LPG Relief : भारत में 60% रसोई गैस का घरेलू उत्पादन शुरू, 1.2 लाख ठिकानों पर छापेमारी से टूटी कालाबाजारी की कमर
भारत में रसोई गैस की किल्लत के बीच राहत भरी खबर आई है। 60% गैस का घरेलू उत्पादन, 98% ऑनलाइन बुकिंग और जमाखोरों पर हुई देशव्यापी छापेमारी की पूरी इनसाइड रिपोर्ट यहाँ देखें।
नई दिल्ली, 11 अप्रैल 2026 – पश्चिम एशिया के संकट और 40 दिनों से जारी वैश्विक युद्ध के तनाव के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को लेकर एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल कर ली है। देश में रसोई गैस (LPG) की भारी किल्लत और अफरा-तफरी के बीच अब राहत की खबर है। भारत अपनी कुल खपत का 60 प्रतिशत हिस्सा अब खुद घर में ही उत्पादित करने लगा है। पेट्रोलियम मंत्रालय और विभिन्न मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि देश में गैस की कोई कमी नहीं है और कालाबाजारी पर नकेल कसने के बाद अब हर घर तक सिलेंडर पहुंचना सुनिश्चित किया जा रहा है।
युद्ध के बीच भारत की जीत: 60% घरेलू उत्पादन से बढ़ी ताकत
दुनिया भर में जब गैस और ईंधन की कीमतों ने आसमान छू लिया, तब भारत ने अपने घरेलू संसाधनों पर भरोसा जताया।
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आयात पर निर्भरता कम: पेट्रोलियम मिनिस्ट्री की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने बताया कि भारत अब अपनी जरूरत की आधे से ज्यादा गैस खुद बना रहा है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में हो रही उठापटक का असर भारतीय रसोई पर कम होगा।
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98% ऑनलाइन बुकिंग: बिचौलियों और कालाबाजारी को खत्म करने के लिए सरकार ने डिजिटल ट्रांजैक्शन को बढ़ावा दिया है। अब देश में 98 प्रतिशत बुकिंग ऑनलाइन हो रही है, जिससे गैस वितरकों की मनमानी पर लगाम लगी है।
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70% सुधरी सप्लाई: कमर्शियल गैस की सप्लाई जो बाधित हुई थी, वह अब 70 फीसदी तक पटरी पर लौट आई है। अस्पतालों, होटलों और फार्मा कंपनियों को अब प्राथमिकता के आधार पर सिलेंडर दिए जा रहे हैं।
करोड़ों का काला खेल: 1.2 लाख छापे और 57,000 सिलेंडर जब्त
सरकार ने जमाखोरों के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा राष्ट्रव्यापी अभियान चलाया है।
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एक दिन में रिकॉर्ड छापेमारी: केवल गुरुवार को ही देश भर में 1.2 लाख ठिकानों पर छापेमारी की गई। इस कार्रवाई ने गैस माफियाओं की कमर तोड़ दी है।
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भारी बरामदगी: जांच टीमों ने 57,000 से अधिक अवैध रूप से जमा किए गए सिलेंडर जब्त किए हैं। यह कार्रवाई उन असामाजिक तत्वों के खिलाफ है जो संकट का फायदा उठाकर महंगे दामों पर गैस बेच रहे थे।
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PNG का विस्तार: पाइप वाली प्राकृतिक गैस (PNG) के काम में भी तेजी आई है। पिछले पांच हफ्तों में 4.41 लाख नए ग्राहकों ने रजिस्ट्रेशन कराया है और 4.05 लाख घरों में सप्लाई शुरू हो चुकी है।
कोयले से 'ग्रीन एनर्जी' तक भारत का सफर
भारत की विद्युत और ऊर्जा प्रणाली पिछले एक दशक में पूरी तरह बदल गई है।
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क्षमता में भारी वृद्धि: भारत की स्थापित बिजली क्षमता अब 531 गीगावाट से अधिक हो गई है। ऐतिहासिक रूप से भारत केवल कोयले पर निर्भर था, लेकिन आज गैर-जीवाश्म स्रोत (सौर, पवन, परमाणु) 50 प्रतिशत से अधिक का योगदान दे रहे हैं।
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पारेषण का मजबूत ढांचा: देश में लगभग 5 लाख सर्किट किलोमीटर का पारेषण ढांचा तैयार है, जिससे एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में बिजली भेजना आसान हो गया है।
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2031 का लक्ष्य: राष्ट्रीय विद्युत योजना के अनुसार, 2031-32 तक भारत की क्षमता 874 गीगावाट तक पहुँचने का अनुमान है, जो भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बना देगा।
गर्मी की तैयारी: तापीय संयंत्रों में कोयले का स्टॉक फुल
आने वाले गर्मी के मौसम में बिजली की बढ़ती मांग को देखते हुए सरकार ने 'प्लान-बी' तैयार कर लिया है।
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रखरखाव स्थगित: गर्मी में 10,000 मेगावाट अतिरिक्त बिजली सुनिश्चित करने के लिए तापीय संयंत्रों के नियमित मेंटेनेंस को फिलहाल टाल दिया गया है ताकि उत्पादन न रुके।
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आयातित कोयले का उपयोग: मौजूदा क्षमता का अधिकतम लाभ उठाने के लिए आयातित कोयले पर आधारित बिजली संयंत्रों को भी पूर्ण क्षमता से संचालित किया जा रहा है।
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निर्माणाधीन प्रोजेक्ट्स: जलविद्युत और नवीकरणीय ऊर्जा की नई परियोजनाओं के कमीशनिंग में तेजी लाई गई है ताकि कोयले पर निर्भरता और कम हो सके।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी युद्ध और पश्चिम एशिया के तनाव के बावजूद भारत ने अपनी रसोई और बिजली घर को सुरक्षित रखने में सफलता पाई है। 60% गैस का स्वदेशी उत्पादन और 98% ऑनलाइन पारदर्शिता यह बताती है कि हम अब बाहरी झटकों को सहने के लिए तैयार हैं। पेट्रोलियम मंत्रालय की सख्त छापेमारी ने यह साबित कर दिया है कि आम जनता के हक की गैस पर डाका डालने वालों के लिए अब कोई जगह नहीं है। 531 गीगावाट की बिजली क्षमता और मजबूत पीएनजी नेटवर्क के साथ भारत अब एक नई ऊर्जा क्रांति की ओर बढ़ रहा है।
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