Coal Crisis: कोल इंडिया का मुनाफा बढ़ा, लेकिन कर्मचारियों को नुकसान!

कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) की आमदनी बढ़ रही है, लेकिन कर्मचारियों को मिलने वाले लाभ में कटौती की जा रही है। आउटसोर्सिंग से उत्पादन बढ़ा, लेकिन वेतन और सुविधाओं पर खर्च घटा। क्या कर्मचारियों को उनका हक मिलेगा?

Feb 27, 2025 - 09:58
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Coal Crisis: कोल इंडिया का मुनाफा बढ़ा, लेकिन कर्मचारियों को नुकसान!
Coal Crisis: कोल इंडिया का मुनाफा बढ़ा, लेकिन कर्मचारियों को नुकसान!

रामगढ़: कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) की आमदनी लगातार बढ़ रही है, लेकिन कर्मचारियों को मिलने वाले लाभ में कटौती हो रही है। 2020-21 में जहां कुल आमदनी का 51% कर्मचारियों के वेतन और सुविधाओं पर खर्च किया गया था, वहीं इस बार यह घटकर 46% रह गया है।

कंपनी ने 31 जनवरी 2025 तक कोयला बिक्री से 92,800 करोड़ रुपये कमाए, लेकिन कर्मचारियों के वेतन, बोनस और अन्य सुविधाओं पर सिर्फ 34,160.35 करोड़ रुपये ही खर्च किए। सवाल यह है कि जब कंपनी का मुनाफा बढ़ रहा है तो कर्मचारियों के फायदे में कटौती क्यों हो रही है?

आउटसोर्सिंग से बढ़ा कोल उत्पादन, लेकिन कर्मचारियों को नुकसान

कोल इंडिया में अब आउटसोर्सिंग से ज्यादा कोयला उत्पादन हो रहा है। वित्तीय वर्ष के 31 जनवरी तक CIL ने कुल 600.37 मिलियन टन (MT) कोयले का उत्पादन किया, जिसमें से 204.90 मिलियन टन कर्मचारी खुद और 395.47 मिलियन टन आउटसोर्सिंग के जरिए निकाला गया।

पिछले कुछ वर्षों में आउटसोर्सिंग को तेजी से बढ़ावा दिया गया है। नए कोयला खदानों में भी स्थायी कर्मचारियों की जगह ठेकेदारों को काम सौंपा जा रहा है। इससे कंपनी का उत्पादन तो बढ़ा, लेकिन कर्मचारियों के वेतन और सुविधाओं में गिरावट देखने को मिली।

पावर सेक्टर को सबसे ज्यादा कोयला सप्लाई

कोल इंडिया का 82% कोयला पावर सेक्टर को बेचा गया। 31 जनवरी तक कुल 621.15 मिलियन टन कोयले में से 510.6 मिलियन टन बिजली कंपनियों को भेजा गया।

सबसे ज्यादा कोयला भेजने वाली कंपनियां:
MCL – 132.9 MT
SECL – 114.2 MT
NCL – 98.6 MT
CCL – 98.3 MT
WCL – 47.4 MT
ECL – 33.1 MT
BCCL – 26.1 MT

पावर सेक्टर को कोयला आपूर्ति बढ़ाने के चलते अन्य सेक्टरों में कोयले की कमी देखी गई।

कोल उत्पादन का नया लक्ष्य – क्या हासिल कर पाएगी CIL?

वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए कोल इंडिया का उत्पादन लक्ष्य 838.20 मिलियन टन रखा गया है। 31 जनवरी तक 621.15 मिलियन टन उत्पादन पूरा हो चुका है, लेकिन बाकी बचे 2 महीनों में 217.05 मिलियन टन कोयले का उत्पादन करना बाकी है।

पिछले साल 773.65 मिलियन टन कोयला निकाला गया था। अगर CIL को पिछली बार की बराबरी करनी है, तो आने वाले 60 दिनों में 152.5 मिलियन टन कोयले का उत्पादन करना होगा।

CIL ने अलग-अलग कंपनियों को नए लक्ष्य दिए:
MCL – 225 MT
SECL – 206 MT
NCL – 139 MT
CCL – 100 MT
WCL – 69 MT
ECL – 54 MT
BCCL – 45 MT

लेकिन सवाल उठता है कि क्या आउटसोर्सिंग के भरोसे कंपनी इस लक्ष्य को हासिल कर पाएगी?

इतिहास में भी कोल इंडिया के कर्मचारियों को हुआ नुकसान!

कोल इंडिया को 1975 में सरकारी स्वामित्व वाली कंपनी बनाया गया था। शुरुआत में कर्मचारियों के वेतन और सुविधाओं पर अच्छी खासी रकम खर्च की जाती थी। लेकिन 90 के दशक में निजीकरण की नीतियों के चलते आउटसोर्सिंग को बढ़ावा दिया गया।

आज हालात ये हैं कि स्थायी कर्मचारियों की संख्या घट रही है और आउटसोर्सिंग कंपनियां मुनाफा कमा रही हैं। कर्मचारियों के हितों पर लगातार कुठाराघात हो रहा है, जबकि कंपनी का मुनाफा लगातार बढ़ रहा है।

कर्मचारी संगठनों ने उठाई आवाज, सरकार से की मांग

AICCTU (ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियंस) के राष्ट्रीय अध्यक्ष रमेंद्र कुमार ने इस मामले पर नाराजगी जताई। उनका कहना है कि "CIL का उत्पादन और मुनाफा बढ़ा है, लेकिन कर्मचारियों के वेतन और सुविधाओं में कटौती हो रही है।"

उन्होंने सरकार से मांग की है कि कर्मचारियों को मिलने वाले लाभ में बढ़ोतरी की जाए और आउटसोर्सिंग पर निर्भरता कम की जाए।

 आखिर सवाल ये उठता है कि…

क्या कोल इंडिया के कर्मचारियों को उनका हक मिलेगा?
क्या सरकार आउटसोर्सिंग की नीति पर फिर से विचार करेगी?
क्या CIL कर्मचारियों की सुरक्षा और भलाई को ध्यान में रखेगी?

अगर यही हाल रहा, तो आने वाले समय में स्थायी कर्मचारियों की संख्या और घटेगी और कोल उत्पादन पूरी तरह निजी कंपनियों के हाथों में चला जाएगा।

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Manish Tamsoy मनीष तामसोय कॉमर्स में मास्टर डिग्री कर रहे हैं और खेलों के प्रति गहरी रुचि रखते हैं। क्रिकेट, फुटबॉल और शतरंज जैसे खेलों में उनकी गहरी समझ और विश्लेषणात्मक क्षमता उन्हें एक कुशल खेल विश्लेषक बनाती है। इसके अलावा, मनीष वीडियो एडिटिंग में भी एक्सपर्ट हैं। उनका क्रिएटिव अप्रोच और टेक्निकल नॉलेज उन्हें खेल विश्लेषण से जुड़े वीडियो कंटेंट को आकर्षक और प्रभावी बनाने में मदद करता है। खेलों की दुनिया में हो रहे नए बदलावों और रोमांचक मुकाबलों पर उनकी गहरी पकड़ उन्हें एक बेहतरीन कंटेंट क्रिएटर और पत्रकार के रूप में स्थापित करती है।