Latehar Strike : लातेहार में 10 लाख का इनामी जोनल कमांडर गिरफ्तार, AK-47 और कैश बरामद, 20 साल से फैला रखा था आतंक
लातेहार पुलिस ने प्रतिबंधित माओवादी संगठन के 10 लाख के इनामी जोनल कमांडर मृत्युंजय भुइयां को दबोच लिया है। साथ ही 2 लाख का इनामी उग्रवादी भी हत्थे चढ़ा है। इनके पास से AK-47 राइफल और भारी मात्रा में नकद बरामद हुआ है। झारखंड पुलिस की इस ऐतिहासिक सफलता की पूरी इनसाइड स्टोरी यहाँ देखें।
लातेहार/झारखंड, 14 मार्च 2026 – झारखंड के लातेहार जिले में पुलिस ने नक्सलवाद की कमर तोड़ते हुए एक बड़ी ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। प्रतिबंधित माओवादी संगठन के 'पोस्टर बॉय' और 10 लाख रुपये के इनामी जोनल कमांडर मृत्युंजय भुइयां उर्फ फ्रेश भुईयां को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। यह गिरफ्तारी महज एक अपराधी की पकड़ नहीं है, बल्कि लातेहार और पलामू प्रमंडल में दशकों से चल रहे आतंक के एक अध्याय का अंत है। लातेहार एसपी कुमार गौरव के नेतृत्व में चलाए गए इस सीक्रेट ऑपरेशन ने नक्सलियों के मनोबल को पूरी तरह धराशायी कर दिया है।
हरिनामांड़ में बिछाया गया जाल: राशन खरीदने आए थे उग्रवादी
पुलिस को सटीक गुप्त सूचना मिली थी कि जोनल कमांडर मृत्युंजय भुइयां अपने दस्ते के साथ छिपादोहर थाना क्षेत्र के हरिनामांड़ गांव के पास रसद और जरूरी सामान खरीदने पहुँचने वाला है।
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घेराबंदी और रेड: एसपी ने तुरंत एक स्पेशल टीम का गठन किया और घने जंगलों के बीच बसे गांव की घेराबंदी कर दी।
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दो गिरफ्तार, तीन फरार: छापेमारी के दौरान पुलिस ने मृत्युंजय भुइयां और उसके साथी 2 लाख के इनामी उग्रवादी बबलू राम उर्फ बबलू चंद्रवंशी को दबोच लिया। हालांकि, अंधेरे और घने जंगल का फायदा उठाकर इनके तीन अन्य साथी भागने में सफल रहे।
AK-47 और डेढ़ लाख कैश: बरामदगी ने उड़ाए होश
गिरफ्तारी के बाद जब तलाशी ली गई, तो पुलिस को नक्सलियों के पास से युद्ध जैसा साजो-सामान मिला:
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विनाशकारी हथियार: इनके पास से एक चमचमाती AK-47 राइफल और 21 मैगजीन बरामद की गई है।
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फंडिंग का खुलासा: मौके से करीब डेढ़ लाख रुपये नकद, माओवादी पर्चे, रेडियो, चार सिम कार्ड और मेमोरी कार्ड भी मिले हैं।
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नेटवर्क की कड़ियाँ: पुलिस का मानना है कि मेमोरी कार्ड और सिम कार्ड से संगठन के स्लीपर सेल और लेवी (रंगदारी) देने वालों की पूरी लिस्ट मिल सकती है।
20 साल का आतंक और 104 मुकदमों की फाइल
मृत्युंजय भुइयां कोई साधारण अपराधी नहीं है; उसका इतिहास झारखंड के नक्सल आंदोलनों के खूनी संघर्ष से जुड़ा है।
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दो दशकों का खौफ: वह पिछले 20 साल से संगठन में सक्रिय था। उसने झारखंड में माओवाद के उतार-चढ़ाव को देखा और कई बड़े हमलों की रणनीति तैयार की।
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अपराध का रिकॉर्ड: जोनल कमांडर मृत्युंजय पर हत्या, लूट, लेवी वसूली और सुरक्षा बलों पर हमले के कुल 104 मामले दर्ज हैं। वहीं, उसके साथी बबलू राम पर 15 गंभीर मामले दर्ज हैं।
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झारखंड-छत्तीसगढ़ कनेक्शन: ऐतिहासिक रूप से लातेहार और पलामू का इलाका माओवादियों के लिए 'बूढ़ा पहाड़' और 'सारंडा' के बाद सबसे बड़ा गढ़ रहा है। मृत्युंजय का नेटवर्क केवल लातेहार ही नहीं, बल्कि गढ़वा, पलामू और पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती इलाकों तक फैला हुआ था। विकास कार्यों (सड़क और पुल निर्माण) में बाधा डालना और ठेकेदारों से लेवी वसूलना इसका मुख्य पेशा बन गया था।
पुलिस का 'क्लीन स्वीप' मिशन जारी
एसपी कुमार गौरव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि यह लातेहार पुलिस के लिए एक बड़ी उपलब्धि है, लेकिन मिशन अभी खत्म नहीं हुआ है।
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सर्च ऑपरेशन तेज: फरार तीन उग्रवादियों की तलाश में कोबरा (CoBRA) और झारखंड जगुआर की टीमें जंगलों में सर्च ऑपरेशन चला रही हैं।
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सुरक्षा अलर्ट: नक्सलियों की संभावित प्रतिक्रिया को देखते हुए सभी थानों और पिकेट्स को हाई अलर्ट पर रखा गया है। पुलिस अब इन उग्रवादियों से पूछताछ कर संगठन के भविष्य के मंसूबों को नाकाम करने की कोशिश कर रही है।
10 लाख के इनामी मृत्युंजय भुइयां की गिरफ्तारी लातेहार के जंगलों में शांति की एक नई किरण लेकर आई है। AK-47 जैसे घातक हथियारों का मिलना यह बताता है कि ये उग्रवादी किसी बड़ी घटना को अंजाम देने की फिराक में थे। झारखंड पुलिस की इस 'सर्जिकल स्ट्राइक' ने यह साफ संदेश दे दिया है कि आतंक का रास्ता चुनने वालों के लिए अब कोई जगह नहीं बची है।
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