टाटा स्टील प्रबंधन का नया प्रस्ताव: टाटा वर्कर्स यूनियन के नेतृत्व की परीक्षा
टाटा स्टील प्रबंधन ने टाटा वर्कर्स यूनियन को संयुक्त समितियों की संख्या घटाने का प्रस्ताव दिया है, जिससे यूनियन के नेतृत्व की कठिन परीक्षा हो रही है। जानिए इस प्रस्ताव के पीछे के कारण और इसके प्रभाव।
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टाटा स्टील और टाटा वर्कर्स यूनियन की संयुक्त समितियों की संख्या को घटाने का प्रस्ताव मैनेजमेंट ने दे दिया है। इसके तहत जेडीसी की संख्या को 34 से घटाकर 4 करने का प्रस्ताव दिया गया है। इसी तरह, अन्य सभी संयुक्त समितियों में सदस्यों की संख्या को कम करने के साथ-साथ कई समितियों में सिर्फ जमशेदपुर के लोगों को ही शामिल करने से इनकार कर दिया गया है। अब, इन संयुक्त समितियों में जमशेदपुर के साथ कलिंगानगर, मेरामंडली समेत अन्य प्लांट के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे।
टाटा स्टील और यूनियन की संयुक्त सर्वोच्च कमेटी (एपेक्स बॉडी) जेसीसीएम में टाटा स्टील के एमडी सह सीईओ टीवी नरेंद्रन के अलावा सभी प्लांट के पदाधिकारी और सभी प्लांट की अधीकृत यूनियनों के पदाधिकारी शामिल होंगे। इसके लिए अलग-अलग कमेटी बनाई जाएगी। प्रबंधन का कहना है कि टाटा स्टील अब तेजी से बदल रही है और यह अब सिर्फ जमशेदपुर में नहीं है। इसके प्लांट देश और विदेशों में भी हैं।
इस तरह, संयुक्त मंच को सारे प्लांट में बनाया जाना है और संयुक्त मंच को दूसरे प्लांट में भी विस्तार दिया जाएगा। जेसीसीएम, जेडब्ल्यूसी समेत अन्य बड़ी कमेटियों में सभी प्लांट के पदाधिकारी और यूनियन की भागीदारी होगी। जेडीसी की संख्या को कम करने का कारण यह बताया गया है कि जब जेडीसी का गठन हुआ था, तब से 34 ही संख्या थी, जबकि पहले 35 हजार कर्मचारी थे और अब करीब 10 हजार कर्मचारी हैं। ऐसे में, जेडीसी की संख्या को इतना ज्यादा नहीं रखा जा सकता है। समान वर्क प्लेस वाले प्लांट के जेडीसी का समायोजन किया जाएगा।
अब इसको लेकर टाटा वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष संजीव चौधरी टुन्नु खुद सकते में हैं। मैनेजमेंट के इस दो टूक जवाब के बाद यूनियन के समक्ष मुश्किलें खड़ी हो गई हैं कि आखिर वे कर्मचारियों और वर्तमान यूनियन का कैसे वजूद बचाएं। बदलाव के समय में किस तरह के बदलाव को आत्मसात किया जाए। चूंकि, बदलाव का दौर है, कर्मचारी की संख्या कम हुई है, यह भी सही है, लेकिन यूनियन की भागीदारी को भी बढ़ाए रखना है।
इसलिए, अध्यक्ष पर सबसे ज्यादा जिम्मेदारी है। यूनियन के अध्यक्ष के साथ महामंत्री सतीश सिंह और डिप्टी प्रेसिडेंट शैलेश सिंह के स्तर पर कई दौर की वार्ता इस मुद्दे पर हो चुकी है, लेकिन अभी तक कोई निष्कर्ष नहीं निकला है।
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