Mumbai Decision: टाटा समूह में बड़ा बदलाव, चंद्रशेखरन को मिला रतन टाटा फाउंडेशन की कमान!

टाटा समूह में बड़ा बदलाव! एन. चंद्रशेखरन को रतन टाटा एंडोयमेंट फाउंडेशन का चेयरमैन नियुक्त किया गया। जानिए, क्यों रतन टाटा ने उन्हें इस पद के लिए चुना और इसका भारत पर क्या असर होगा?

Feb 26, 2025 - 18:09
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Mumbai Decision: टाटा समूह में बड़ा बदलाव, चंद्रशेखरन को मिला रतन टाटा फाउंडेशन की कमान!
Mumbai Decision: टाटा समूह में बड़ा बदलाव, चंद्रशेखरन को मिला रतन टाटा फाउंडेशन की कमान!

मुंबई: टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन को रतन टाटा एंडोयमेंट फाउंडेशन का नया चेयरमैन नियुक्त किया गया है। यह वही फाउंडेशन है, जिसे स्वर्गीय रतन टाटा ने समाज सेवा और परोपकार के लिए स्थापित किया था। दिलचस्प बात यह है कि रतन टाटा की वसीयत में पहले ही यह साफ कर दिया गया था कि इस प्रतिष्ठित फाउंडेशन की कमान चंद्रशेखरन को ही सौंपी जाए। वसीयत के निष्पादकों (एग्जीक्यूटर्स) ने कानूनी विशेषज्ञों से सलाह लेने के बाद इस नियुक्ति को मंजूरी दे दी

रतन टाटा की इच्छा आखिर क्यों थी खास?

रतन टाटा, जो कि भारत के सबसे सम्मानित उद्योगपतियों में से एक थे, हमेशा से समाज सेवा और जरूरतमंदों की मदद को प्राथमिकता देते थे। उन्होंने अपनी अधिकांश संपत्ति इसी फाउंडेशन के जरिए परोपकार के लिए दान करने की घोषणा की थी। यही कारण था कि वह अपने सबसे भरोसेमंद सहयोगी एन. चंद्रशेखरन को इस जिम्मेदारी के लिए देखना चाहते थे

फाउंडेशन और टाटा ट्रस्ट में क्या है अंतर?

टाटा ट्रस्ट और रतन टाटा फाउंडेशन में एक बड़ा अंतर है।

  • टाटा ट्रस्ट का नेतृत्व नोएल टाटा कर रहे हैं, लेकिन यह रतन टाटा फाउंडेशन का हिस्सा नहीं है
  • रतन टाटा फाउंडेशन पूरी तरह से अलग है और इसे रतन टाटा की निजी संपत्ति से संचालित किया जाएगा
  • टाटा ट्रस्ट के नियमों के विपरीत, टाटा संस का चेयरमैन इस फाउंडेशन का नेतृत्व कर सकता है

क्या बदलेगा चंद्रशेखरन की नियुक्ति के बाद?

एन. चंद्रशेखरन की नियुक्ति के बाद फाउंडेशन के मैनेजमेंट में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं

  • अब वे इस फाउंडेशन के लिए एक नई टीम बनाएंगे और इसकी कार्यप्रणाली को नए सिरे से व्यवस्थित करेंगे
  • फाउंडेशन को अब टाटा समूह की विभिन्न कंपनियों से धन प्राप्त होगा, जिसमें टाटा टेक्नोलॉजी और टाटा डिजिटल जैसी प्रमुख कंपनियां शामिल हैं
  • रतन टाटा की वसीयत को औपचारिक रूप से प्रमाणित करने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही संपत्ति का वितरण होगा

रतन टाटा की वसीयत की कानूनी प्रक्रिया कब तक पूरी होगी?

रतन टाटा की वसीयत को बांबे हाईकोर्ट में प्रोबेट (Probate) के लिए जमा किया जाएगा, जिसके प्रमाणित होने में करीब छह महीने का समय लग सकता है

  • वसीयत को मंजूरी मिलने के बाद ही फाउंडेशन को आधिकारिक रूप से टाटा संस और अन्य टाटा कंपनियों की हिस्सेदारी से धन प्राप्त होगा
  • इस पूरी प्रक्रिया के बाद रतन टाटा की संपत्ति को उनके परोपकारी कार्यों के लिए उपयोग में लाया जाएगा

एन. चंद्रशेखरन: टाटा समूह में क्यों हैं महत्वपूर्ण?

एन. चंद्रशेखरन 2017 से टाटा संस के चेयरमैन के रूप में कार्यरत हैं और टाटा समूह को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में उनकी बड़ी भूमिका रही है

  • उनकी अगुवाई में टाटा समूह ने डिजिटल और टेक्नोलॉजी सेक्टर में बड़े इनोवेशन किए हैं
  • रतन टाटा ने उन्हें हमेशा अपने सबसे भरोसेमंद नेतृत्वकर्ताओं में गिना
  • उनकी नई भूमिका से यह सुनिश्चित होगा कि टाटा की परोपकार की विरासत आगे भी जारी रहे

टाटा समूह और भारत पर क्या होगा असर?

रतन टाटा फाउंडेशन की इस नई संरचना से भारत में शिक्षा, स्वास्थ्य, तकनीकी विकास और समाज कल्याण से जुड़े कई बड़े प्रोजेक्ट्स को बढ़ावा मिलेगा

  • इस फाउंडेशन के जरिए हजारों जरूरतमंदों की मदद की जाएगी
  • टाटा समूह की परोपकारी विरासत को और मजबूत किया जाएगा
  • चंद्रशेखरन की लीडरशिप में फाउंडेशन नई ऊंचाइयों तक पहुंचेगा

अगले 6 महीने होंगे महत्वपूर्ण!

अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि अगले छह महीनों में रतन टाटा की वसीयत पर कानूनी प्रक्रिया कैसे आगे बढ़ती है

  • यदि सब कुछ योजना के अनुसार चलता है, तो टाटा समूह में यह परोपकारी बदलाव ऐतिहासिक साबित होगा
  • एन. चंद्रशेखरन के नेतृत्व में टाटा समूह एक नए युग की ओर बढ़ेगा, जिसमें बिजनेस के साथ-साथ समाज सेवा को प्राथमिकता दी जाएगी

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Nihal Ravidas निहाल रविदास, जिन्होंने बी.कॉम की पढ़ाई की है, तकनीकी विशेषज्ञता, समसामयिक मुद्दों और रचनात्मक लेखन में माहिर हैं।