Palamu Fraud: रूस में जेसीबी ऑपरेटर बनाने के नाम पर पलामू में बड़ा खेल, यूपी का जालसाज गिरफ्तार, 5 युवाओं से वसूले लाखों

पलामू में विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर 6.25 लाख रुपये की ठगी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। रूस में जेसीबी ऑपरेटर की नौकरी का झांसा देकर फर्जी ऑफर लेटर थमाने वाले प्रज्ञा केंद्र संचालक की गिरफ्तारी और पुलिस की बड़ी कार्रवाई की पूरी रिपोर्ट यहाँ देखें।

Mar 26, 2026 - 18:10
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Palamu Fraud: रूस में जेसीबी ऑपरेटर बनाने के नाम पर पलामू में बड़ा खेल, यूपी का जालसाज गिरफ्तार, 5 युवाओं से वसूले लाखों
Palamu Fraud: रूस में जेसीबी ऑपरेटर बनाने के नाम पर पलामू में बड़ा खेल, यूपी का जालसाज गिरफ्तार, 5 युवाओं से वसूले लाखों

मेदिनीनगर/पलामू, 26 मार्च 2026 – झारखंड के पलामू जिले में बेरोजगार युवाओं के सपनों से खिलवाड़ करने वाला एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय 'जॉब स्कैम' उजागर हुआ है। रूस (Russia) में बेहतर भविष्य और ऊँची तनख्वाह का लालच देकर पलामू के पांच सीधे-साधे युवाओं से लाखों रुपये की ठगी कर ली गई। मेदिनीनगर टाउन थाना पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए उत्तर प्रदेश के अयोध्या निवासी एक शातिर जालसाज को गिरफ्तार किया है, जो पलामू में अपना आधार जमाकर प्रज्ञा केंद्र की आड़ में ठगी का साम्राज्य चला रहा था। ठगी का शिकार हुए सभी युवा पेशेवर जेसीबी ऑपरेटर हैं, जिन्हें विदेशी धरती पर रोजगार दिलाने का 'फर्जी' सपना दिखाया गया था।

रूस जाने का सपना और 6.25 लाख का 'धोखा'

पलामू के उंटारी थाना क्षेत्र के जोगा गांव के रहने वाले पांच दोस्तों—संतोष कुमार पाल, आशीष चंद्रवंशी, विकास नारायण पाल, लवलेश चौधरी और संजीत पाल—ने कभी नहीं सोचा था कि उनकी मेहनत की कमाई एक झटके में डूब जाएगी।

  • बड़ा लालच: आरोपी ने इन युवाओं से संपर्क कर बताया कि रूस में जेसीबी ऑपरेटरों की भारी मांग है और वहां लाखों रुपये महीने की कमाई होगी।

  • फर्जी ऑफर लेटर: भरोसा जीतने के लिए आरोपी ने उन्हें आकर्षक वेतन वाले 'ऑफर लेटर' भी थमा दिए। लेकिन जब इन दस्तावेजों की गहराई से जांच की गई, तो पता चला कि वे पूरी तरह से फर्जी और फोटोशॉप किए हुए थे।

  • पैसे की वसूली: जालसाज ने वीजा, टिकट और प्रोसेसिंग फीस के नाम पर इन पांचों युवाओं से कुल 6.25 लाख रुपये ऐंठ लिए।

अयोध्या का 'अनिल' और पलामू का 'प्रज्ञा केंद्र'

पुलिस की जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि आरोपी अनिल कुमार मूल रूप से उत्तर प्रदेश के अयोध्या जिले का रहने वाला है।

  1. पहचान छुपाने का खेल: अनिल पलामू के नावाजयपुर क्षेत्र में एक प्रज्ञा केंद्र (CSC Center) संचालित कर रहा था। केंद्र चलाने की आड़ में वह स्थानीय लोगों का विश्वास जीतता था और फिर उन्हें विदेश भेजने के नाम पर फंसाता था।

  2. डिजिटल ठगी: जांच में सामने आया कि आरोपी ने पीड़ितों से अधिकतर संपर्क फोन और ऑनलाइन माध्यमों से किया था, ताकि पकड़े जाने का खतरा कम रहे।

  3. दस्तावेजों का राज: पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि उत्तर प्रदेश का रहने वाला एक व्यक्ति पलामू में प्रज्ञा केंद्र खोलने के लिए जरूरी स्थानीय दस्तावेज बनाने में कैसे सफल रहा।

झारखंड में 'विदेश भेजने वाली' ठगी का काला इतिहास

पलामू, गढ़वा और लातेहार जैसे जिलों में युवाओं का पलायन एक बड़ी सच्चाई है, जिसका फायदा ठग गिरोह उठाते रहे हैं।

  • खाड़ी देशों का झांसा: इससे पहले भी कुवैत, सऊदी अरब और ओमान भेजने के नाम पर पलामू के दर्जनों युवाओं से ठगी की घटनाएं हो चुकी हैं। अक्सर फर्जी एजेंसियां रांची या पटना में ऑफिस खोलती हैं और पैसे लेकर गायब हो जाती हैं।

  • बदलते तरीके: अब ठगों ने नया तरीका निकाला है—ग्रामीण इलाकों में प्रज्ञा केंद्र या साइबर कैफे खोलना। इससे स्थानीय युवाओं को लगता है कि व्यक्ति यहीं का है और कहीं नहीं भागेगा।

  • रूस-यूक्रेन युद्ध का एंगल: हाल के दिनों में रूस में कामगारों की जरूरत की खबरों का फायदा उठाकर ठग गिरोह 'जेसीबी ऑपरेटर' या 'हेल्पर' की वैकेंसी के नाम पर सक्रिय हुए हैं।

अगला कदम: बड़े गिरोह और स्थानीय कनेक्शन की तलाश

टाउन थाना पुलिस का मानना है कि अनिल कुमार महज एक मोहरा हो सकता है और इसके पीछे एक अंतरराज्यीय गिरोह सक्रिय है।

  • बैंक खातों की जांच: पुलिस आरोपी के बैंक ट्रांजेक्शन खंगाल रही है ताकि पता चल सके कि ठगी के पैसे कहाँ-कहाँ भेजे गए हैं।

  • अन्य पीड़ितों की तलाश: अंदेशा है कि नावाजयपुर और आसपास के अन्य गांवों के कई और युवा भी अनिल के जाल में फँसे हो सकते हैं। पुलिस ने अपील की है कि अगर किसी और के साथ ऐसा हुआ है, तो तुरंत शिकायत करें।

  • प्रज्ञा केंद्रों का ऑडिट: पलामू जिला प्रशासन अब अवैध रूप से या संदिग्ध दस्तावेजों पर चल रहे प्रज्ञा केंद्रों की जांच के लिए विशेष अभियान चला सकता है।

पलामू में हुई यह गिरफ्तारी उन युवाओं के लिए एक सबक है जो बिना जांच-परख के 'विदेशी नौकरी' के झांसे में आ जाते हैं। अनिल कुमार की गिरफ्तारी ने यह साबित कर दिया है कि अपराधी चाहे जितना भी शातिर क्यों न हो, कानून की नजरों से नहीं बच सकता। टाउन थाना पुलिस की सतर्कता ने न केवल एक ठग को पकड़ा, बल्कि भविष्य में होने वाली अन्य वारदातों को भी रोक दिया। क्या पुलिस उन 6.25 लाख रुपयों को बरामद कर पीड़ित युवाओं को दिला पाएगी? फिलहाल, अनिल पुलिस की हिरासत में है और उससे जुड़े अन्य नेटवर्क की तलाश जारी है।

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Manish Tamsoy मनीष तामसोय कॉमर्स में मास्टर डिग्री कर रहे हैं और खेलों के प्रति गहरी रुचि रखते हैं। क्रिकेट, फुटबॉल और शतरंज जैसे खेलों में उनकी गहरी समझ और विश्लेषणात्मक क्षमता उन्हें एक कुशल खेल विश्लेषक बनाती है। इसके अलावा, मनीष वीडियो एडिटिंग में भी एक्सपर्ट हैं। उनका क्रिएटिव अप्रोच और टेक्निकल नॉलेज उन्हें खेल विश्लेषण से जुड़े वीडियो कंटेंट को आकर्षक और प्रभावी बनाने में मदद करता है। खेलों की दुनिया में हो रहे नए बदलावों और रोमांचक मुकाबलों पर उनकी गहरी पकड़ उन्हें एक बेहतरीन कंटेंट क्रिएटर और पत्रकार के रूप में स्थापित करती है।