Chakradharpur Action: गैंगखोली में रेलवे का चला पीला पंजा, प्लेटफॉर्म विस्तार के लिए उजाड़ी गईं 20 झोपड़ियां!
चक्रधरपुर रेल मंडल द्वारा गैंगखोली में प्लेटफॉर्म विस्तारीकरण को लेकर चलाए गए बड़े अतिक्रमण हटाओ अभियान और विस्थापित हो रहे 120 से अधिक परिवारों के भारी विरोध की पूरी लाइव ग्राउंड रिपोर्ट यहाँ देखें।
चक्रधरपुर, 2 जून 2026 – दक्षिण पूर्व रेलवे (SER) के चक्रधरपुर रेल मंडल से इस वक्त की एक बहुत ही बड़ी और संवेदनशील खबर सामने आ रही है। रेलवे प्रशासन ने मंगलवार सुबह कड़ा रुख अख्तियार करते हुए चक्रधरपुर के गैंगखोली इलाके में एक बड़ा अतिक्रमण हटाओ अभियान (Anti-Encroachment Drive) चलाया है। रेल मंडल के प्लेटफॉर्म विस्तारीकरण योजना को हरी झंडी देने के लिए रेलवे की जमीन पर बने अवैध खटालों, झाड़ियों और कच्चे मकानों को बुलडोजर (पीला पंजा) की मदद से पूरी तरह ध्वस्त कर दिया गया। पहले चरण की इस प्रशासनिक कार्रवाई में करीब 20 झोपड़ियों को तोड़कर जमीन को मुक्त कराया गया है। इस कार्रवाई के बाद से पूरे गैंगखोली अंचल में विस्थापित हो रहे स्थानीय लोगों की चीख-पुकार और भारी आक्रोश का माहौल है।
कार्रवाई की इनसाइड स्टोरी: 120 से अधिक झोपड़ियां रडार पर, 3 महीने पहले ही थमाया था नोटिस
रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और चक्रधरपुर रेल मंडल इंजीनियरिंग विभाग के सूत्रों से मिली अंदरूनी जानकारी के अनुसार, यह ऑपरेशन बेहद सुनियोजित तरीके से चलाया जा रहा है:
-
सैकड़ों मकान चिह्नित: गैंगखोली में रेलवे ट्रैक के बिल्कुल बगल में करीब 120 से 150 झोपड़ियां और खटाल अवैध रूप से रेलवे की सुरक्षित भूमि पर बसे हुए हैं।
-
अचानक नहीं चला बुलडोजर: रेलवे प्रशासन का कहना है कि इन अवैध ढांचों को हटाने के लिए करीब तीन महीने पहले ही आधिकारिक लिखित नोटिस जारी कर दिया गया था। इसके अलावा, एक सप्ताह पहले बस्तियों में लाउडस्पीकर के जरिए और मौखिक रूप से आखिरी चेतावनी भी दी गई थी।
-
चरणबद्ध तरीके से चलेगा अभियान: जब तय समय सीमा के भीतर लोगों ने अपनी झोपड़ियां नहीं हटाईं, तो मंगलवार को पुलिस बल के साथ बुलडोजर मौके पर पहुंच गया। रेलवे अधिकारियों का साफ कहना है कि प्लेटफॉर्म का विस्तार जनहित और यात्री सुविधाओं के लिए बेहद जरूरी है, इसलिए यह अभियान आगे भी जारी रहेगा।
पुनर्वास (वैकल्पिक व्यवस्था) की मांग, जनप्रतिनिधियों के खिलाफ फूटा गुस्सा
बस्ती उजाड़े जाने से नाराज स्थानीय लोगों ने रेल प्रशासन के सामने कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए साफ कहा है कि जब तक उनके रहने के लिए कोई वैकल्पिक जमीन या पुनर्वास की व्यवस्था नहीं की जाती, तब तक वे आगे की झोपड़ियों को टूटने नहीं देंगे। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जोर-जबरदस्ती की गई, तो बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक रेल पटरियों और सड़कों पर उतरकर चक्का जाम कर देंगे।
2026 के इस दौर में, जहाँ एक तरफ विकास के लिए रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना जरूरी है, वहीं सालों से बसी बस्तियों का अचानक विस्थापन एक मानवीय संकट भी खड़ा करता है। इस पूरी कार्रवाई के दौरान स्थानीय लोगों में क्षेत्र के राजनीतिक जनप्रतिनिधियों के खिलाफ भी भारी आक्रोश देखा गया। लोगों का साफ कहना है कि चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे करने वाले नेता आज इस मुसीबत की घड़ी में उनके पक्ष में खड़े होने तक नहीं आए। अब देखना होगा कि रेल प्रशासन और जिला प्रशासन मिलकर इन विस्थापितों के रहने के लिए क्या बीच का रास्ता निकालता है, ताकि प्लेटफॉर्म का विस्तार भी बिना किसी कानून-व्यवस्था के संकट के शांतिपूर्ण ढंग से पूरा हो सके।
What's Your Reaction?


