Flight Fare Hike : मिडिल ईस्ट जंग से इंटरनेशनल फ्लाइट्स के किराए में भारी उछाल, 1970 के बाद सबसे बड़े तेल संकट की आहट
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव ने ग्लोबल एविएशन सेक्टर में खलबली मचा दी है। जेट फ्यूल की कीमतें दोगुनी होने से भारतीय एयरलाइंस ने किराए में 15% की बढ़ोतरी की है। वियतनाम में टिकट 70% तक महंगे हो सकते हैं। एयर न्यूजीलैंड और क्वांटास जैसे दिग्गजों ने भी हाथ खड़े किए। पूरी रिपोर्ट यहाँ देखें।
नई दिल्ली/ग्लोबल, 10 मार्च 2026 – अगर आप आने वाले दिनों में विदेश यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो यह खबर आपकी जेब पर भारी पड़ने वाली है। मिडिल ईस्ट में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव का सीधा असर अब आसमान में उड़ते विमानों पर दिख रहा है। ब्लूमबर्ग की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय एयरलाइंस ने अंतरराष्ट्रीय उड़ानों (International Flights) के किराए में औसतन 15% तक की बढ़ोतरी कर दी है। जानकारों का मानना है कि यह 1970 के दशक के बाद का सबसे बड़ा वैश्विक तेल संकट साबित हो सकता है, जो हवाई यात्रा को आम आदमी की पहुंच से दूर कर देगा।
होर्मुज रूट ठप: जेट फ्यूल की कीमतों में 'आग'
28 फरवरी से शुरू हुई ईरान-इजरायल जंग ने सप्लाई चेन की कमर तोड़ दी है। विशेष रूप से होर्मुज जलमार्ग (Hormuz Route) प्रभावित होने से कच्चे तेल की कीमतों में भारी अस्थिरता है।
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दोगुने हुए दाम: युद्ध से पहले जो जेट फ्यूल (ATF) 85 से 90 डॉलर प्रति बैरल था, वह अब उछलकर 150 से 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच गया है।
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ऑपरेटिंग कॉस्ट का बोझ: किसी भी एयरलाइन के कुल खर्च में फ्यूल की हिस्सेदारी 30% से 40% होती है। जब ईंधन की कीमतें दोगुनी हो जाएं, तो कंपनियों के पास किराया बढ़ाने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचता।
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उड़ानों पर ग्रहण: तनाव के कारण अब तक दुनियाभर में 40,000 से ज्यादा उड़ानें कैंसिल हो चुकी हैं।
ग्लोबल पैनिक: वियतनाम से हांगकांग तक हाहाकार
टिकटों के बढ़ते दाम केवल भारत तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पूरी दुनिया इस वक्त 'एविएशन पैनिक' की स्थिति में है।
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वियतनाम (70% महंगा): वियतनाम एयरलाइंस ने चेतावनी दी है कि ईंधन की बढ़ती लागत के कारण उनका किराया 70% तक बढ़ सकता है। कंपनी ने सरकार से टैक्स हटाने की गुहार लगाई है।
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एयर न्यूजीलैंड: न्यूजीलैंड की फ्लैग कैरियर ने लंबी दूरी की उड़ानों पर सीधे 90 डॉलर की बढ़ोतरी की है और भविष्य के मुनाफे का अनुमान (Financial Outlook) भी वापस ले लिया है।
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हांगकांग एयरलाइंस: यहाँ फ्यूल सरचार्ज में 35.2% का इजाफा किया गया है। नेपाल और मालदीव जैसे देशों की यात्रा अब और महंगी हो गई है।
पैनिक मोड में छोटी एयरलाइंस: बंद हो सकती हैं कई कंपनियां
स्पार्टा कमोडिटीज की ऑयल मार्केट एनालिस्ट जून गोह के अनुसार, एविएशन सेक्टर में फिलहाल 'पैनिक' जैसी स्थिति है। जिन एयरलाइंस ने कम कीमत पर एडवांस टिकट बेच दिए थे, उन्हें अब भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है क्योंकि उन्हें अब महंगे रेट पर फ्यूल खरीदना पड़ रहा है। डॉयचे बैंक के विशेषज्ञों का कहना है कि अगर तनाव जल्द कम नहीं हुआ, तो कई छोटी और मध्यम दर्जे की एयरलाइंस हमेशा के लिए बंद हो सकती हैं।
ग्लोबल किराया वृद्धि: एक नजर में
| एयरलाइन | किराए में बढ़ोतरी / प्रभाव |
| भारतीय एयरलाइंस | इंटरनेशनल रूट्स पर 15% की वृद्धि |
| वियतनाम एयरलाइंस | ऑपरेटिंग कॉस्ट में 70% का इजाफा |
| एयर न्यूजीलैंड | लॉन्ग-हॉल फ्लाइट्स पर 90 डॉलर की बढ़ोतरी |
| हांगकांग एयरलाइंस | फ्यूल सरचार्ज में 35.2% का उछाल |
| लुफ्थांसा | हेजिंग के कारण बेहतर स्थिति में |
यात्रियों पर गिरेगी गाज
कुल मिलाकर, मिडिल ईस्ट का यह भू-राजनीतिक संकट सीधे तौर पर आम यात्रियों की जेब पर प्रहार कर रहा है। क्वांटास और एसएएस (SAS) जैसी कंपनियों ने साफ कर दिया है कि वे बढ़ी हुई लागत का एक-एक पैसा यात्रियों से वसूलेंगी। जब तक होर्मुज रूट और मिडिल ईस्ट में शांति बहाल नहीं होती, तब तक हवाई सफर सस्ता होने की कोई उम्मीद नहीं दिख रही है।
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