Singhbhum Tragedy: खूनी सड़कें, अस्थि विसर्जन करने जा रहे युवक को स्कॉर्पियो ने रौंदा, 24 घंटे में तीन मौतें, चाईबासा में टूटा दुखों का पहाड़
पश्चिमी सिंहभूम में मौत की रफ्तार ने पिछले 24 घंटे में तीन घर उजाड़ दिए हैं। अस्थि विसर्जन करने जा रहे युवक के साथ हुए दर्दनाक हादसे और जिले की चरमराई सड़क सुरक्षा व्यवस्था की पूरी सनसनीखेज रिपोर्ट यहाँ दी गई है वरना आप भी इन असुरक्षित रास्तों पर छिपे जानलेवा खतरों से बेखबर रह सकते हैं।
चाईबासा, 27 दिसंबर 2025 – पश्चिमी सिंहभूम जिले में इन दिनों सड़कें इंसानी खून से लाल हो रही हैं। पिछले 24 घंटों के भीतर जिले के अलग-अलग हिस्सों में हुए पाँच सड़क हादसों ने पूरे प्रशासन की नींद उड़ा दी है। इन घटनाओं में अब तक तीन युवकों की दर्दनाक मौत हो चुकी है, जबकि आधा दर्जन से अधिक लोग जिंदगी और मौत के बीच अस्पताल में जंग लड़ रहे हैं। ताजा और सबसे मर्माहत करने वाला मामला टोंटो थाना अंतर्गत कोदवा गांव के पास से सामने आया है, जहाँ अपने पिता की अंतिम रस्म निभाने जा रहे एक युवक को तेज रफ्तार काल (स्कॉर्पियो) ने कुचल दिया।
अंतिम विसर्जन से पहले ही उजड़ा परिवार: क्या हुआ कोदवा में?
हादसा चाईबासा-सेंरेंगसिया मुख्य सड़क पर हुआ, जहाँ भक्ति और शोक के बीच एक और बड़ी त्रासदी ने जन्म ले लिया।
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अस्थि कलश और हादसा: कराईकेला थाना क्षेत्र के भालूपानी निवासी चिंतामणि प्रधान अपने एक रिश्तेदार के साथ मोटरसाइकिल पर सवार होकर त्रिवेणी संगम रामतीरथ जा रहे थे। वे अपने दिवंगत पिता का अस्थि कलश विसर्जन करने जा रहे थे।
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स्कॉर्पियो का कहर: जैसे ही उनकी बाइक कोदवा गांव के पास पहुँची, सामने से आ रही एक अनियंत्रित स्कॉर्पियो ने उन्हें जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बाइक के परखच्चे उड़ गए और अस्थि कलश सड़क पर बिखर गया।
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जमशेदपुर रेफर: चिंतामणि और उनके साथी को गंभीर हालत में चाईबासा सदर अस्पताल ले जाया गया, जहाँ नाजुक स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें बेहतर इलाज के लिए जमशेदपुर रेफर कर दिया है।
24 घंटे का 'डेथ ट्रैक': जिले में कहाँ-कहाँ हुई मौतें?
पश्चिमी सिंहभूम में पिछले एक दिन के भीतर हादसों का ग्राफ डराने वाला रहा है।
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तीन युवकों की मौत: अलग-अलग पाँच सड़क दुर्घटनाओं में तीन घरों के चिराग बुझ गए।
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आधा दर्जन घायल: घायलों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिससे सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में कोहराम मचा है।
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लापरवाही की इंतहा: अधिकांश हादसों में तेज रफ्तार और गलत दिशा से आ रहे वाहन मुख्य कारण बनकर उभरे हैं।
सड़क सुरक्षा रिपोर्ट: पश्चिमी सिंहभूम (Accident Stats)
| श्रेणी | पिछले 24 घंटे का आंकड़ा |
| कुल सड़क दुर्घटनाएं | 05 |
| मौतों की संख्या | 03 |
| गंभीर रूप से घायल | 06 से अधिक |
| सबसे प्रभावित मार्ग | चाईबासा-सेंरेंगसिया मुख्य सड़क |
| प्रमुख कारण | ओवरस्पीडिंग और सुरक्षा जागरूकता का अभाव |
चौपट व्यवस्था: एसी कमरों से धरातल तक का सफर
जिले में बढ़ते हादसों ने जिला प्रशासन और सड़क सुरक्षा समिति के दावों की पोल खोल दी है। स्थानीय ग्रामीणों और बुद्धिजीवियों का आक्रोश सातवें आसमान पर है।
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सिर्फ कागजी योजनाएं: ग्रामीणों का आरोप है कि अधिकारी केवल एयर कंडीशनर (AC) कमरों में बैठकर सुरक्षा की योजनाएं बनाते हैं, जबकि धरातल पर न तो कोई जागरूकता अभियान चल रहा है और न ही यातायात नियमों का कड़ाई से पालन हो रहा है।
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ग्रामीण क्षेत्रों की अनदेखी: मुख्य चौक-चौराहों को छोड़कर ग्रामीण इलाकों की सड़कों पर तेज रफ्तार वाहनों पर कोई लगाम नहीं है। लोग बिना हेलमेट और ट्रिपल लोडिंग के साथ सड़कों पर काल बनकर दौड़ रहे हैं।
ऐतिहासिक संदर्भ: त्रिवेणी संगम और आस्था का मार्ग
रामतीरथ स्थित त्रिवेणी संगम को कोल्हान क्षेत्र में 'छोटा प्रयाग' माना जाता है। सदियों से यहाँ लोग अपने पूर्वजों की अस्थियों के विसर्जन के लिए आते रहे हैं। लेकिन हाल के वर्षों में सड़कों के चौड़ीकरण के बाद से इन धार्मिक यात्राओं के मार्गों पर भारी वाहनों की आवाजाही और तेज रफ्तार ने इस पवित्र सफर को बेहद जोखिमभरा बना दिया है।
कब जागेगा प्रशासन?
चिंतामणि प्रधान का परिवार आज उस दर्द से गुजर रहा है जिसकी कल्पना भी डरावनी है। पिता को खोने के बाद अब बेटे की जान पर आई आफत ने पूरे भालूपानी गांव में मातम फैला दिया है। अगर प्रशासन अब भी नहीं जागा और ग्रामीण क्षेत्रों में कड़ाई से चेकिंग अभियान नहीं चलाया गया, तो पश्चिमी सिंहभूम की सड़कें इसी तरह बेगुनाह लोगों के खून से लाल होती रहेंगी।
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