Nashik TCS : नासिक TCS यूनिट में यौन शोषण और धर्मांतरण का काला खेल, 6 कर्मचारी गिरफ्तार
नासिक TCS में यौन उत्पीड़न और धार्मिक रूपांतरण के आरोपों ने देश को हिला दिया है। 9 एफआईआर, 6 गिरफ्तारियां और कंपनी की जीरो टॉलरेंस नीति की पूरी इनसाइड रिपोर्ट यहाँ देखें।
नासिक/महाराष्ट्र, 13 अप्रैल 2026 – देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) की नासिक यूनिट इस वक्त एक ऐसे विवाद के केंद्र में है जिसने कॉर्पोरेट जगत के साथ-साथ शासन प्रशासन को भी हिला कर रख दिया है। कंपनी के भीतर यौन उत्पीड़न, जबरन धर्मांतरण और धार्मिक अपमान जैसे गंभीर आरोपों के बाद पुलिस ने अब तक 6 कर्मचारियों को गिरफ्तार कर लिया है। इस मामले में अब तक कुल 9 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने एक विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया है, और खुद देवेंद्र फडणवीस इस पूरे मामले की निगरानी कर रहे हैं।
कॉर्पोरेट की आड़ में 'डर्टी गेम': महिला की शिकायत से खुला राज
इस सनसनीखेज मामले की शुरुआत एक महिला कर्मचारी की बहादुरी से हुई, जिसने चुप रहने के बजाय आवाज उठाने का फैसला किया।
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शादी का झांसा और शोषण: पीड़िता ने आरोप लगाया कि उसके साथ सहकर्मी ने शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाए। इसके बाद जब उसने विरोध किया, तो उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाने लगा।
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धार्मिक अपमान का एंगल: जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, पुलिस को और भी चौंकाने वाली शिकायतें मिलीं। कुछ पीड़ितों ने आरोप लगाया कि उन्हें धार्मिक रूप से अपमानित किया गया और उन पर विशेष गतिविधियों में शामिल होने के लिए दबाव डाला गया।
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HR की चुप्पी पर सवाल: पीड़ितों का दावा है कि उन्होंने पहले कंपनी के इंटरनल HR विभाग में शिकायत की थी, लेकिन वहां कोई सुनवाई नहीं हुई, जिससे आरोपियों के हौसले और बढ़ गए।
TCS का कड़ा रुख: "जीरो टॉलरेंस" के तहत सस्पेंशन
विवाद बढ़ने के बाद TCS ने आधिकारिक बयान जारी कर अपनी स्थिति स्पष्ट की है।
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सख्त कार्रवाई: कंपनी ने स्पष्ट किया है कि वह उत्पीड़न के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' नीति अपनाती है। जांच के दायरे में आए सभी 6 आरोपियों को तुरंत प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है।
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प्रशासन को सहयोग: कंपनी के प्रवक्ता ने कहा कि TCS कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग कर रही है। वर्कप्लेस पर कर्मचारियों की सुरक्षा उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।
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SIT की कमान: नासिक पुलिस ने SIT का गठन कर दिया है जो अब यह पता लगा रही है कि क्या इस शोषण के पीछे कोई संगठित सिंडिकेट काम कर रहा था।
'वाइन कैपिटल' से आईटी हब तक का सफर
नासिक ऐतिहासिक रूप से अपनी धार्मिक महत्ता और अंगूर की खेती (Wine Capital) के लिए जाना जाता रहा है, लेकिन पिछले दो दशकों में यहाँ के परिदृश्य में बड़ा बदलाव आया है।
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आईटी और मैन्युफैक्चरिंग: नासिक धीरे-धीरे पुणे और मुंबई के बाद महाराष्ट्र का तीसरा सबसे बड़ा औद्योगिक केंद्र बनकर उभरा है। TCS जैसी दिग्गज कंपनी की यहाँ मौजूदगी ने हजारों स्थानीय युवाओं को रोजगार दिया है।
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कॉर्पोरेट संस्कृति में दरार: इतिहास में टाटा ग्रुप को हमेशा 'एथिक्स' और 'नैतिकता' का प्रतीक माना गया है। नासिक यूनिट में सामने आई यह घटना इस भरोसे के लिए एक बड़ी चुनौती है।
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धार्मिक संवेदनशीलता: नासिक कुंभ नगरी है, जहाँ धार्मिक भावनाएं काफी गहरी हैं। ऐसे में धर्मांतरण और धार्मिक अपमान जैसे आरोपों ने मामले को बेहद संवेदनशील बना दिया है, यही कारण है कि प्रशासन कोई ढील नहीं बरत रहा है।
अगली कार्रवाई: पूछताछ का दायरा और फडणवीस का संज्ञान
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने नासिक पुलिस की त्वरित कार्रवाई की सराहना की है और संकेत दिए हैं कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
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गिरफ्तारियां और पूछताछ: गिरफ्तार 6 लोगों के अलावा एक महिला कर्मचारी समेत कई अन्य लोगों से पूछताछ जारी है। पुलिस यह देख रही है कि इस मामले में बाहरी तत्वों का कितना हाथ है।
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धार्मिक रूपांतरण की जांच: SIT विशेष रूप से उन दावों की जांच कर रही है जिनमें पीड़ितों को धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर करने की बात कही गई है। इसके लिए डिजिटल साक्ष्य और व्हाट्सएप चैट खंगाले जा रहे हैं।
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पीड़ितों को सुरक्षा: पुलिस ने आश्वासन दिया है कि और भी कोई कर्मचारी अगर पीड़ित है, तो वह बिना डरे सामने आए। उनकी पहचान गुप्त रखी जाएगी और पूरी सुरक्षा दी जाएगी।
नासिक TCS की यह घटना कॉर्पोरेट जगत के लिए एक वेक-अप कॉल है। जहाँ एक तरफ कंपनी अपनी साख बचाने की कोशिश कर रही है, वहीं दूसरी तरफ SIT की जांच में रोज नए खुलासे हो रहे हैं। यह मामला केवल एक क्राइम रिपोर्ट नहीं है, बल्कि वर्कप्लेस एथिक्स और कर्मचारियों की सुरक्षा पर उठने वाला एक बड़ा सवालिया निशान है। फडणवीस की निगरानी और SIT की सक्रियता से उम्मीद है कि सच जल्द सामने आएगा। फिलहाल, नासिक की इस यूनिट में सन्नाटा है और कर्मचारी न्याय की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
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