Code of conduct Violation : पप्पू यादव पर आचार संहिता लागू होने के बाद गिरा गाज! बाढ़ पीड़ितों को पैसे बांटना अपराध या मजबूरी? IT नोटिस के बाद सांसद ने क्या कहा
बिहार विधानसभा चुनाव से पहले पूर्णिया सांसद पप्पू यादव की मुश्किलें क्यों बढ़ीं? वैशाली में बाढ़ पीड़ितों को नकद मदद देने पर FIR के बाद अब इनकम टैक्स विभाग ने नोटिस क्यों भेजा? क्या आचार संहिता के दौरान मानवीय मदद करना भी जुर्म है? पप्पू यादव ने नित्यानंद राय और चिराग पासवान पर सवाल क्यों उठाया?
पूर्णिया/पटना, 25 अक्टूबर 2025 - बिहार विधानसभा चुनाव की सरगर्मियों के बीच पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव अचानक मुश्किलों के भंवर में घिरते नजर आ रहे हैं। आदर्श आचार संहिता लागू होने के बाद बाढ़ पीड़ितों को नकद आर्थिक सहायता देने के मामले में उनका नाम पहले से ही एफआईआर में दर्ज था, लेकिन अब इस मामले में आयकर विभाग (Income Tax Department) का नोटिस आने के बाद सियासी हलकों में हलचल तेज हो गई है।
सवाल यह उठ रहा है कि क्या चुनाव के समय संकटग्रस्त लोगों की मानवीय आधार पर मदद करना भी आचार संहिता का उल्लंघन है, और क्या गरीबों को नकद मदद देना ही पप्पू यादव के लिए सबसे बड़ी मुसीबत बन गया है?
बाढ़ पीड़ितों को मदद, बदले में केस और नोटिस
मामला पिछले दो हफ्तों का है, जब पप्पू यादव वैशाली जिले के बाढ़ प्रभावित इलाकों में पहुंचे थे। उन्होंने नयागांव पूर्वी पंचायत के मनियारी गांव में बाढ़ से बेघर हुए कई परिवारों को आर्थिक सहायता के तौर पर नकद राशि दी थी। गंगा नदी में घर और संपत्ति बह जाने से पीड़ित इन लोगों की मदद का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
इसके तुरंत बाद, सहदेई थाने में पप्पू यादव के खिलाफ आचार संहिता उल्लंघन का केस दर्ज किया गया। चुनाव आयोग का मानना है कि आदर्श आचार संहिता लागू होने के बाद इस तरह से नकद राशि का वितरण चुनावी लाभ लेने की कोशिश हो सकती है।
लेकिन अब, बात सिर्फ आचार संहिता उल्लंघन तक सीमित नहीं रही। सूत्रों के मुताबिक, पप्पू यादव को आयकर विभाग ने नोटिस जारी कर दिया है। यह नोटिस भी विधानसभा चुनाव की घोषणा के बाद किए गए नकद वितरण से जुड़ा हुआ है। विभाग अब इस पैसे के स्रोत और वितरण की गहराई से जांच कर रहा है।
पप्पू यादव की जवाबी चुनौती: "अपराध बार-बार करूंगा"
इस पूरे घटनाक्रम पर पप्पू यादव ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने साफ लहजे में कहा कि बाढ़ पीड़ितों की मदद करना किसी भी तरह से अपराध नहीं हो सकता।
उन्होंने सोशल मीडिया पर सीधे अपनी बात रखी: "मुझे इनकम टैक्स का नोटिस मिला है। अगर बाढ़ पीड़ितों की मदद में रुपये देना अपराध है, तो मैं यह अपराध बार-बार करता रहूंगा।"
सांसद ने सीधे तौर पर केंद्र और राज्य सरकार के अन्य नेताओं पर भी सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि जब लोग मुसीबत में थे, तब वे मदद नहीं करते तो क्या गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय और सांसद चिराग पासवान की तरह चुपचाप तमाशा देखते रहते? यह बयान इस पूरे मामले को राजनीतिक रंग दे रहा है, जहां एक ओर चुनाव आयोग और आयकर विभाग नियमों के तहत जांच कर रहे हैं, वहीं पप्पू यादव इसे मानवीय मूल्यों और गरीबों की सेवा से जोड़कर पेश कर रहे हैं।
निश्चित रूप से, बिहार चुनाव से ठीक पहले यह मामला पप्पू यादव की राजनीति और बिहार में आचार संहिता के नियमों पर एक बड़ी बहस छेड़ सकता है। अब सभी की निगाहें आयकर विभाग की जांच और अदालती कार्रवाई पर टिकी हैं, जिससे पता चलेगा कि आपदा राहत कोष और चुनावी लाभ के बीच की बारीक रेखा कहाँ है।
पाठकों से सवाल:
क्या आचार संहिता के दौरान बाढ़ पीड़ितों को नकद आर्थिक मदद देना सही है या यह चुनावी नियमों का उल्लंघन है? आपकी राय क्या है, कमेंट करके बताएं।
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