Bodam Cattle Smuggling : लग्जरी इनोवा कार से हो रही थी मवेशियों की तस्करी, मानगो के अहमद समेत दो तस्कर गिरफ्तार
जमशेदपुर के बोड़ाम में पुलिस ने सफेद रंग की इनोवा कार से हो रही मवेशी तस्करी के बड़े रैकेट को दबोच लिया है। मानगो और धालभूमगढ़ के तस्करों की गिरफ्तारी और कपाली नेटवर्क के खौफनाक सच की पूरी ग्राउंड रिपोर्ट यहाँ देखें।
जमशेदपुर, 16 मई 2026 – झारखंड में गौ-वंशीय पशुओं की तस्करी के खिलाफ पुलिस ने एक बार फिर सबसे बड़ा और चौंकाने वाला क्रैकडाउन किया है। सरायकेला के कपाली और जमशेदपुर के मानगो को जोड़ने वाले ग्रामीण रूट पर सक्रिय तस्कर अब पुलिस को चकमा देने के लिए हाई-टेक और लग्जरी गाड़ियों का इस्तेमाल कर रहे हैं। बोड़ाम थाना पुलिस ने एक गुप्त सूचना के आधार पर जाल बिछाकर एक सफेद रंग की वीआईपी इनोवा कार को इंटरसेप्ट किया, जिसके अंदर का नजारा देखकर खुद पुलिस अधिकारी भी दंग रह गए।
वारदात की दास्तां: इनोवा कार का 'सीक्रेट' चैंबर और पीले रंग की रस्सियां
यह पूरा ऑपरेशन शुक्रवार की देर शाम बोड़ाम थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले बड़ासुसनी गांव के पास चलाया गया।
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लग्जरी गाड़ी में तस्करी: तस्करों ने पुलिस की चेकिंग से बचने के लिए मालवाहक गाड़ियों (पिकअप वैन या मिनी ट्रक) के बजाय सफेद रंग की इनोवा कार का इस्तेमाल किया, ताकि किसी को शक न हो।
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घेराबंदी और जब्ती: गुप्त सूचना के आधार पर बोड़ाम पुलिस ने बड़ासुसनी गांव के पास बैरिकेडिंग कर दी। जैसे ही इनोवा वहाँ पहुँची, पुलिस ने उसे चारों तरफ से घेर लिया। तलाशी के दौरान गाड़ी के पिछले हिस्से से क्रूरतापूर्वक बांधकर रखे गए दो गौ-वंशीय पशु और उन्हें बांधने में इस्तेमाल की गई दो पीले रंग की रस्सियां बरामद की गईं।
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तस्करों की प्रोफाइल: मौके से पुलिस ने दो मुख्य आरोपियों को दबोचा:
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अहमद हुसैन (36 वर्ष): जमशेदपुर के मानगो, जवाहरनगर रोड नंबर-14 का निवासी।
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सुभान अली (21 वर्ष): पूर्वी सिंहभूम के धालभूमगढ़ थाना क्षेत्र के ढोलकी गांव का निवासी।
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जेल रवानगी: पुलिस ने इनोवा कार को जब्त करते हुए दोनों तस्करों को पशु क्रूरता निवारण अधिनियम 1960 एवं झारखंड गौवंशीय पशु हत्या निवारण अधिनियम 2005 के तहत शनिवार को जेल भेज दिया है।
प्रशासनिक रुख: बंगाल से कपाली तक फैला है खूनी जाल
बोड़ाम थाना पुलिस के अनुसार, इस सिंडिकेट का नेटवर्क अंतरराज्यीय स्तर पर काम कर रहा है।
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चोरी का माल: सूत्रों का कहना है कि ये पशु पूर्वी सिंहभूम के ग्रामीण इलाकों और पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती गांवों से चोरी कर लाए जाते थे।
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कपाली रूट का इस्तेमाल: तस्करों का मुख्य टार्गेट बोड़ाम के सुनसान जंगलों और गांवों के रास्ते कपाली (सरायकेला) के अवैध स्लाटर हाउसों तक मवेशियों को पहुँचाना था। पुलिस अब इस रूट पर नजर रखने वाले अन्य लाइनमैनों की तलाश कर रही है।
हाई-टेक तस्करी के खिलाफ जारी रहेगा अभियान
बोड़ाम पुलिस की यह कामयाबी दर्शाती है कि अपराधी चाहे जितने भी नए तरीके अपना लें, सजग पुलिसिंग के आगे वे टिक नहीं सकते। इनोवा जैसी महंगी कार का इस काले धंधे में इस्तेमाल होना यह साबित करता है कि इस सिंडिकेट के पीछे बड़े फाइनेंसरों का हाथ है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जब तक इन मवेशियों को खरीदने वाले कपाली के मुख्य आकाओं को गिरफ्तार नहीं किया जाता, तब तक इस खूनी नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करना नामुमकिन है। फिलहाल, पुलिस अन्य कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।
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