Jaraikela Tragedy: जराईकेला में नहाने गई 12 वर्षीय बच्ची चेकडैम में डूबी, सुबह पानी में उतराता मिला शव, रवगंदा में पसरा मातम
पश्चिमी सिंहभूम के जराईकेला में चेकडैम में डूबने से 12 वर्षीय रुपनी मिंज की मौत हो गई है। गांव के किनारे मिले कपड़ों और उतराते शव ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। पूरी इनसाइड रिपोर्ट यहाँ देखें।
जराईकेला/पश्चिमी सिंहभूम, 17 अप्रैल 2026 – झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के जराईकेला थाना क्षेत्र स्थित रवगंदा गांव में एक मासूम की जलसमाधि ने पूरे क्षेत्र को स्तब्ध कर दिया है। गुरुवार शाम नहाने गई 12 वर्षीय बच्ची रुपनी मिंज की चेकडैम में डूबने से दर्दनाक मौत हो गई। शुक्रवार की सुबह जब ग्रामीणों ने पानी की सतह पर मासूम का शव उतराता देखा, तो पूरे गांव में कोहराम मच गया। यह घटना न केवल एक परिवार के चिराग बुझने की कहानी है, बल्कि ग्रामीण अंचलों में बने चेकडैमों के पास सुरक्षा के अभाव पर भी बड़ा सवाल खड़ा करती है।
लापता होने की दहशत: शाम 5 बजे से शुरू हुआ खौफ
रवगंदा गांव निवासी सोमरा मिंज की पुत्री रुपनी मिंज रोज की तरह गुरुवार शाम करीब 5 बजे घर के पास बने चेकडैम में नहाने गई थी।
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इंतजार और बढ़ती बेचैनी: जब सूरज ढल गया और अंधेरा छाने लगा, तब भी रुपनी घर नहीं लौटी। परिजनों ने बदहवास होकर पूरे गांव, रिश्तेदारों और सहेलियों के घर खोजबीन की, लेकिन उसका कोई सुराग नहीं मिला।
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रात भर का सन्नाटा: पूरी रात परिवार एक अनहोनी की आशंका में जागता रहा। किसी को अंदाजा नहीं था कि घर के पास का वह चेकडैम ही मासूम की कब्र बन चुका है।
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कपड़ों ने खोला राज: शुक्रवार सुबह जब ग्रामीण चेकडैम पहुंचे, तो किनारे पर रखे रुपनी के छोटे-छोटे कपड़े देखकर सबका दिल बैठ गया। पानी में गौर से देखने पर रुपनी का बेजान शरीर ऊपर उतराता नजर आया।
पुलिस का एक्शन: पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया शव
ग्रामीणों के शोर मचाने के बाद मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई। जराईकेला थाना प्रभारी पुलिस बल के साथ तुरंत घटना स्थल पर पहुँचे।
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रेस्क्यू ऑपरेशन: पुलिस ने ग्रामीणों की मदद से शव को पानी से बाहर निकलवाया। रुपनी के माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल था, जिसे देख वहां मौजूद हर आंख नम हो गई।
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कानूनी प्रक्रिया: पुलिस ने शव का पंचनामा कर उसे पोस्टमार्टम के लिए चक्रधरपुर अनुमंडल अस्पताल भेज दिया है।
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जांच का दायरा: थाना प्रभारी ने बताया कि प्रथम दृष्टया यह मामला गहरे पानी में जाने के कारण डूबने का लग रहा है, हालांकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी।
बच्चों को अकेले जल निकायों पर न भेजें
इस घटना ने एक बार फिर अभिभावकों और प्रशासन के लिए खतरे की घंटी बजा दी है।
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अकेले न छोड़ें: गर्मी के मौसम में बच्चे अक्सर तालाबों और चेकडैमों की ओर आकर्षित होते हैं। बिना किसी बड़े की निगरानी के उन्हें पानी के पास भेजना जोखिम भरा है।
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सुरक्षा की मांग: रवगंदा के ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि गांव के पास स्थित इस चेकडैम के चारों ओर फेंसिंग (घेराबंदी) की जाए ताकि भविष्य में किसी और मासूम की जान न जाए।
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गहराई का अंदाजा: अक्सर बारिश के बाद चेकडैमों की गहराई बदल जाती है और तलहटी में गड्ढे बन जाते हैं, जो नहाने वालों के लिए घातक होते हैं।
जराईकेला के रवगंदा गांव की यह घटना दिल को झकझोर देने वाली है। 12 साल की रुपनी मिंज का जाना उसके परिवार के लिए एक ऐसा घाव है जो शायद कभी नहीं भरेगा। सोमरा मिंज की आंखों के आंसू प्रशासन से सवाल कर रहे हैं कि आखिर कब तक ये चेकडैम मासूमों की जान लेते रहेंगे? चक्रधरपुर अस्पताल में चल रही पोस्टमार्टम की प्रक्रिया और पुलिस की जांच अब इस दुखद अध्याय का हिस्सा है। फिलहाल, पूरे गांव में चूल्हा नहीं जला है और लोग अपनी बेटियों की सुरक्षा को लेकर सहमे हुए हैं।
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