Ranchi Bust : हटिया स्टेशन पर 'ऑपरेशन नारकोस' का बड़ा धमाका, मौर्य एक्सप्रेस से 2.5 लाख के नशे के साथ दो गिरफ्तार
रांची के हटिया स्टेशन पर आरपीएफ ने 'ऑपरेशन नारकोस' के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए 5 किलो गांजा बरामद किया है। मौर्य एक्सप्रेस के जरिए बिहार नशा ले जा रहे दो तस्करों को फ्लाइंग टीम ने दबोचा। पकड़े गए माल की कीमत लाखों में है। आरपीएफ की इस बड़ी कामयाबी की पूरी इनसाइड स्टोरी यहाँ देखें।
रांची/हटिया, 14 मार्च 2026 – झारखंड की राजधानी रांची के हटिया रेलवे स्टेशन पर शुक्रवार की रात रेलवे सुरक्षा बल (RPF) ने नशे के सौदागरों के खिलाफ एक बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक की है। 'ऑपरेशन नारकोस' के तहत की गई इस कार्रवाई में आरपीएफ ने ट्रेन के कोच के भीतर छिपे दो तस्करों को 5 किलोग्राम हाई-क्वालिटी गांजे के साथ गिरफ्तार किया है। जब्त किए गए गांजे की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करीब 2.5 लाख रुपये बताई जा रही है। इस गिरफ्तारी ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि झारखंड के रास्ते बिहार में होने वाली नशीले पदार्थों की तस्करी के लिए रेलवे अब भी तस्करों का पसंदीदा, लेकिन सबसे जोखिम भरा रूट बना हुआ है।
कोच S1 में बिछाया गया जाल: ऐसे चढ़े पुलिस के हत्थे
आरपीएफ कमांडेंट पवन कुमार के गुप्त इनपुट पर यह पूरी कार्रवाई अंजाम दी गई। 13 मार्च की रात को आरपीएफ पोस्ट हटिया और फ्लाइंग टीम रांची की एक संयुक्त टीम ने ट्रेन संख्या 15027 (मौर्य एक्सप्रेस) को अपना निशाना बनाया।
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संदिग्धों की पहचान: चेकिंग के दौरान ट्रेन के S1 कोच में दो युवक पुलिस की नजरों से बचते हुए दिखे। उनकी घबराहट ने टीम का शक गहरा कर दिया।
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मुजफ्फरपुर कनेक्शन: पूछताछ में पकड़े गए आरोपियों की पहचान परवीन कुमार और विक्रम कुमार के रूप में हुई है। ये दोनों बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के रहने वाले हैं और रांची से नशे की खेप लेकर उत्तर बिहार की ओर जा रहे थे।
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डीडी किट से पुष्टि: तलाशी के दौरान उनके बैग से छह पैकेट बरामद हुए। मौके पर ही 'डीडी किट' से जांच की गई, जिसमें नशीला पदार्थ 'गांजा' होने की पुष्टि हुई।
लाखों का माल और NDPS का फंदा
एएससी (आरपीएफ) अशोक कुमार सिंह के नेतृत्व में हुई इस बरामदगी ने तस्करी के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया है।
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वजन और कीमत: कुल 5 किलोग्राम गांजा जब्त किया गया है। इसकी अनुमानित कीमत 2.5 लाख रुपये है।
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कोई दस्तावेज नहीं: आरोपियों के पास इस प्रतिबंधित माल को ले जाने का न तो कोई लाइसेंस था और न ही कोई वैध कागज।
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अगली कार्रवाई: आरपीएफ ने एनडीपीएस (NDPS) एक्ट के तहत मामला दर्ज कर दोनों आरोपियों को जीआरपी (हटिया) को सौंप दिया है। अब पुलिस यह पता लगा रही है कि इस खेप का 'सप्लायर' कौन था और रांची में इसे कहाँ से खरीदा गया था।
'ऑपरेशन नारकोस' और रांची रेल मंडल की जंग
रेलवे सुरक्षा बल द्वारा शुरू किया गया 'ऑपरेशन नारकोस' भारतीय रेलवे के इतिहास में ड्रग तस्करी के खिलाफ सबसे बड़ा अभियान है।
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नशे का कॉरिडोर: ऐतिहासिक रूप से झारखंड और ओडिशा का बॉर्डर गांजा तस्करी के लिए एक 'ग्रीन कॉरिडोर' माना जाता रहा है। ओडिशा से गांजा झारखंड के रास्ते बिहार और उत्तर प्रदेश तक पहुँचाया जाता है।
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अतीत की कार्रवाइयां: पिछले दो वर्षों में हटिया और रांची स्टेशन से लगभग 50 किलो से अधिक गांजा और अन्य नशीले पदार्थ बरामद किए गए हैं। मौर्य एक्सप्रेस और हटिया-पटना पाटलिपुत्र एक्सप्रेस जैसे ट्रेनों का इतिहास रहा है कि तस्कर इनका इस्तेमाल सुरक्षित निकलने के लिए करते हैं, लेकिन आरपीएफ की 'फ्लाइंग टीम' के गठन के बाद से इन रूटों पर तस्करों का नेटवर्क कमजोर पड़ा है। परवीन और विक्रम की गिरफ्तारी इसी निरंतर निगरानी का परिणाम है।
कामयाब टीम: इन धुरंधरों ने दिखाया दम
इस सफल मिशन में आरपीएफ हटिया के प्रभारी निरीक्षक रूपेश कुमार, एसआई दीपक कुमार, चंद्रिका कच्छप और फ्लाइंग टीम के एएसआई अनिल कुमार की अहम भूमिका रही। आरपीएफ की इस टीम ने न केवल नशा पकड़ा, बल्कि युवाओं की रगों में जहर घोलने वाली एक बड़ी साजिश को भी नाकाम कर दिया।
रांची के हटिया स्टेशन पर हुई यह कार्रवाई नशे के खिलाफ जारी युद्ध की एक छोटी सी झलक है। 2.5 लाख का गांजा और दो तस्करों की गिरफ्तारी केवल शुरुआत है। असली चुनौती उस 'मास्टरमाइंड' तक पहुँचने की है जो बिहार के मुजफ्फरपुर में बैठकर रांची के रास्ते नशे का साम्राज्य चला रहा है। फिलहाल, हटिया जीआरपी मामले की गहराई से जांच कर रही है और उम्मीद है कि जल्द ही कुछ और बड़े खुलासे होंगे।
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