे के काले कारोबार की कमर तोड़ने के लिए पुलिस ने एक बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक की है। अड़की थाना क्षेत्र के सुदूरवर्ती गांव नौढ़ी और बाबूटोली में गुरुवार को हुई इस छापेमारी ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में करीब 49.53 लाख रुपये मूल्य की अफीम (डोडा) की खेप को जब्त किया है। एसपी मनीष टोप्पो को मिली एक गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस ने घेराबंदी कर दो सगे भाइयों को रंगे हाथ दबोच लिया, जो अपने घर को ही नशे का गोदाम बनाए हुए थे। बरामद डोडा की मात्रा इतनी अधिक थी कि इसे ले जाने के लिए पुलिस को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। इस कार्रवाई ने जिले के अफीम सिंडिकेट में हड़कंप मचा दिया है।
घर के अंदर 'नशे की मंडी': 21 बोरों का रहस्य
अड़की पुलिस के लिए यह ऑपरेशन किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं था, क्योंकि सूचना एक रिहायशी घर के भीतर अवैध कारोबार की थी।
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सटीक इनपुट: एसपी को सूचना मिली थी कि नौढ़ी गांव के अंकित हजाम और लालू हजाम के घर में भारी मात्रा में अफीम छिपाकर रखी गई है।
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छापेमारी दल: थाना प्रभारी प्रवीण कुमार तिवारी के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई, जिसने तड़के सुबह गांव की घेराबंदी की।
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कबूलनामा: पुलिस ने जब अंकित हजाम उर्फ साजू ठाकुर (28) को पकड़कर सख्ती से पूछताछ की, तो उसने अपने भाई लालू के साथ मिलकर डोडा के अवैध धंधे की बात स्वीकार कर ली।
330 किलो जहर: एनडीपीएस एक्ट के तहत बड़ी कार्रवाई
पुलिस ने जब घर की तलाशी ली, तो वहां का नजारा देखकर अधिकारी भी हैरान रह गए।
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बोरों का अंबार: घर के अलग-अलग कोनों से कुल 21 बोरा डोडा बरामद किया गया। जब इनका वजन कराया गया, तो कुल मात्रा 330.21 किलोग्राम निकली।
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लाखों की कीमत: जब्त किए गए इस डोडे की अनुमानित कीमत लगभग 50 लाख रुपये बताई जा रही है।
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सख्त धाराएं: दोनों भाइयों के खिलाफ अड़की थाना में कांड संख्या 07/26 दर्ज की गई है। उन पर एनडीपीएस (NDPS) एक्ट की धारा 8(सी), 15(सी), 22(सी) और 25 के तहत मुकदमा चलाया जाएगा, जिसमें उम्रकैद तक का प्रावधान है।
खूंटी और अफीम की खेती: एक डरावना इतिहास
खूंटी जिला पिछले कई दशकों से अफीम की खेती और तस्करी के लिए बदनाम रहा है, लेकिन हाल के वर्षों में पुलिस की सख्ती ने इसे कम करने का प्रयास किया है।
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दुर्गम इलाके: अड़की और मारंगहादा जैसे क्षेत्रों की भौगोलिक स्थिति पहाड़ी और जंगलों से घिरी है, जिसका फायदा तस्कर उठाते रहे हैं। यहाँ अफीम की खेती करना और उसे डोडा बनाकर बाहर भेजना एक संगठित अपराध बन चुका है।
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पुलिस की रणनीति: एसपी मनीष टोप्पो के आने के बाद से 'विन्यास' और 'विनाश' जैसे अभियानों के जरिए अफीम की फसलों को ट्रैक्टर चलाकर नष्ट किया गया है।
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नया पैटर्न: अब तस्कर फसलों के बजाय सीधे घरों में स्टॉक जमा करने लगे हैं, ताकि उसे मौका मिलते ही पंजाब या हरियाणा जैसे राज्यों में खपाया जा सके।
अगला कदम: सिंडिकेट के 'आकाओं' की तलाश
गिरफ्तार किए गए अंकित और लालू हजाम तो केवल मोहरे माने जा रहे हैं, असली मास्टरमाइंड अभी भी पुलिस की रडार पर हैं।
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फॉरवर्ड लिंकेज: पुलिस यह पता लगा रही है कि 330 किलो डोडा की यह बड़ी खेप कहाँ भेजी जानी थी। क्या इसके तार अंतरराज्यीय तस्करों से जुड़े हैं?
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संपत्ति की जांच: एनडीपीएस एक्ट के प्रावधानों के तहत अब इन तस्करों द्वारा नशे की कमाई से बनाई गई अचल संपत्ति को भी जब्त करने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।
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ग्रामीण इलाकों में गश्त: खूंटी पुलिस अब ग्रामीण क्षेत्रों में 'ग्राम सुरक्षा समितियों' को सक्रिय कर रही है ताकि अफीम की भंडारण वाली जगहों की गुप्त सूचना मिल सके।
खूंटी में 50 लाख के नशे की बरामदगी पुलिस की सतर्कता का प्रमाण है। अंकित और लालू हजाम की गिरफ्तारी ने अफीम माफियाओं को साफ संदेश दे दिया है कि उनके सुरक्षित ठिकाने अब सुरक्षित नहीं रहे। थाना प्रभारी प्रवीण कुमार तिवारी और उनकी टीम ने जिस पेशेवर अंदाज में इस बड़े स्टॉक को पकड़ा, वह सराहनीय है। क्या पुलिस इस बरामदगी के जरिए उस बड़े 'सप्लायर' तक पहुँच पाएगी जो खूंटी के युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ कर रहा है? फिलहाल, दोनों आरोपी जेल की सलाखों के पीछे हैं और मामले की विस्तृत जांच जारी है।
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